कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल जीतना हर खिलाड़ी के लिए करियर के सबसे यादगार पलों में से एक होता है। पोडियम पर खड़े होकर जब खिलाड़ी गले में मेडल पहनता है, तो वह सिर्फ एक प्रतियोगिता का परिणाम नहीं होता, बल्कि वर्षों की मेहनत, संघर्ष और सपनों की पहचान बन जाता है।
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मिलने वाले मेडल सिर्फ सफलता का प्रतीक नहीं, बल्कि अपने अंदर पूरे शहर की कहानी भी समेटे होंगे, क्योंकि ऐसे आयोजन सिर्फ खेलों का मंच नहीं होते, बल्कि वे उस शहर की पहचान और संस्कृति को भी दुनिया के सामने लाते हैं, जहां उनका आयोजन होता है।
ग्लासगो 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में मिलने वाले मेडल भी इसी सोच को आगे बढ़ाते हैं। ये मेडल सिर्फ खिलाड़ियों की जीत और उपलब्धि का प्रतीक नहीं होंगे, बल्कि इनमें ग्लासगो का इतिहास, उसकी औद्योगिक विरासत और सांस्कृतिक पहचान भी दर्ज होगी।
करीब 3000 खिलाड़ी, 74 देशों और क्षेत्रों की भागीदारी वाले इस आयोजन में हर मेडल अपने साथ एक अलग कहानी लेकर आएगा, लेकिन ग्लासगो 2026 के मेडल को खास बनाता है इसका अनोखा डिजाइन। कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में पहली बार ब्रेल और टैक्टाइल (स्पर्श से महसूस किए जा सकने वाले) तत्वों को शामिल किया गया है, ताकि उपलब्धि का यह अनुभव ज्यादा समावेशी और हर खिलाड़ी के लिए महसूस किया जा सके।
ग्लासगो की पहचान से प्रेरित है मेडल का डिजाइन
इन मेडल्स को तैयार पुरस्कार विजेता कलाकार, डिजाइनर और मेकर मिलित्सा मिलेंकोवा ने किया है। वह ग्लासगो स्कूल ऑफ आर्ट की आर्टिस्ट इन रेजिडेंस भी हैं। मेडल को पारंपरिक गोल आकार से अलग Reuleaux Triangle (घुमावदार त्रिकोणीय आकृति) का रूप दिया गया है।
इसकी तीनों बराबर गोल घुमावदार भुजाएं ग्लासगो की पहचान और विरासत को दर्शाती हैं। यही खासियत इसे अब तक के कॉमनवेल्थ गेम्स के पदकों से अलग बनाती है। इस ज्यामितीय आकृति की हर घुमावदार रेखा और हर कोण ग्लासगो शहर की पहचान से जुड़ा है।
इसके डिजाइन में शहर के इतिहास और संस्कृति को बेहद बारीकी से शामिल किया गया है। मेडल में ग्लासगो के कोट ऑफ आर्म्स, शहर की औद्योगिक विरासत का प्रतीक फिन्नीस्टन क्रेन और पारंपरिक टार्टन पैटर्न को जगह दी गई है। मतलब यह मेडल सिर्फ किसी खिलाड़ी की जीत की निशानी नहीं होगा, बल्कि ग्लासगो की स्मृति भी होगा जिसने इन खेलों की मेजबानी की।
तीन स्तरों में छिपा है पोडियम का अहसास
मेडल की सतह को तीन अलग-अलग स्तरों में डिजाइन किया गया है। यह तीनों स्तर पोडियम के तीन स्थानों का प्रतीक हैं। डिजाइन का उद्देश्य यह है कि जब खिलाड़ी इसे हाथ में ले या इसे पहने तो उसे महसूस हो कि यह पल पूरी तरह उसका है।
कई खिलाड़ियों के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स का मेडल उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक होता है। डिजाइन टीम ने इसी भावना को मेडल के आकार और बनावट में उतारने की कोशिश की है।
पहली बार ब्रेल और टैक्टाइल डिजाइन से जुड़ी समावेशिता
ग्लासगो 2026 के मेडल्स की सबसे बड़ी खासियत उनका समावेशी डिजाइन है। कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में पहली बार मेडल पर ब्रेल और टैक्टाइल एलिमेंट्स दिए गए हैं, ताकि दृष्टिबाधित खिलाड़ी भी इस सम्मान को सिर्फ देख नहीं बल्कि महसूस कर पाएं। यह बदलाव सिर्फ डिजाइन में नया प्रयोग नहीं है, बल्कि यह संदेश है कि खेलों में उपलब्धि हर खिलाड़ी की है और उसका अनुभव भी हर किसी के लिए समान होना चाहिए।
3000 खिलाड़ी, 74 देश और हजारों कहानियां
ग्लासगो 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में करीब 3000 खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। ये खिलाड़ी कॉमनवेल्थ के 74 देशों और क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करेंगे। हर मेडल अपने साथ एक अलग कहानी लेकर आएगा। कोई खिलाड़ी पहली बार अंतरराष्ट्रीय मंच पर उतरेगा तो कोई पुराना चैंपियन अपनी विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगा। इस बार कुल 215 मेडल इवेंट्स आयोजित होंगे। इनमें खेल और पैरा स्पोर्ट्स दोनों शामिल हैं। अनुमान के मुताबिक इन प्रतियोगिताओं में 1168 तक मेडल दिए जा सकते हैं।
छोटे दायरे में बड़ा आयोजन
ग्लासगो 2026 की एक और खास बात यह है कि यह बेहद कॉम्पैक्ट गेम्स होंगे। मेडल इवेंट्स कुल 10 खेलों और छह पैरा स्पोर्ट्स में आयोजित किये जाएंगे। सभी प्रतियोगिताएं शहर के चार प्रमुख वेन्यू में होंगी, जो करीब आठ मील के दायरे में स्थित है। इससे खिलाड़ियों, दर्शकों और आयोजन से जुड़े लोगों को एक अलग तरह का अनुभव मिलेगा, जहां खेल और शहर के बीच दूरी कम होगी।
मेडल में दर्ज होगी ग्लासगो 2026 की विरासत
कॉमनवेल्थ गेम्स सिर्फ रिकॉर्ड, पदक और जीत-हार की कहानी नहीं होते। वे उन शहरों की पहचान भी बनाते हैं जो उनकी मेजबानी करते हैं। ग्लासगो 2026 के मेडल इसी सोच को आगे बढ़ाते हैं। इसमें एक तरफ खिलाड़ी की मेहनत और उपलब्धि है तो दूसरी तरफ उस शहर की आत्मा भी है जिसने इन खेलों को अपना मंच दिया है। जब खिलाड़ी यह मेडल पहनेंगे, तो वे सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं जीतेंगे, बल्कि ग्लासगो की एक कहानी को भी अपने साथ लेकर जाएंगे।
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