ICC का भी बॉयो-बबल मॉडल से मोह भंग, फुटबॉल प्रीमियर लीग की तर्ज पर खेली जा सकती है क्रिकेट

आईसीसी के सूत्र ने बताया, प्रीमियर लीग में, आयोजक कोरोना पॉजिटिव आने वाले के करीबी संपर्कों को भी आइसोलेशन में नहीं भेजते हैं। जिनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आते ही उन्हें ही क्वारंटीन किया जाता है। सूत्र ने पुर्तगाली फुटबॉल टीम के मैनेजर जोस मॉरिन्हो का उदाहरण दिया।

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बॉयो-बबल लाइफ क्रिकेटर्स के मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल रही है। (एक्सप्रेस अर्काइव)

इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) का बॉयो बबल मॉडल में खेल कराने का मोह भंग हो गया है। पता चला है कि बॉयो-बबल को दरकिनार करते हुए क्रिकेट फुटबॉल प्रीमियर लीग मॉडल में जाने के लिए तैयार है। शुक्रवार यानी 12 नवंबर 2021 को आईसीसी की मुख्य कार्यकारी समिति की बैठक में बॉयो-बबल मुद्दे पर गहन चर्चा हुई। चर्चा के दौरान सदस्यों ने इस बात पर सहमति जताई कि बॉयो-बबल मॉडल लंबे समय तक चल सकने वाला नहीं।

इंडियन एक्सप्रेस ने आईसीसी के सूत्र के हवाले से लिखा है, एक प्रीमियर लीग तरह का मॉडल, जहां कोई बॉयो-बबल नहीं है, लेकिन सभी स्टेकहोल्डर्स का नियमित रूप से परीक्षण किया जाना ही आगे बढ़ने का संभावित तरीका है। सूत्र ने बताया, ‘प्रीमियर लीग में, आयोजक कोरोना पॉजिटिव आने वाले के करीबी संपर्कों को भी आइसोलेशन में नहीं भेजते हैं। जिनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आते ही उन्हें ही क्वारंटीन किया जाता है।’

सूत्र ने पुर्तगाली फुटबॉल टीम के मैनेजर जोस मॉरिन्हो का उदाहरण दिया। सूत्र ने बताया, ‘जोस मॉरिन्हो जब टोटेनहम हॉटस्पर के मैनेजर थे, मैट डोहर्टी के संपर्क में आने के बाद वह पॉजिटिव रिपोर्ट आने को लेकर वह कैसे डरे हुए थे। दरअसल, मैट डोहर्टी कोविड पॉजिटिव आए थे, लेकिन मॉरिन्हो की रिपोर्ट निगेटिव आई और यह अच्छा था।’

बता दें कि बबल लाइफ खिलाड़ियों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है। विशेष रूप से उन टीमों के लिए जो सभी फॉर्टे्स में खेलने का ओवरलोड है। उदाहरण के लिए, भारतीय टीम विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल के लिए 2 जून को इंग्लैंड के लिए रवाना हुई। सितंबर के दूसरे सप्ताह में ओल्ड ट्रैफर्ड में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज का आखिरी टेस्ट होने तक खिलाड़ी बॉयो-बबल में रहे। इसके बाद अधिकांश खिलाड़ी सीधे आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2021 तक इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के बॉयो-बबल में चले गए।

टीम इंडिया के तत्कालीन हेड कोच रवि शास्त्री ने विश्व कप में अपनी टीम के आखिरी मैच के बाद इस तरह के लंबे बबल जीवन का उल्लेख किया था। उन्होंने कहा था, ‘जब आप 6 महीने बुलबुले में होते हैं… बहुत ऐसे खिलाड़ी होते हैं जो खेल के तीनों फॉर्मेट्स में खेलते हैं। पिछले 24 महीनों में, वे सिर्फ 25 दिन घर पर रहे हैं। मुझे परवाह नहीं है कि आप कौन हैं, अगर आपका नाम ब्रैडमैन है, अगर आप भी बबल में तो भी आपका औसत नीचे आ जाएगा, क्योंकि आप एक इंसान हैं, जल्दी ही बुलबुला फट जाएगा। इसलिए आपको सावधान रहना होगा।’

एक साल पहले, व्हाइट बॉल फॉर्मेट में इंग्लैंड के कप्तान इयोन मॉर्गन ने भी बबल जीवन के तनाव के कारण खिलाड़ियों के दौरे/सीरीज से बाहर होने की भविष्यवाणी की थी। मॉर्गन ने एक चैरिटी कार्यक्रम के दौरान कहा था, ‘हमने एक टीम के रूप में इस (मुद्दे) के बारे में बात की है। हमने स्वीकार किया है कि अगर खिलाड़ी को लगता है कि यह उनके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है, वह बबल से बाहर आ जाएगा।’ बता दें कि आईसीसी सदस्यों ने मॉडल बदलने के लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं की है।

क्या होता है बॉयो-बबल, इसके भीतर कैसी होती है लाइफ

बॉयो बबल नया शब्द नहीं है। आईपीएल के पिछले सीजन में भी यह चर्चा में था। बॉयो बबल को इको बबल भी कहते हैं। यह एक तरह का सुरक्षित वातावरण होता है। मैच से जुड़े सभी खिलाड़ी और सपोर्ट स्टाफ इसमें रहते हैं। यह क्वारनटीन जैसा ही होता है, लेकिन इसमें सख्ती ज्यादा होती है। इसमें जो भी जाता है, वह बाहरी दुनिया से पूरी तरह कट जाता है।

खिलाड़ियों का कोरोना टेस्ट करने वाली टीम को भी इसका पालन करना होता है। वह टीम भी बॉयो बबल से बाहर नहीं जा सकती। बॉयो-बबल में वे लोग ही जा सकते हैं, जिनका कोरोना टेस्ट हुआ और उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई हो। मतलब जो पूरी तरह से संक्रमण से दूर हों।

यब बबल मैदान से लेकर होटल तक बनाया जाता है। खिलाड़ी इसके बीच में रहते हैं। इसके अंदर जितने लोग होते हैं वे ही सिर्फ आपस में मिल सकते हैं। टूर्नामेंट के खत्म होने तक वे इस बबल से बाहर नहीं निकल सकते। विशेष परिस्थिति में बाहर जाने वाले को और बबल में लौटने से पहले क्वारनटीन होना पड़ता है।

कोरोना रिपोर्ट निगेटिव होने के बाद ही वह दोबारा बॉयो-बबल में प्रवेश कर सकता है। बीसीसीआई के मौजूदा नियमों के मुताबिक, अगर कोई भी बॉयो-बबल तोड़ता है तो वह आचार संहिता का दोषी माना जाएगा। उस पर कुछ मैचों का प्रतिबंध भी लग सकता है।

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