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Covid-19: इटली से 263 भारतीयों को बचाने में यह पूर्व आलराउंडर भी रहा शामिल, 4 शतक लगाने के साथ ले चुके हैं 148 विकेट

Coronavirus: सुखविंदर सिंह ने 1986 से 2004 तक अपने फर्स्ट क्लास करियर में 47 मैच में 148 विकेट लिए। इस दौरान 4 शतक की मदद से 2076 रन भी बनाए।

सुखविंदर सिंह1986 से 2004 तक फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेले थे। (सोर्स- सोशल मीडिया)

कोरोनावायरस के कारण दुनिया की एक तिहाई आबादी लॉकडाउन है। चीन से शुरू हुई इस बीमारी का केंद्र अब यूरोप बन गया है। वहां इटली और स्पेन में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। 22 मार्च को इटली के रोम में फंसे 263 भारतीयों को एयर इंडिया के विमान से एयरलिफ्ट किया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबको सुरक्षित लाने पर कैप्टन स्वाति रावल और एयर इंडिया के कैप्टन राज चौहान की तारीफ की। इस ऑपरेशन में लगे लोगों में दिल्ली और असम के पूर्व ऑलराउंडर और विमान के ‘सीनियर पर्सर’ सुखविंदर सिंह भी शामिल थे।

द हिंदू की खबर के मुताबिक, 20 सदस्यीय केबिन-क्रू 21 मार्च को इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर अपने करियर के सबसे महत्वपूर्ण कार्य को करने के लिए पहुंची थी। इस दौरान उन्हें इटली के 120 लोगों को लेकर जाना था। वापसी में भारतीय छात्रों को वहां से लाना था। सुखविंदर 30 साल से एयर इंडिया के कर्मचारी हैं। उन्हें भी इटली जाना था। सुखविंदर ने कहा, ‘‘जब मैं नहीं खेल रहा था, तो मैं उड़ रहा था।’’

सुखविंदर ने 1986 से 2004 तक अपने फर्स्ट क्लास करियर में उन्होंने 47 मैच में 148 विकेट लिए। इस दौरान 4 शतक की मदद से 2076 रन भी बनाए। 53 साल के सुखविंदर ने कहा, ‘‘जीवन में चुनौतियों का सामना करने के लिए क्रिकेट मेरे लिए एक प्रेरणा है। यह हमारे लिए एक मिशन था। हम युवाओं को वापस लाने जा रहे थे। यह देश की सेवा करने का अवसर था। एयर इंडिया संकट के इस समय में शानदार काम कर रहा है। इसने हमारे देशवासियों को वुहान और मिलान से बाहर निकाला। हमें इस परिवार का हिस्सा होने पर गर्व हैं।’’

सुखविंदर ने कहा, ‘‘सभी क्रू-मेंबर जानते थे कि यह समय की मांग है। हमने स्थिति की गंभीरता को समझा हमें सुरक्षा के सारे उपकरण दिए गए थे। इसमें कोविड-19 वायरस से बचने के लिए हजमत शूट भी शामिल था। मैं बिल्कुल भी डरा नहीं। क्रिकेटर होने के नाते मैंने कई चुनौतियों और दबाव का सामना किया है। मैं इस ऐतिहासिक उड़ान का हिस्सा बनने जा रहा था। हमने वहां से अपने युवाओं को बाहर निकाला। जब हम वापस लौटे तो कई लोगों की आंखों में खुशी के आंसू थे।’’

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