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सरिता देवी की भावनाओं को समझ सकते हैं: ओसीए

इंचियोन। माफी मांगने के बाद एल सरिता देवी का पदक बहाल करने वाले एशियाई ओलंपिक परिषद (ओसीए) ने आज कहा कि एशियाई खेलों के विवादास्पद सेमीफाइनल में हार के बाद इस मुक्केबाज की निराशा को समझा जा सकता है लेकिन पदक वितरण समारोह में उनकी भावनात्मक हरकत गैरजरूरी थी। ओसीए अध्यक्ष शेख अल फहद अल […]

Author Published on: October 4, 2014 3:16 PM

इंचियोन। माफी मांगने के बाद एल सरिता देवी का पदक बहाल करने वाले एशियाई ओलंपिक परिषद (ओसीए) ने आज कहा कि एशियाई खेलों के विवादास्पद सेमीफाइनल में हार के बाद इस मुक्केबाज की निराशा को समझा जा सकता है लेकिन पदक वितरण समारोह में उनकी भावनात्मक हरकत गैरजरूरी थी।

ओसीए अध्यक्ष शेख अल फहद अल सबाह ने खेलों की अंतिम प्रेस कांफ्रेंस में कहा, ‘‘एशियाई खेलों के आयोजन का ओसीए का मुख्य मकसद यह है कि खिलाड़ियों को अपना कौशल दिखाने का उचित मंच मिले। कभी कभी खेल में तकनीकी गलतियां होती हैं। मुक्केबाजी में अंपायरिंग को लेकर काफी मुद्दे हैं और नये नियम गलतियों को दूर करने के लिए बनाए गए हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैच हारने के बाद मैं उनकी भावनओं को समझ सकता हूं। सभी को सोल 1986 याद है जब एक मुक्केबाज :जीत से महरूम कर दिए जाने के बाद: रोेने लगा था।’’

अल सबाह ने कहा, ‘‘:लेकिन: एक खिलाड़ी के रूप में उसे समझना होगा कि पोडियम पर अन्य खिलाड़ी भी हैंं। उन्होंने भी यहां पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत की है। आप उनके लम्हें को खत्म नहीं कर सकते। विरोध दर्ज कराने का हमेशा जरिया होता है और इसे उस तरह से किया जा सकता है। मुझे खुशी है कि उन्होंने माफी मांगी और हम इस समस्या को खत्म कर सकते हैं।’’

सरिता को लाइटवेट सेमीफाइनल में अधिकांश समय दबदबा बनाने के बावजूद दक्षिण कोरिया की जिना पार्क के खिलाफ शिकस्त का सामना करना पड़ा था। इस फैसले के खिलाफ उनके विरोध को खारिज कर दिया गया जिसके बाद पदक वितरण समारोह के दौरान उन्होंने कांस्य पदक स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

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