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मुक्केबाजी में तेज प्रहार मेरी मजबूती, इसी के बूते जीतूंगा तमगा : सतीश

ओलंपिक एक साल के लिए टलने को बेहतरीन मौका बताते हुए सतीश ने कहा कि कोच द्वारा दिए टास्क को पूरा करने के अलावा मैं अपनी कमियों को दूर करने पर ध्यान दे रहा हूं।

super heavyweight, olympic, boxingसुपर हैवीवेट में ओलंपिक का टिकट हासिल करने वाले मुक्केबाज सतीश कुमार।

कोरोना संकट के बीच धीरे-धीरे पूरी दुनिया में खेल गतिविधियां शुरू होने लगी हैं। कई देशों ने अपने यहां बगैर दर्शक के प्रतियोगिताएं कराने की अनुमति दे दी है। बुंदेशलीगा जैसे कई क्लब फुटबॉल मैचों का आयोजन भी कर रहे हैं। हालांकि अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों को बहाल नहीं किया जा सका है। तोक्यो ओलंपिक पहले ही एक साल के लिए टाला जा चुका है। ऐसे में भारतीय खिलाड़ी भी अभ्यास के लिए राष्ट्रीय कैंप के शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं।

सुपर हैवीवेट में ओलंपिक का टिकट हासिल करने वाले मुक्केबाज सतीश कुमार का कहना है कि ऐसे हालात में वे घर पर ही अभ्यास कर रहे हैं। साथ ही पुराने मुकाबलों के वीडियो देख कर अपने स्ट्रेंथ पर काम कर रहे हैं।
मार्च में 91 किलोग्राम से ज्यादा भारवर्ग में ओलंपिक कोटा हासिल करने वाले सतीश लगभग ढाई महीने से घर पर ही हैं।

उन्होंने कहा कि फिलहाल वे अपनी स्ट्रेंथ पर काम कर रहे हैं। ओलंपिक एक साल के लिए टलने को बेहतरीन मौका बताते हुए सतीश ने कहा कि कोच द्वारा दिए टास्क को पूरा करने के अलावा मैं अपनी कमियों को दूर करने पर ध्यान दे रहा हूं। मुझे अभ्यास के लिए लंबा समय मिला है। इस दौरान मैं अपनी तकनीक पर काम करूंगा।

ओलंपिक में दूसरे देश के मुक्केबाजों से मुख्य चुनौती मिलने की संभावनाओं पर उन्होंने कहा कि मेरा मुकाबला आस्ट्रेलिया, जर्मनी, उज्बेकिस्तान और कजाकिस्तान के मुक्केबाजों से है। उनके पुराने मैचों के वीडियो देख कर मैं उनकी कमजोरी को अपना हथियार बनाना चाहता हूं।

हालांकि हर मैच और परिस्थिति के मुताबिक खिलाड़ी की रणनीति बदलती है। इसलिए मैं सिर्फ उनकी कमजोरियों पर ध्यान लगाने की जगह अपनी मजबूती को तवज्जो दे रहा हूं। यह सही है कि अन्य देशों के इस भारवर्ग के मुक्केबाजों की लंबाई मुझसे ज्यादा है। उनके भार में भी थोड़ा अंतर है जिसका उन्हें फायदा मिल सकता है। लेकिन, मेरे कोच का कहना है कि मैं मुकाबले के दौरान काफी तेजी से प्रहार करता हूं, तो मैं अपनी इसी खूबी को और मांजने कोशिश कर रहा हूं। मेरी मजबूती यही है। मैं इसी के सहारे देश को पदल दिलवा कर मानूंगा।

राष्ट्रीय कैंप जल्द शुरू होने की संभावना जताते हुए सतीश ने कहा कि घर पर मैं सिर्फ खुद को फिट रखने के लिए जो बन पा रहा हैं, कर रहा हूं। पूर्ण अभ्यास के लिए एक साथी की जरूरत होती है। घर पर कोई ऐसा है नहीं जिसके साथ मैं मुक्केबाजी का पूरा अभ्यास कर पाऊं। एक बार कैंप शुरू हो जाए तो आगे की रणनीति पर काम कर पाऊंगा। अपने अभ्यास को पुख्ता करने के लिए क्या वे विदेशी एथलीटों के साथ अभ्यास को तवज्जो देंगे, इसके जवाब में उन्होंने कहा कि अभी तो मुक्केबाजी संघ ने हमारे लिए जो तैयारी की है उसी पर अमल करूंगा। मुझे लगता है कि एक साल का समय लंबा होता है। ऐसे में धीरे-धीरे अभ्यास को आगे बढ़ाया जाएगा।

ओलंपिक टलने को एक बेहतरीन मौका बताने वाले सतीश के लिए अगले साल तक खुद को फिट रखना भी बड़ी चुनौती होगी। इस मुद्दे पर उन्होंने कहा कि किसी भी खिलाड़ी के लिए यह मसला है। लेकिन, हमें खुद को हर समय के लिए तैयार रखना है। मैं भी इस पर काम कर रहा हूं। हालांकि ओलंपिक तय समय के मुताबिक होता तो बेहतर होता। तब मैं फॉर्म में था। दोबारा लय हासिल करना और उसे बरकरार रखना हमारे लिए चुनौती है। पर, कोरोना के खतरे को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। खिलाड़ियों और प्रशंसकों की सुरक्षा अहम है।

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