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15 साल की ज्योति को मिल सकता है देश के लिए खेलने का मौका, पिता को बैठा चलाई थी 1200 किमी साइकिल

साइक्लिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष ओंकार सिंह ने गुरुवार को बताया कि अगर कक्षा आठ की छात्रा ज्योति कुमारी ट्रायल पास करती है, तो उसे दिल्ली स्थित आईजीआई स्टेडियम परिसर में अत्याधुनिक नेशनल साइक्लिंग अकादमी में प्रशिक्षु के रूप में चुना जाएगा।

Author Edited By आलोक श्रीवास्तव नई दिल्ली | Updated: May 22, 2020 1:33 PM
ज्योति ने लॉकडाउन के कारण गुड़गांव से बिहार के दरभंगा तक की करीब 1200 किमी की दूरी साइकिल से 8 दिन में तय की।

कोरोनावायरस के कारण लॉकडाउन के बीच घायल पिता को गुड़गांव से साइकिल पर बैठाकर बिहार के दरभंगा पहुंची 15 साल की ज्योति कुमारी को देश के लिए खेलने का मौका मिल सकता है। दरअसल, भारतीय साइक्लिंग फेडरेशन (सीएफआई) ने उन्हें दिल्ली आकर ट्रायल देने का मौका देने की बात कही है। साइक्लिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष ओंकार सिंह ने गुरुवार को बताया कि अगर ज्योति ट्रायल पास करती है, तो उसे दिल्ली स्थित आईजीआई स्टेडियम परिसर में अत्याधुनिक नेशनल साइक्लिंग अकादमी में प्रशिक्षु के रूप में चुना जाएगा।

ज्योति ने पिता मोहन पासवान को साइकिल पर बैठाकर गुड़गांव से दरभंगा तक की करीब 1200 किमी की दूरी 8 दिन तय की। ज्योति ने इस दौरान रोजाना 100 से 150 किमी साइकिल चलाई। यह सामने आने के बाद कि उसने अपने बीमार पिता के साथ गुड़गांव से बिहार तक 1200 किमी साइकिल चलाई है, 15 साल की ज्योति कुमारी की कहानी पिछले हफ्ते सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी।

सिंह ने कहा, ‘हमने आज सुबह लड़की से बात की है। हमने उसे बताया कि जैसे ही लॉकडाउन हटेगा, उसे अगले महीने दिल्ली बुलाया जाएगा। उसकी यात्रा, ठहरने और अन्य खर्चों का सारा खर्च फेडरेशन उठाएगा।’ उन्होंने कहा, ‘अगर उसे घर से किसी के साथ जाने की जरूरत है, तो हम उसके लिए भी तैयार हैं। हम अपनी बिहार इकाई के साथ बातचीत करके देखेंगे कि ट्रायल के लिए कैसे उसे दिल्ली लाया जा सकता है।’

ज्योति को ट्रायल देने के पीछे तर्क के बारे में पूछे जाने पर, सिंह ने कहा, ‘मुझे लगता है कि 1200 किमी से ज्यादा साइकिल चलाना आसान काम नहीं है। उसके पास ताकत और शारीरिक सहनशक्ति होनी चाहिए। हम इसका टेस्ट करना चाहते हैं। अगर वह हमारे मानकों पर खरी उतरती है तो उसकी पूरी मदद करेंगे। हम उसे एकेडमी में रखेंगे। कंप्यूटरीकृत साइकिल पर ट्रेनिंग देंगे। सीएफआई सदैव प्रतिभा को निखारने की कोशिश करता है।’

वहीं, घर में ही क्वारंटीन रहकर समय काट रही ज्योति ने बताया कि अगर उसे मौका मिलता है, तो वह जरूर ट्रायल देगी। ज्योति ने बताया, ‘मेरे पास साइक्लिंग फेडरेशन वालों का फोन आया था। उन्होंने ट्रायल के बारे में बताया। अभी मैं बहुत थकी हुई हूं, लेकिन लॉकडाउन के बाद अगर मुझे मौका मिला, तो मैं जरूर ट्रायल में हिस्सा लेना चाहूंगी। अगर मैं सफल रहती हूं, तो मैं भी साइक्लिंग में भारत का प्रतिनिधित्व करना चाहती हूं।’ ज्योति तीन बहन और दो भाइयों में दूसरे नंबर पर हैं। वह पढ़ाई छोड़ चुकी हैं। हालांकि, अगर उन्हें मौका मिलता है तो वह दोबारा पढ़ाई करना चाहती हैं

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