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बीसीसीआई लोकपाल ने गांगुली और लक्ष्मण से कहा- सलाहकार समिति या आईपीएल में से किसी एक को चुनें

जैन ने कहा, 'एक व्यक्ति एक पद लोढ़ा समिति की सिफारिशों का मुख्य अंश है। सचिन तेंदुलकर के मामले में हितों का टकराव का मामला नहीं बनता क्योंकि वह सीएसी से हट चुके हैं। गांगुली और लक्ष्मण को यह फैसला करना होगा कि भारतीय क्रिकेट को आगे बढ़ाने में वे कैसे अपनी सेवाएं देना चाहते हैं।'

बीसीसीआई की चयन समिति को वेस्टइंडीज दौरे के लिए 19 जुलाई को टीम का ऐलान करना था।

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के लोकपाल डीके जैन ने सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण से बोर्ड या आईपीएल में किसी एक को चुनने के लिए कहा है। उन्होंने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि गांगुली और लक्ष्मण का क्रिकेट सलाहकार समिति (सीएसी) के सदस्य और आईपीएल फ्रेंचाइजी टीमों के मेंटर के रूप में दोहरी भूमिका हितों का टकराव है। लक्ष्मण सनराइजर्स हैदराबाद के मेंटर हैं। गांगुली दिल्ली डेयरकैपिटल्स से जुड़े हुए हैं। वह बंगाल क्रिकेट संघ (कैब) के अध्यक्ष भी हैं।

जैन ने कहा, ‘एक व्यक्ति एक पद लोढ़ा समिति की सिफारिशों का मुख्य अंश है। मैंने केवल इसे सामने लाने की कोशिश की है। सचिन तेंदुलकर के मामले में हितों का टकराव का मामला नहीं बनता क्योंकि वह सीएसी से हट चुके हैं। जहां तक गांगुली और लक्ष्मण का मामला है तो उन्हें यह फैसला करना होगा कि वे भारतीय क्रिकेट को आगे बढ़ाने में कैसे अपनी सेवाएं देना चाहते हैं।’ तेंदुलकर एक अन्य आईपीएल फ्रेंचाइजी मुंबई इंडियंस के मेंटर हैं। इन तीनों दिग्गज क्रिकेटरों पर हितों के टकराव का आरोप लगा था। लक्ष्मण ने सुनवाई के दौरान सीएसी से हटने की पेशकश की थी। जैन ने कहा, ‘मैंने गांगुली और लक्ष्मण पर फैसला सुनाकर कुछ विशेष नहीं किया है।’

 

 

जैन को फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने नियुक्त किया था। उन्होंने रॉबिन उथप्पा और इरफान पठान जैसे सक्रिय खिलाड़ियों के वर्ल्ड कप के दौरान कमेंट्री करने के मामले पर भी अपनी राय रखी। जैन ने कहा कि लोढ़ा समिति की भावना के तहत यह भी हितों का टकराव हो सकता है। उन्होंने कहा, ‘इस आदेश के आधार पर सक्रिय खिलाड़ियों के खिलाफ भी शिकायतें आ सकती हैं। उन्हें अब अपने दिमाग से काम लेना होगा और इस स्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए।’

जैन ने अपने फैसले में कहा, ‘मैं किसी को कमेंट्री करने से नहीं रोक रहा हूं। मैंने केवल यह फैसला किया है कि बीसीसीआई के संविधान के तहत हितों का टकराव क्या है। यह खिलाड़ियों को तय करना है कि यह उन पर लागू होता है या नहीं। मैंने पहली बार इस नियम का अध्ययन किया और उसके आधार पर अपना फैसला दिया। मुझे नहीं पता कि बोर्ड इसे स्वीकार करेगा या नहीं है। अगर कोई इसे चुनौती देना चाहता है तो वह दे सकता है।’

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