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बजरंग पूनिया ने जगाई ओलंपिक पदक की उम्मीद

पांच साल पहले पहलवानों की रैंकिंग बनने का सिलसिला शुरू हुआ, तब से पहली बार किसी भारतीय को शीर्ष स्थान हासिल हुआ है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि बजरंग जिन पहलवानों से इन दो वर्षों में हारे हैं, वे सब रैंकिंग में उनसे काफी पीछे छूट गए हैं।

Author November 15, 2018 7:33 AM
पहलवान बजरंग पूनिया को यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग की रैंकिंग में 65 किलोग्राम वर्ग में दुनिया में शीर्ष रैंकिंग दी गई है।(Image Source: Facebook/@bajrangpunia.official)

मनोज जोशी

साल में 12 अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट जिनमें 11 में पदक और इन 11 में से सात में स्वर्ण पदक। ये कहानी है पहलवान बजरंग पूनिया की जिन्हें यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग की रैंकिंग में 65 किलोग्राम वर्ग में दुनिया में शीर्ष रैंकिंग दी गई है। पांच साल पहले पहलवानों की रैंकिंग बनने का सिलसिला शुरू हुआ, तब से पहली बार किसी भारतीय को शीर्ष स्थान हासिल हुआ है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि बजरंग जिन पहलवानों से इन दो वर्षों में हारे हैं, वे सब रैंकिंग में उनसे काफी पीछे छूट गए हैं। हाल में हंगरी के शहर बुडापेस्ट में हुई वर्ल्ड चैम्पियनशिप में जापान के जिन ताकुतो नाम के पहलवान से वे हारे, वह भी रैंकिंग में तीसरे स्थान पर हैं।

जापान के ही जिन ताकातानी से उनकी कुश्तियां खूब चर्चित रहीं, उन्हें उन्होंने हराया और उनसे हारे भी, वह पहलवान इस सूची में 19वें स्थान पर है। और तो और ओलंपिक चैम्पियन रूस के रामोनोव इस सूची से बाहर हैं जबकि ओलंपिक और वर्ल्ड चैम्पियन व्लादीमिर खिनचेंगाशिवली 17वें स्थान पर हैं। बजरंग ने इस साल एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों का स्वर्ण पदक जीतने के अलावा दो आमंत्रण मुकाबलों के भी स्वर्ण पदक अपने नाम किए जबकि वर्ल्ड चैम्पियनशिप में उन्होंने अमित दहिया के छह साल पहले के रजत पदक के कमाल को दोहराया। वे विश्व चैम्पियनशिप में दो पदक जीतने वाले अकेले भारतीय हैं। इसके अलावा वे अंडर 23 की वर्ल्ड चैम्पियनशिप में भी पिछले साल रजत पदक जीत चुके हैं।

एशियाई चैम्पियनशिप में जरूर बजरंग अपने पिछले खिताब की रक्षा नहीं कर पाए जबकि उन्होंने पिछले साल राष्ट्रमंडल चैम्पियनशिप के अलावा एशियाई इंडोर और एशियाई चैम्पियनशिप के भी स्वर्ण पदक अपने नाम किए। जहां तक महिलाओं का सवाल है, भारत की पांच महिलाएं वर्ल्ड रैंकिंग में शीर्ष दस में बनी हुई हैं। पूजा ढांडा छठे, सरिता सातवें, किरण और नवजोत कौर नौवें तथा रितु फोगट दसवें स्थान पर हैं। पूजा पिछले दिनों विश्व चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीतने में सफल रही थीं।

इस रैंकिंग का पैमाना ओलंपिक और वर्ल्ड चैम्पियनशिप, महाद्वीपीय टूर्नामेंट और यूडब्ल्यूडब्ल्यू की चुनिंदा रैंकिंग प्रतियोगिताएं हैं। इनमें पहली दो प्रतियोगिताओं में स्वर्ण जीतने पर 25 अंक, रजत जीतने पर 20 अंक और कांस्य जीतने पर 15 अंक देने का प्रावधान है। महाद्वीपीय टूर्नामेंट का मतलब एशियाई खेल और एशियाई चैम्पियनशिप है जहां पहले तीन पदक जीतने पर क्रमश: 12, 10 और 8 अंक दिए जाते हैं, वहीं रैंकिंग प्रतियोगिताओं में 8, 6 और 4 अंक दिए जाने का प्रावधान है।

गौरतलब यह है कि इन सब प्रतियोगिताओं में पहले दस स्थान पर रहने वालों को उनके प्रदर्शन के आधार पर अंक दिए जाते हैं। कुछ भारतीय महिला पहलवानों को इसका लाभ हुआ है। सुनने में अजीब लगता है कि 76 किलो वजन में भारत की किरण नौवें स्थान पर हैं जबकि पिछले साल वर्ल्ड चैम्पियनशिप में रजत पदक जीतने वालीं बेलारूस की वैसिलिसा मारजाल्यूक उनसे एक स्थान पीछे हैं। इसी तरह सरिता को 59 किलो में आने का लाभ हुआ है और वे सातवें स्थान पर हैं। सच यही है कि इन सभी भारतीय पहलवानों को लगातार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने का लाभ मिला है।

इसके लिए भारतीय कुश्ती संघ अपनी पीठ थपथपा सकती है क्योंकि उसने इन दो वर्षों में पहलवानों को अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग टूर्नामेंटों में भाग लेने के खूब अवसर दिए हैं।
साक्षी मलिक का टॉप 20 की सूची से बाहर होना भी चौंकाता है। उन्होंने इस साल मेदवेद कप में रजत पदक जीता था, जो यूडब्ल्यूडब्ल्यू का अधिकृत रैंकिंग टूर्नामेंट नहीं था। एशियाई खेलों में भी वे दो कुश्तियां तकनीकी दक्षता के आधार पर जीतीं लेकिन पदक न जीतने से उन्हें कम अंक हासिल हुए। वहीं नवजोत कौर को एशियाई चैम्पियनशिप में पहली भारतीय महिला होने का गौरव हासिल हुआ जिसका उन्हें रैंकिंग में भी लाभ मिला।

विश्व कुश्ती रैंकिंग का पैमाना

स्वर्ण  रजत  कांस्य

ओलंपिक                        25     20     15

विश्व चैम्पियनशिप            25      20    15

महाद्वीपीय टूर्नामेंट           12      10    08

रैंकिंग टूर्नामेंट                 08     06    04

नोट – इन प्रतियोगिताओं के हर वजन में पहले दस स्थान पर रहने वालों को अंक दिए जाते हैं।

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