चैम्पियंस ट्रॉफी 2017 फाइनल: पाकिस्‍तान से हार पर विराट कोहली को जिम्‍मेदार ठहराने वाले पहले ये जान लें - Champions Trophy 2017 Final: Virat Kohli did the last rites after the match - Jansatta
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चैम्पियंस ट्रॉफी 2017 फाइनल: पाकिस्‍तान से हार पर विराट कोहली को जिम्‍मेदार ठहराने वाले पहले ये जान लें

अब मैच में बने रहने और फॉलोऑन से बचने की जिम्मेदारी इसी 18 साल के युवा विराट कोहली पर थी। विराट के साथ टीम के विकेट कीपर पुनीत बिष्ट बैटिंग कर रहे थे।

भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली।

चैंपियंस ट्रॉफी -2017 के फाइनल में पाकिस्तान ने भारत के उम्मीदों पर पानी फेरते हुए 180 रनों से करारी मात दी है। इसी के साथ पाकिस्तान ने पहली बार चैंपियंस ट्राफी अपने नाम कर लिया। रविवार को ओवल में खेले गए मैच में सबकी निगाहें खासतौर पर भारतीय कप्तान विराट कोहली पर टिकी हुई थी। भारतीय टीम ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का निर्णय लिया। पाकिस्तान ने बल्लेबाजी करते हुए 4 विकेट खोकर 338 रन बनाया। वहीं भारत विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए 158 रन पर ही सिमट गया। कल के मैच में लोगों को निराशा उस वक्त हुई जब कोहली 5 रन ही बनाकर चलते बने।

आपको बता दें कि बतौर कप्तान विराट कोहली का ये पहला आईसीसी फाइनल मुकाबला था। जिसमें उनकी कप्तानी और बल्लेबाजी दोनों को चुनौती थी। भारत-पाक मैच के अलावा कल खास दिन एक और भी था। कल फादर्स डे था और वो अपने पिता की ख्वाहिशों को लेकर अपनी चुनौतियों का सामना कर रहे थे। उनके पिता की चाहत थी कि उनका बेटा एक दिन भारतीय क्रिकेट टीम में शामिल हो। हालांकि, वो अपने बेटे को भारतीय क्रिकेट टीम में नहीं देख सकें। जब विराट 18 साल के थे, तभी उनके पिता का देहांत हो गया था। आज वही विराट 28 साल की उम्र में भारतीय क्रिकेट टीम का कप्तान है। यही नहीं उन्हें देश के सबसे प्रतिभावान खिलाड़ियों की सूची में शामिल किया गया है।

विराट ने क्रिकेट सफर की शुरुआत 2006 में की थी। 18 दिसंबर 2006 को दिल्ली के फिरोजशाह कोटला में दिल्ली और कर्नाटक के बीच रणजी मैच खेला गया था। इसी मैच में दिल्ली की ओर से खेल रहे 18 साल के एक बच्चे ने कुछ ऐसा किया जिसने उसकी अपनी ही टीम नहीं बल्कि, विरोधियों को भी चौंका दिया। इसमें कोई दो राय नहीं कि इस घटना को फिरोजशाह कोटला क्रिकेट मैदान के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा।

कर्नाटक ने पहले खेलते हुए अपनी पहली पारी में 446 रन का लक्ष्य रखा था। ‌उस दिन दिल्ली में जबरदस्त सर्दी पड़ रही थी। लक्ष्य का पीछा करते हुए दिल्ली की टीम ने अपने शुरुआती पांच विकेट गंवा दिए थे।

अब मैच में बने रहने और फॉलोऑन से बचने की जिम्मेदारी इसी 18 साल के युवा विराट कोहली पर थी। विराट के साथ टीम के विकेट कीपर पुनीत बिष्ट बैटिंग कर रहे थे। दोनों ने दूसरे दिन कोई विकेट नहीं गिरने दिया और दिन का खेल खत्म होने तक टीम के स्कोर को 103 तक पहुंचा दिया।

दूसरे दिन का खेल खत्म होने के बाद विराट कोहली होटल के कमरे में सो रहे थे, तभी रात के तीन बजे उन्हें घर से कॉल आया कि ब्रेन स्टोक के चलते उनके पिता का निधन हो गया है। विराट कोहली के सामने बड़ी चुनौती थी। एक तरफ जहां पिता की मौत हो चुकी थी, वहीं दूसरी ओर रणजी मैच में टीम को उनकी जरूरत थी। इस मुश्किल घड़ी में फैसले लेने में मदद के लिए विराट कोहली ने अपने कोच राजकुमार शर्मा को फोन किया।

उस वक्त ऑस्ट्रेलिया में मौजूद राजकुमार शर्मा ने विराट को समझाया कि पिता चाहते थे कि वे टीम इंडिया के लिए खेलें। ऐसे में रणजी मैच की यह पारी उनके करियर के लिए बेहद जरूरी है। पिता की इच्छा का ख्याल रखते हुए आप मैच में बैटिंग करने जाएं। विराट ने भी मजबूत इरादा दिखाते हुए मैदान में उतरे और 90 रनों की पारी खेलकर टीम को फॉलोऑन से बचा लिया। इसके बाद विराट घर गए और पिता का अंतिम संस्कार किया। स्टार क्रिकेट को दिए एक इंटरव्यूह में विराट की मां ने बताया कि उस घटना के बाद उनका बेटा अचानक से बदल गया। वह मानसिक रूप से बिल्कुल मैच्योर हो गया था।

देखिए वीडियो - विराट कोहली से आखिर क्यों नाराज हैं भारत का यह पूर्व क्रिकेटर?

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