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शतरंज ओलंपियाड में फिर चीन की धमक

शतरंज के बोर्ड पर अपनी मजबूत चालों से चीन धीरे-धीरे किलेबंदी मजबूत कर रहा है। चीन ने 2014 में पहली बार शतरंज ओलंपियाड में स्वर्ण पदक जीतकर इसके सिंहासन पर दावा ठोका था।

Author October 18, 2018 4:08 AM
मजबूत टीम होने के बावजूद भारत पुरुष वर्ग में छठे और महिला वर्ग में आठवें स्थान पर रहा।

मनीष कुमार जोशी

शतरंज के बोर्ड पर अपनी मजबूत चालों से चीन धीरे-धीरे किलेबंदी मजबूत कर रहा है। चीन ने 2014 में पहली बार शतरंज ओलंपियाड में स्वर्ण पदक जीतकर इसके सिंहासन पर दावा ठोका था। इसके बाद से ही चीनी खिलाड़ियों को शतरंज की दुनिया में गंभीरता से लिया जाने लगा। हालांकि व्यक्तिगत स्पर्धाओं में अभी भी वो संघर्षरत हैं लेकिन टीम स्पर्धाओं में उन्होंने दमदार प्रदर्शन किया है। जॉर्जिया के बातुनी शहर में आयोजित 43वें शतरंज ओलंपियाड में चीन ने पुरुष और महिला दोनों वर्गों में स्वर्ण पदक जीता। उसने यह जीत तब हासिल की जब, दुनिया की टॉप रैकिंग टीमें अमेरिका, रूस और उक्रेन फॉर्म में थीं। वहीं मजबूत टीम होने के बावजूद भारत पुरुष वर्ग में छठे और महिला वर्ग में आठवें स्थान पर रहा।

इस साल प्रतियोगिता के पुरुष वर्ग में 180 और महिला वर्ग में 146 देशों ने भाग लिया। इस संख्या से अंदाजा लगाया जा सकता है कि खिलाड़ियों के बीच कितनी कड़ी प्रतिस्पर्धा रही। आमतौर पर ओलंपियाड के बजाए व्यक्तिगत स्पर्धाओं में भाग लेने वाले दुनिया के उम्दा शतरंज खिलाड़ियों ने भी इस बार प्रतियोगिता में भाग लिया। ब्लादिमिर क्रेमनिक, बोरिस गेलफेण्ड, फेबियानो कोरोना और विश्वनाथन आनंद ने अपनी चाले चलीं। इस बार लोगों की निगाहें ब्लादिमिर क्रेमनिक और विश्वनाथन आनंद पर थीं। आनंद के टीम में होने से भारत की उम्मीदें भी बहुत बढ़ गई थीं। वह 2014 के प्रदर्शन को दोहराते हुए कांस्य पदक जीतना चाहता था। हालांकि चीन के मास्टरों और पोलैंड के चमत्कृत प्रदर्शन के कारण भारत पिछड़ गया। पुरुष वर्ग में चीन ने आठ मैच जीते। दो ड्रॉ और एक हार के साथ उसने 18 अंक हासिल किए। अमेरिका और रूस ने इसी स्कोर के साथ इतने ही अंक हासिल किए।

दरअसल, अमेरिका खिताब बचाने के लिए खेल रहा था और उसका प्रदर्शन इतना अच्छा था कि लग रहा था कि वो अपना खिताब बचा लेगा। हालांकि नौवें राउंड में पोलैंड से पराजित होने के बाद खिताब उससे दूर हो गया। इसी तरह रूस भी मजबूत दावेदार था लेकिन चौथे राउंड मे पोलैंड से हारने के बाद उसकी उम्मीदों पर पानी फिर गया। रूस ने अंतिम मैचों में अमेरिका और चीन से आगे निकलने के लिए जोरदार प्रदर्शन किया लेकिन वो इनसे आगे नहीं निकल पाया। इस टूर्नामेंट में पोलेंड ने सबको आश्चर्यचकित किया। उसने अमेरिका और रूस को पराजित कर बड़ा उलटफेर किया। वहीं वह चीन से हार गया व भारत के साथ ड्रॉ खेला। पोलैंड 17 अंकों के साथ चौथे स्थान पर रहा। यदि पोलैंड का रूस और अमेरिका में से एक मैच ठीक हो जाता तो पदक निश्चित रूप से उसकी झोली में होता। चीन ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया। ऐसा लग रहा था कि वो खिताब के लिए ही खेल रहा है। डींग, यू, वेई, बू और ली सभी चतुराई से खेले और अपनी टीम के लिए अंक हासिल किए।

पुरुष वर्ग में चीन ने अपनी खोई हुई सत्ता पाई जबकि महिला वर्ग में उसने अपने खिताब का बचाव किया। महिला वर्ग में उक्रेन से चीन को कड़ी चुनौती मिली। ऐसा लग रहा था कि उक्रेन इस बार चीन को मात दे देगा लेकिन एक ट्राई ब्रेकर ने उसका खेल बिगाड़ दिया और उसे रजत से संतोष करना पड़ा। सात जीत के साथ जॉर्जिया ने कांस्य पदक जीता। टूर्नामेंट में शीर्ष वरीयता प्राप्त रूस चौथे स्थान पर रहा। पूर्व सोवियत संघ के देश शतरंज में अग्रणी माने जाते रहे हैं। उनके शातिर अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में खिताब जीतते रहे लेकिन चीन के बढ़ते वर्चस्व के बाद उनकी पकड़ कमजोर हो गई। चीन की यू वेनयून दुनिया के सर्वश्रेष्ठ शतरंज खिलाड़ियों में शूमार हैं। ओलंपियाड में उसने चार जीत और पांच ड्रॉ के साथ सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। उक्रेन की खिलाड़ियों को चीन शातिरों को मात देने में काफी जोर लगाना पड़ा।

बारह साल बाद विश्वनाथन आनंद ने ओलंपियाड में भारत की ओर से वापसी की। इससे पूर्व आनंद ने व्यक्तिगत पेशेवर प्रतियोगिताओं में व्यस्तता के चलते ओलंपियाड में भाग नहीं लिया था। आनंद के टीम में आने से भारतीय टीम मजबूत थी। ऐसा लग रहा था कि भारत 2014 का प्रदर्शन दोहराते हुए कांस्य पदक तो जीत ही लेगा लेकिन भारतीय टीम का प्रदर्शन अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रहा। भारत ने ओलंपियाड के इतिहास में 2014 में ही अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था। इस बार भी भारत को श्रेष्ठ की उम्मीद थी। भारत के अन्य खिलाड़ियों का प्रदर्शन अच्छा रहा था लेकिन आनंद के खराब प्रदर्शन के कारण भारत पदक से कुछ कदम दूरी पर रह गया। आनंद ने नौ मैचों से 5.5 अंक ही हासिल किए जबकि हरिकृष्णा ने सात और शशिकिरण ने छह अंक हासिल किए। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि भारत की ओर से कहां गलती रही।

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