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बीसीसीआई ने दिए IPL में चीनी स्पॉन्सरशिप खत्म करने के संकेत, कहा- अन्य मुद्दों पर भी कर रहा गौर

पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ जारी तनाव के बीच आईपीएल में चीनी कंपनियों की स्पॉन्सरशिप खत्म करने की मांग हो रही है। आईपीएल का टाइटल स्पॉन्सर ‘वीवो’ है। वीवो चीनी कंपनी है।

Author Edited By आलोक श्रीवास्तव नई दिल्ली | Updated: July 1, 2020 1:38 PM
IPL China sponsorshipइंडियन प्रीमियर लीग का टाइटल स्पॉन्सर ‘वीवो’ है। वीवो चीनी कंपनी है।

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में चीनी स्पॉन्सरशिप खत्म करने के संकेत दिए हैं। बीसीसीआई के एक सूत्र ने बताया है कि IPL में चीनी कंपनियों की स्पॉनसरशिप के बारे में क्रिकेट और देश के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुए फैसला लिया जाएगा।

सूत्र ने इस बात की भी पुष्टि की कि आईपीएल की समीक्षा बैठक के लिए अब तक कोई तारीख तय नहीं की गई है। सूत्र ने बताया, अब तक आईपीएल की समीक्षा बैठक के लिए कोई तारीख तय नहीं की गई है। कई अन्य मुद्दे भी हैं जिन पर बीसीसीआई गौर कर रहा है।

गलवान घाटी में भारत और चीन के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद बीसीसीआई को चीनी कंपनियों को दिए गए स्पॉन्सरशिप अधिकार की समीक्षा के लिए आईपीएल संचालन परिषद की बैठक बुलानी पड़ी है। हालांकि, यह बैठक अब तक नहीं हो पाई है।

एक दिन पहले ही किंग्स इलेवन पंजाब के सह मालिक नेस वाडिया ने आईपीएल से चीनी कंपनियों की स्पॉनसरशिप धीरे-धीरे खत्म करने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि यह इंडियन प्रीमियर लीग है, न कि चीन प्रीमियर लीग।

इस मुद्दे पर सूत्र ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया, फ्रैंचाइजियों को अपनी राय देने का हक है। हम एक ऐसा निर्णय लेंगे जो क्रिकेट और देश के हित में होगा। एक बार जब बैठक होगी तब हम आईपीएल के सभी मुद्दों पर काम करेंगे।

पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ जारी तनाव के बीच आईपीएल में चीनी कंपनियों की स्पॉन्सरशिप खत्म करने की मांग हो रही है। आईपीएल का टाइटल स्पॉन्सर ‘वीवो’ है। वीवो चीनी कंपनी है। गलवान घाटी में 15 जून को 20 भारतीय सैनिकों के शहीद होने के बाद से चीन के उत्पादों का बहिष्कार करने की मांग लगातार जोर पकड़ रही है। भारतीय सरकार ने टिकटॉक समेत 59 चीनी ऐप को बैन कर दिया है।

सरकार ने इन एप्स को देश की संप्रभुता, अखंडता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए पूर्वाग्रह रखने वाला करार दिया है। इसमें चीन के टिकटॉक, शेयरइट और वीचैट जैसे एप भी शामिल हैं। कानून, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री, रविशंकर प्रसाद ने कहा था कि सरकार ने सुरक्षा, संप्रभुता और भारत की अखंडता बनाए रखने के लिए इन एप्स पर प्रतिबंध लगाया है।

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