ताज़ा खबर
 

बीसीसीआइ कार्यसमिति की बैठक में ‘श्रीनि’ की मौजूदगी पर उठे सवाल

एन श्रीनिवासन की मौजूदगी को लेकर बीसीसीआइ कार्यसमिति की महत्त्वपूर्ण बैठक शुक्रवार को नाटकीयता से भरी रही जिससे बोर्ड के पूर्व प्रमुख की स्थिति को लेकर वैधानिक स्पष्टता के अभाव...

Author कोलकाता | August 29, 2015 9:51 AM
सुप्रीम कोर्ट ने आइपीएल स्पॉट फिक्सिंग प्रकरण के बाद श्रीनिवासन के बीसीसीआइ अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी थी।

एन श्रीनिवासन की मौजूदगी को लेकर बीसीसीआइ कार्यसमिति की महत्त्वपूर्ण बैठक शुक्रवार को नाटकीयता से भरी रही जिससे बोर्ड के पूर्व प्रमुख की स्थिति को लेकर वैधानिक स्पष्टता के अभाव में मौजूदा अध्यक्ष जगमोहन डालमिया ने बैठक अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी। कार्यसमिति को आइपीएल मामले की चार सदस्यीय कार्यसमूह की रिपोर्ट पर चर्चा करनी थी।

सुप्रीम कोर्ट की नियुक्त जस्टिस आर एम लोढा समिति के दो फ्रेंचाइजी चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स को दो साल के लिए निलंबित किए जाने के बाद कार्यसमूह का गठन किया गया था। लेकिन श्रीनिवासन की मौजूदगी को लेकर बैठक स्थगित करनी पड़ी। सुप्रीम कोर्ट ने आइपीएल स्पॉट फिक्सिंग प्रकरण के बाद श्रीनिवासन के बीसीसीआइ अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी थी।

तमिलनाडु क्रिकेट संघ के अध्यक्ष के तौर पर बैठक में भाग लेने आए श्रीनिवासन ने अपने बचाव मेें जस्टिस श्रीकृष्णा की राय का हवाला दिया जिन्होंने कहा था कि वे बैठक में भाग ले सकते हैं। बीसीसीआइ के कुछ सदस्यों ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि वे बीसीसीआइ की बैठकों से दूर रहें। बैठक में मौजूद एक अधिकारी ने कहा कि चूंकि श्रीनिवासन की कानूनी स्थिति को लेकर स्पष्टता नहीं है लिहाजा अध्यक्ष ने बैठक स्थगित कर दी। बोर्ड के कानूनी सलाहकार ऊषानाथ बनर्जी ने भी कहा कि उन्हें श्रीनिवासन की मौजूदा कानूनी स्थिति के बारे में पता नहीं है।

अधिकारी ने बताया कि श्रीनिवासन को साफ तौर पर कहा गया कि वे बैठक में भाग नहीं लें और उन्हें इससे परे रहने के लिए कहने वाले आइपीएल अध्यक्ष राजीव शुक्ला और बीसीसीआइ कोषाध्यक्ष अनिरुद्ध चौधरी थे। इसके बावजूद श्रीनिवासन बैठक में आए। उन्होंने बोर्ड सदस्यों को अपनी स्थिति यह कहकर स्पष्ट करने की कोशिश की कि बतौर खेल प्रशासक और चेन्नई सुपर किंग्स की मालिक इंडिया सीमेंट्स के मालिक के तौर पर हितों का कोई टकराव नहीं है।

समझा जाता है कि बीसीसीआइ की सालाना आम बैठक 27 सितंबर को कोलकाता में होगी। कार्यसमिति को जस्टिस लोढा समिति की रिपोर्ट और कार्यसमूह के सुझावों पर बात करनी थी। इसमें मद्रास हाई कोर्ट के उस फैसले पर भी बात होनी थी जिसमें सीएसके लिमिटेड की दायर याचिका पर बोर्ड, इंडिया सीमेंट्स और अन्य संबंधित पक्षों को जवाबी हलफनामे दाखिल करने के लिए कहा गया था।

हाई कोर्ट ने संबंधित पक्षों को लिखित हलफनामे निर्धारित समय सीमा में जमा करने के लिए कहा है। मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी। बैठक में एनसीए समिति के उन सुझावों पर भी बात होनी थी कि अकादमी में बंगलुरु में रखना है या नहीं। इसके अलावा छत्तीसगढ़, बिहार और मणिपुर के मान्यता के मसले और तकनीकी समिति के सुझाव पर भी बात की जानी थी।

ऊषानाथ बनर्जी ने बाद में संवाददाताओं से कहा कि बीसीसीआइ में श्रीनिवासन के प्रतिनिधित्व के मुद्दे से कानूनी सलाह मशविरे के बाद निपटा जाएगा। उन्होंने कहा कि बोर्ड ने दो पूर्व न्यायाधीशों का नजरिया जाना है जिनको लगता है कि श्रीनिवासन की मौजूदगी अदालत की अवमानना को आमंत्रण दे सकती है। इसलिए हितों के टकराव को आधार बनाकर बैठक को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।

बनर्जी ने कहा कि टीएनसीए ने भी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश की राय ली है जिनका कहना है कि श्रीनिवासन बैठक में हिस्सा ले सकते हैं। माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर स्पष्टीकरण के लिए बोर्ड ने बैठक स्थगित करने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि कार्यसमूह की अगली बैठक पर फैसला सुप्रीम कोर्ट करेगा और संभवत: 27 सितंबर को वार्षिक आम बैठक होगी।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App