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बर्खास्तगी पर हड़बड़ी में फैसला नहीं लेगा बीसीसीआइ

भारतीय क्रिकेट बोर्ड 2013 के सट्टेबाजी मसले को लेकर न्यायिक समिति के आदेश के परिप्रेक्ष्य में चेन्नई सुपरकिंग्स (सीएसके) और राजस्थान रॉयल्स को आइपीएल..

Author July 21, 2015 11:20 AM

भारतीय क्रिकेट बोर्ड 2013 के सट्टेबाजी मसले को लेकर न्यायिक समिति के आदेश के परिप्रेक्ष्य में चेन्नई सुपरकिंग्स (सीएसके) और राजस्थान रॉयल्स को आइपीएल से बर्खास्त करने की मांग पर कार्रवाई करने में बेहद सतर्कता बरत रहा है क्योंकि ऐसे किसी भी फैसले से कानूनी निहितार्थ जुड़े हुए हैं। बीसीसीआइ के शीर्ष सूत्रों ने कहा कि सभी कानूनी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है लेकिन वह इन दोनों टीमों को हटाने की दशा में बाद में किसी कानूनी पचड़े में नहीं पड़ना चाहता।

लोढ़ा समिति ने गुरुनाथ मेयप्पन और राज कुंद्रा पर सट्टेबाजी के लिए आजीवन प्रतिबंध लगाने के अलावा सीएसके और रायल्स को उनके टीम मालिकों की हरकतों के कारण दो साल के लिए निलंबित कर दिया था।

पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष शशांक मनोहर सीएसके और रायल्स को आइपीएल से तुरंत बर्खास्त करने के मुखर समर्थक हैं और उनके विश्वसनीय अजय शिर्के ने रविवार को संचालन परिषद की बैठक में ऐसी मांग रखी थी। हालांकि किसी भी अन्य सदस्य ने शिर्के की मांग का समर्थन नहीं किया।

बीसीसीआइ सूत्रों ने कहा कि मनोहर की मांग पर कुछ साल पहले आइपीएल टीम कोच्चि टस्कर्स केरल के खिलाफ लिया गया इसी तरह का फैसला उल्टा पड़ गया था क्योंकि एक पंचाट ने गलत तरीके से बर्खास्तगी के आधार पर भंग केरल फ्रेंचाइजी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उसे 550 करोड़ रुपए हर्जाना देने का आदेश सुना दिया। इसलिए बीसीसीआइ कोच्चि मामले जैसी कोई अन्य स्थिति नहीं चाहता और इस मामले में सतर्कता बरतना चाहता है।

बीसीसीआइ के एक प्रभावशाली पदाधिकारी ने गोपनीयता की शर्त पर कहा कि हमारे जैसे सभी वरिष्ठ सदस्यों को याद है कि कैसे मनोहर जो (2011 में) कोच्चि मामले पर बीसीसीआइ को सलाह दे रहे थे, ने एक शनिवार को बर्खास्तगी का फैसला कर दिया।

कुछ सीनियर सदस्यों का विचार था कि हमें सोमवार तक इंतजार करना चाहिए लेकिन मनोहर चाहते थे कि हमें तुरंत फैसला करके बैंक गारंटी भुना लेनी चाहिए। वे अदालत चले गए और बीसीसीआइ को अब 550 करोड़ रुपए के मुआवजे का भुगतान करना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि हालांकि हम फैसले के खिलाफ अपील कर रहे हैं लेकिन फिर भी कई का मानना है कि कोच्चि को बर्खास्त करने का फैसला जल्दबाजी में लिया गया। अब वही व्यक्ति (मनोहर) चाहता है कि सीएसके को भी जल्द से जल्द बर्खास्त कर दिया जाए। ऐसे में बीसीसीआइ क्रिकेट की परवाह करेगा या फिर अदालत में मुकदमें ही लड़ता रहे। इस बात की क्या गारंटी है कि कोच्चि की तरह सीएसके भी अदालत नहीं जाएगा।

अधिकारी ने कहा कि भले ही इसमें थोड़ी देर हो लेकिन फैसला ठोस होना चाहिए और यह बीसीसीआइ के लिए कानूनी तौर पर बोझ नहीं बनना चाहिए।

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