ठंडी, धुंध भरी रविवार की सुबह यानी एक फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए केंद्रीय बजट पेश किया। बजट में खेलों के लिए सरकार ने बड़े ऐलान किए। खेलो इंडिया को अब मिशन मोड में बढ़ाया जाएगा। इसका उद्देश्य अगले दशक में भारत के खेल ढांचे और खिलाड़ियों के विकास को नई रफ्तार देना है।
इस पहल के तहत स्टेडियम और ट्रेनिंग सेंटर से लेकर स्पोर्ट्स साइंस और टेक्नोलॉजी तक हर स्तर पर सुधार किया जाएगा, ताकि जमीनी स्तर से ही टैलेंट को पोषित किया जा सके। भारत की 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारी को ध्यान में रखते हुए, यह मिशन ग्रासरूट से एलीट लेवल तक खिलाड़ियों और कोचिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर केंद्रित रहेगा।
बजट में इस रणनीति से न केवल खेलों में प्रदर्शन सुधारने की दिशा में कदम बढ़ाए गए हैं, बल्कि स्पोर्ट्स सेक्टर में रोजगार और नवाचार के अवसर भी बढ़ेंगे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अगले दशक में प्रशिक्षण केंद्र और कोच के सुनियोजित और क्रमबद्ध विकास पर भी ध्यान केंद्रित करने के लिए खेलो इंडिया मिशन शुरू करने का प्रस्ताव दिया है।
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वित्त मंत्री ने केंद्रीय बजट पेश करते हुए कहा कि यह मिशन इंटर-लिंकिंग तरीकों से एक इंटीग्रेटेड टैलेंट डेवलपमेंट प्रोग्राम को आसान बनाएगा। खेलो इंडिया प्रोग्राम 2017 में लॉन्च किया गया था और इसका मुख्य उद्देश्य टैलेंट (प्रतिभा) पहचानने के लिए अलग-अलग आयु वर्ग में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं करवाना था।
लोकसभा में अपने बजट भाषण के दौरान निर्मण सीतारमण ने कहा, ‘स्पोर्ट्स सेक्टर रोजगार, स्किलिंग और नौकरी के कई मौके देता है। खेलो इंडिया प्रोग्राम के जरिये खेल प्रतिभा का सुनियोजित और क्रमबद्ध तरीके से बढ़ावा देने की जो शुरुआत हुई है, उसे आगे बढ़ाते हुए, मैं अगले दशक में स्पोर्ट्स सेक्टर को बदलने के लिए एक खेलो इंडिया मिशन शुरू करने का प्रस्ताव रखती हूं।’
निर्मणा सीतारमण ने कहा- ये सुविधाएं मिलेंगी
- ट्रेनिंग सेंटरों द्वारा समर्थित फाउंडेशनल, इंटरमीडिएट और एलीट स्तर वाले इंटीग्रेटेड टैलेंट डेवलपमेंट पाथवे
- कोच और सपोर्ट स्टाफ का सुनियोजित और क्रमबद्ध तरीके से विकास।
- स्पोर्ट्स साइंस और टेक्नोलॉजी का इंटीग्रेशन।
- स्पोर्ट्स कल्चर को बढ़ावा देने और प्लेटफॉर्म देने के लिए प्रतियोगिताएं और लीग।
- ट्रेनिंग और प्रतियोगिताओं के लिए स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर का डेवलपमेंट।
वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि भारत में उच्चस्तरीय और किफायती खेल सामान के लिए ग्लोबल हब बनने की क्षमता है। वित्त मंत्री ने कहा, मैंने खेल के सामान के लिए एक खास पहल का प्रस्ताव दिया है जो उपकरण डिजाइन के साथ-साथ मैटेरियल साइंस में मैन्युफैक्चरिंग, रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देगी।
राष्ट्रीय कोच पुलेला गोपीचंद के नेतृत्व में खेल मंत्रालय द्वारा नियुक्त एक टास्क फोर्स ने हाल ही में उच्च गुणवत्ता वाले कोचों का एक पूल बनाने पर अधिक जोर देने की वकालत की थी। टास्क फोर्स ने कोचों के लिए एक टारगेट ओलंपिक पोडियम योजना का प्रस्ताव दिया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उन्हें वैसा ही वित्तीय सहायता मिले जैसा कि एलीट एथलीटों को मिल रहा है, ताकि भविष्य में भारत के पदक जीतने की संभावनाओं को बढ़ाया जा सके। भारत 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी करेगा और 2036 में ओलंपिक की मेजबानी के लिए भी बोली लगा रहा है।
