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कॉमनवेल्थ गेम्स 2018ः तमगों की उम्मीदें यहां भी

याद करें रियो ओलंपिक से पहले जिमनास्टिक में भारत को किस नजर से देखा जा रहा था लेकिन दीपा कर्मकार के जोरदार प्रदर्शन ने सबको अचंभित कर दिया।

Author April 5, 2018 2:40 AM

मनीष कुमार जोशी

जिमनास्टिक

याद करें रियो ओलंपिक से पहले जिमनास्टिक में भारत को किस नजर से देखा जा रहा था लेकिन दीपा कर्मकार के जोरदार प्रदर्शन ने सबको अचंभित कर दिया। राष्ट्रमंडल खेल 2014 में दीपा ने इस खेल में पदक जीतकर उम्मीद तो बांधी ही है। दीपा गोल्ड कोस्ट खेलों में भाग नहीं ले रही हैं। भारत की अरुणा रेड्डी इस बार पदक की दावेदार हैं। वे हाल ही में मेलबर्न में संपन्न जिमनास्टिक विश्व कप में भारत की ओर से पदक जीतने वाली पहली खिलाड़ी बनीं।
उन्होंने यहां कांसा जीता।

स्क्वैश

भारत में स्क्वैश अन्य खेलों जितना लोकप्रिय नहीं है। देश में लोग स्क्वैश के बारे में दीपिका पल्लीकल और जोशना चिनप्पा के कारण जानते हैं। यही दो खिलाड़ी हैं जिन्होंने ग्लास्गो खेलों में भारत को पहली बार स्क्वैश में पदक दिलाया था। इस बार भी भारत को चिनप्पा और दीपिका से उम्मीदे हैं। दीपिका और चिनप्पा के अलावा इस बार भारत के लिए सौरभ घोषाल से भी पदक की उम्मीद है।

साइकिलिंग

साइकिलिंग टीम ने  एशियन साइकिलिंग मे चार पदक जीते जिनमें तीन स्वर्ण पदक हैं। भारतीय साइकिलिस्ट थोड़ी मेहनत और भाग्य के साथ कामयाबी हासिल कर सकते हैं।

बास्केटबॉल

बास्केटबॉल में राष्ट्रमंडल खेलों में 2006 के बाद भारत गोल्ड कोस्ट में भाग ले रहा है। भारत के पास इस खेल में एक ही उपलब्धि है कि इसके तीन खिलाड़ी सतनाम, पालप्रीत और अमज्योत सिंह एनबीए मे खेल चुके हैं। हाल ही में भारतीय टीम ने ताकतवर चीन को फीबा के एक मैच में हराया।
साइकिलिंग में भी भारत का रेकॉर्ड अच्छा नहीं रहा है लेकिन भारतीय साइकिलिस्ट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जब भी अवसर मिलता है अपना प्रदर्शन करते हैं। साइकिलिंग टीम ने हाल ही में मलेशिया में संपन्न एशियन साइकिलिंग मे चार पदक जीते जिनमें तीन स्वर्ण पदक हैं। इसी आधार पर गोल्डकोस्ट के लिए टीम चुनी गई है। भारतीय खिलाड़ियों के लिए आस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के खिलाड़ियों को चुनौती दे पाना कठिन है परन्तु थोड़ी मेहनत और भाग्य के साथ वे बड़ी कामयाबी हासिल कर सकते हैं।

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