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35 साल के पार्थिव पटेल ने क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से लिया संन्यास, 17 साल की उम्र में किया था डेब्यू

पार्थिव पटेल ने सोशल मीडिया के जरिए अपने संन्यास का ऐलान किया। उन्होंने ट्विटर अकाउंट पर एक पोस्ट डाली। इसके बैकग्राउंड में उनकी तस्वीर है। इसमें उन्होंने लिखा है, मैं आज अपने 18 साल लंबे क्रिकेट करियर को अलविदा कह रहा हूं।

Author Edited By आलोक श्रीवास्तव नई दिल्ली | Updated: December 9, 2020 12:50 PM
parthiv Patel retirementपार्थिव पटेल ने जब डेब्यू किया था तब उनकी उम्र 17 साल 153 दिन थी।

भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज पार्थिव पटेल ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। 35 साल के पार्थिव पटेल ने महज 17 साल की उम्र में डेब्यू किया था। उन्होंने अपने 18 साल के करियर में भारत के लिए 25 टेस्ट, 38 वनडे इंटरनेशनल और दो टी20 इंटरनेशनल मैच खेले। घरेलू क्रिकेट में उन्होंने गुजरात के लिए 194 मैच खेले।

खास यह है कि पार्थिव पटेल ने गुजरात के लिए पहला रणजी ट्रॉफी मैच भारत के लिए डेब्यू करने के दो साल दो महीने बाद नवंबर 2004 में खेला था। पार्थिव पटेल ने सोशल मीडिया के जरिए अपने संन्यास का ऐलान किया। उन्होंने ट्विटर अकाउंट पर एक पोस्ट डाली। इसके बैकग्राउंड में उनकी तस्वीर है। इसमें उन्होंने लिखा है, मैं आज अपने 18 साल लंबे क्रिकेट करियर को अलविदा कह रहा हूं। बीसीसीआई ने मुझ पर भरोसा जताते हुए 17 साल की उम्र में ही टीम इंडिया के लिए खेलने का मौका दिया। बीसीसीआई ने जिस तरह से मेरा साथ दिया है उसके लिए मैं हमेशा शुक्रगुजार रहूंगा।

पार्थिव पटेल ने उन सभी कप्तानों को धन्यवाद कहा है जिनकी अगुआई में वह टीम इंडिया के लिए खेले। पार्थिव पटेल ने खासतौर पर सौरव गांगुली का शुक्रिया अदा किया। पार्थिव पटेल ने लिखा, दादा का मैं हमेशा शुक्रगुजार रहूंगा। एक कप्तान के तौर गांगुली ने हमेशा मेरा साथ दिया और उनके साथ खेलना मेरे लिए सौभाग्य की बात रही।

पार्थिव पटेल ने परिवार को समय देने के लिए क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला किया है। पार्थिव पटेल का कहना है कि वह एक क्रिकेटर के तौर पर अपनी जिंदगी को जी चुके हैं। अब उन पर पिता के तौर पर कुछ जिम्मेदारियां हैं, जिन्हें वह पूरा करना चाहते हैं।

पार्थिव पटेल ने 8 अगस्त 2002 को इंग्लैंड के खिलाफ नॉटिंघम में खेले गए टेस्ट मैच से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू किया था। जनवरी 2003 को उन्होंने अपना पहला वनडे इंटरनेशनल मैच खेला। क्वींसलैंड में खेला गया वह मैच न्यूजीलैंड के खिलाफ था। उस मैच में उन्होंने 13 रन बनाए थे। साल 2011 में उन्होंने पोर्ट ऑफ स्पेन में वेस्टइंडीज के खिलाफ मैच से अपने टी20 इंटरनेशनल करियर की शुरुआत की थी।

महेंद्र सिंह धोनी के आने के बाद पार्थिव विकेटकीपर के तौर पर दूसरी पसंद हो गए और यदा कदा बतौर बल्लेबाज ही खेले। बाद में सीमित ओवरों में सलामी बल्लेबाज के रूप में कुछ मैच खेले। पार्थिव ने लेकिन हमेशा स्वीकार किया कि वह धोनी को दोष नहीं दे सकते, क्योंकि उन्हें और दिनेश कार्तिक को धोनी से पहले टीम में अपनी जगह पक्की करने के मौके मिले थे।

वह घरेलू क्रिकेट में काफी कामयाब रहे और 194 प्रथम श्रेणी मैचों में 27 शतक समेत 11240 रन बनाए। उन्होंने आईपीएल में मुंबई इंडियंस, चेन्नई सुपर किंग्स, रॉयल चैलेंजर्स बंगलौर के लिए खेला। इस बार आरसीबी के लिए वह एक भी मैच नहीं खेल सके। उन्होंने कहा, ‘मैं आईपीएल टीमों और उनके मालिकों को भी धन्यवाद देना चाहता हूं जिन्होंने मुझे टीम में शामिल किया और मेरा ध्यान रखा।’

पार्थिव की कप्तानी में गुजरात ने 2016-17 में रणजी खिताब जीता। वह भारतीय तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह के पहले कप्तान रहे जिनके साथ2 2013 में सैयद मुश्ताक अली ट्राफी खेला। पार्थिव ने कहा, ‘मुझे सुकून है कि मैने गरिमा, खेल भावना और आपसी सामंजस्य के साथ खेला। मैने जितने सपने देखे थे, उससे ज्यादा पूरे हुए। मुझे उम्मीद है कि मुझे याद रखा जाएगा।’

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