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‘मेरे साथ अन्याय हुआ, सीरीज जीतने बाद भी किया गया था टीम से बाहर,’ सौरव गांगुली का छलका दर्द

सौरव गांगुली ने खुद के हटाए जाने के लिए सिर्फ ग्रेग चैपल को दोषी मानने से इंकार किया। उन्होंने कहा कि पूरे सिस्टम के समर्थन के बिना टीम इंडिया के कप्तान को हटाना संभव नहीं है। दूसरे भी निर्दोष नहीं हैं।

Author Edited By आलोक श्रीवास्तव नई दिल्ली | Updated: July 10, 2020 10:46 AM
Sourav Ganguly Greg Chappell

भारत के पूर्व कप्तान और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के मौजूदा अध्यक्ष सौरव गांगुली ने अपने शानदार क्रिकेट करियर के सबसे कठिन दौर के बारे में बात की है। गांगुली ने कहा कि उनके करियर में ‘सबसे बड़ा झटका’ तब लगा जब उन्हें टीम इंडिया की कप्तानी से हटा दिया गया। यही नहीं, बाद में 2005 में भारतीय टीम से भी बाहर कर दिया गया। उन्होंने कप्तानी छीनने को ‘अन्याय’ करार दिया। हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, बंगाली समाचार पत्र संगबाद प्रतिदिन से बातचीत के दौरान गांगुली का यह दर्द छलका है।

गांगुली ने बताया, वह मेरे करियर का सबसे बड़ा झटका था। वह बिल्कुल अन्याय था। मुझे पता है कि आपको हर समय न्याय नहीं मिल सकता है, लेकिन फिर भी उस तरह के तरीके से बचा जाना चाहिए था। मैं उस टीम का कप्तान था जिसने कुछ दिन पहले ही जिम्बाब्वे में जीत हासिल की थी और घर लौटने के बाद मुझसे कप्तानी छीन ली गई?

गांगुली ने कहा, मैंने भारत के लिए 2007 विश्व कप जीतने का सपना देखा था। हम 2003 में फाइनल में हार गए थे। मेरे पास सपने देखने के कारण भी थे। पिछले पांच साल में मेरी कप्तानी में टीम ने शानदार खेला, फिर चाहे वह घरेलू मैदान पर हो या विदेश में। फिर आप अचानक मुझे छोड़ दें? पहले, आप कहते हैं कि मैं एकदिवसीय टीम में नहीं हूं, फिर आपने मुझे टेस्ट टीम से भी बाहर कर दिया।

टीम इंडिया के पूर्व ओपनर ने कहा कि उन्हें इस बात का पक्का विश्वास है कि यह सब तब शुरू हुआ जब टीम इंडिया के तत्कालीन हेड कोच ग्रेग चैपल ने उनके खिलाफ बीसीसीआई को एक ईमेल भेजा था, जो ‘लीक’ हो गया था। गांगुली ने कहा,

मैं अकेले ग्रेग चैपल को दोष नहीं देना चाहता। इसमें कोई संदेह नहीं है कि शुरुआत उन्होंने ही की थी। वह अचानक मेरे खिलाफ बोर्ड को एक ईमेल भेजता है जो लीक हो जाता है। क्या ऐसा कुछ होता है? क्रिकेट टीम एक परिवार की तरह होती है। परिवार में मतभेद, गलतफहमियां हो सकती हैं लेकिन उन्हें बातचीत से सुलझाना चाहिए। आप कोच हैं, अगर आप मानते हैं कि मुझे एक निश्चित तरीके से खेलना चाहिए तो मुझे आकर बताएं। जब मैं एक खिलाड़ी के रूप में लौटा तो उन्होंने वही चीजें ब्योरवार मुझे बताईं, तो पहले क्यों नहीं?

8 जुलाई को अपना 48वां जन्मदिन मनाने वाले गांगुली ने हालांकि, सिर्फ चैपल को दोषी मानने से इंकार किया। उन्होंने कहा कि पूरे सिस्टम के समर्थन के बिना टीम इंडिया के कप्तान को हटाना संभव नहीं है। गांगुली ने कहा, दूसरे भी निर्दोष नहीं हैं। एक विदेशी कोच, जो सेलेक्शन में कुछ नहीं कहता है, भारतीय कप्तान को हटा नहीं सकता। मैं समझ चुका था कि यह पूरे सिस्टम के समर्थन के बिना संभव नहीं है। हर कोई मुझे गिराने की योजना में शामिल था। लेकिन मैं दबाव में नहीं था। मैंने आत्मविश्वास नहीं खोया।

बता दें कि 2005 में भारतीय टीम से बाहर होने के बाद, गांगुली ने 2006 में दक्षिण अफ्रीका दौरे से वापसी की। गांगुली ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी के बाद काफी रन बनाए और अगले दो साल में कई बेहतरीन पारियां खेलीं।

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