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सट्टेबाजों ने डुबोया भारतीय क्रिकेट का सितारा

दुनिया के किसी कोने में क्रिकेट में सट्टेबाजी की बात होती है तो कलाई के उस जादूगर का नाम जरूर याद आता है जिसके करिअर का रंग शबाब पर चढ़ने से पहले ही उतर गया।

मोहम्मद अजहरूद्दीन। फाइल फोटो।

दुनिया के किसी कोने में क्रिकेट में सट्टेबाजी की बात होती है तो कलाई के उस जादूगर का नाम जरूर याद आता है जिसके करिअर का रंग शबाब पर चढ़ने से पहले ही उतर गया। खड़े कॉलर, सफेद हेलमेट और गले के बाहर लटकती ताबीज के साथ बल्लेबाजी करते इस खिलाड़ी की अदा सबसे जुदा थी।

आॅफ स्टंप की जिस गेंद को अमूमन खिलाड़ी कवर पर शॉट खेलते उसी को यह लंबा छरहरा खिलाड़ी फ्लिक करके मिड आॅन या मिड विकेट पर खेल देता। लोग तो यह भी कहते कि वे अपनी कलाई में मक्खन लगा कर उतरते जिससे उनकी कलाई किसी भी दिशा में आसानी से घूम जाती थी। लेकिन 21वीं सदी की शुरुआत के साथ एक ऐसी घटना घटी जिसने क्रिकेट को कलंकित किया और इस खिलाड़ी को अर्श से फर्श पर ला दिया। जी हां, हम बात कर रहे हैं अपने जमाने के शानदार बल्लेबाज मोहम्मद अजहरूद्दीन की। क्रिकेट में फिक्सिंग की सबसे बड़ी और झटका देने वाली घटना में अजहर का नाम आया और उन्हें मैदान से दूर होना पड़ा।

अपने पहले तीन टैस्ट मैचों में तीन शतक के साथ अजहरूद्दीन क्रिकेट के परिदृष्य में सितारा बन कर उभरे थे। उन्होंने 1985 में इंग्लैंड के खिलाफ टैस्ट में पदार्पण किया था और महज पांच साल बाद यानी 1990 में उन्हें टीम की कप्तानी सौंप दी गई। तीन विश्व कप में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले और एक दौर में टीम को 90 जीत दिलाने वाले, वह भारत के सबसे सफल कप्तानों में शूमार थे। लेकिन पांच दिसंबर 2000 की तारीख ने अजहर के साथ क्रिकेट जगत को हिला कर रख दिया। अपनी काबिलियत से महानतम खिलाड़ियों की फेहरिस्त में शामिल होने की कतार में खड़े इस खिलाड़ी को मैच फिक्सिंग का दोषी पाया गया। उनके साथ दक्षिण अफ्रीकी खिलाड़ी हैंसी क्रोन्ये और कुछ अन्य भारतीय खिलाड़ियों का नाम इस फिक्सिंग कांड में आया। हालांकि सबसे ज्यादा चर्चा क्रोन्ये और अजहर की ही रही।

इससे पहले सात अप्रैल 2000 को दिल्ली पुलिस ने क्रोन्ये पर भारत के खिलाफ एकदिवसीय मुकाबले में फिक्सिंग का आरोप लगाया। साथ ही दक्षिण अफ्रीकी कप्तान और सट्टेबाज संजय चावला के बीच बातचीत का टेप भी जारी किया। इसमें मैच फिक्सिंग को अंतिम रूप देने संबंधिक बातें थीं। हालांकि क्रोन्ये ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था। इस मामले में दक्षिण अफ्रीका के ही हर्शल गिब्स, पीटर स्ट्राइडम और निकी बॉय का नाम आया।

इसी दौरान 15 जून 2000 को क्रोन्ये ने एक बयान में कहा कि अजहर ने उन्हें एक टैस्ट मैच के दौरान सट्टेबाज से मिलवाया। अजहर ने इन आरोपों को बकवास करार दिया था। इधर, क्रोन्ये ने अफ्रीकी क्रिकेट बोर्ड के सामने फिक्सिंग की बात कबूल ली। भारत के खिलाफ एकदिवसीय शृंखला के दौरान अपनी टीम के बारे में जानकारी साझा करने के लिए दस से पंद्रह हजार डॉलर लेने की बात कही। इसके बाद उन्हें कप्तान के पद से बर्खास्त किया गया था और 11 अक्तूबर 2000 को जीवनभर के लिए क्रिकेट से प्रतिबंधित कर दिया गया था।

इस घटना के बाद भारतीय क्रिकेट में भी फिक्सिंग को लेकर हलचल शुरू हो गई थी। जुलाई 2000 में आयकर विभाग ने भारतीय टीम के शीर्ष चार क्रिकेटरों के घरों पर छापा मारा। साथ ही तब के भारतीय कोच के घर भी छापेमारी की गई। 31 अक्तूबर 2000 में सीबीआइ की एक रिपोर्ट में कहा गया कि अजहर ने मैच फिक्सिंग में शामिल होने की बात स्वीकार कर ली हैै।

अजहर ने अपने साथियों अजय जडेजा और नयन मोंगिया से भी मदद लेने की भी बात कबूली थी। बीसीसीआइ के एंटी करप्शन कमिश्नर के माधवन ने अजहर को मामले में दोषी पाया। इसके साथ ही अजय जडेजा, मनोज प्रभाकर, अजय शर्मा के साथ टीम के फिजियो को सट्टेबाजी में गठजोड़ का हिस्सा पाया गया। पांच दिसंबर 2000, अजय शर्मा के साथ मिलकर अजहर को मैच फिक्सिंग में उनकी भूमिका पर जीवनभर के लिए क्रिकेट से बैन कर दिया गया। जडेजा को पांच साल के लिए प्रतिबंधित किया गया।

हालांकि, 2003 में जडेजा के प्रतिबंध पर दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला पलट गया और घटना में शामिल होने के पुख्ता सबूत नहीं होने के कारण उन्हें मई 2003 में घरेलू क्रिकेट में खेलने की अनुमति मिल गई। छह नवंबर 2012 को आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट की ओर से अजहर पर लगाया गया प्रतिबंध भी हटा लिया गया। लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। चमकता हुआ सूर्य अब अस्त हो चुका था।

फिक्सिंग ने किया बर्बाद

क्रिकेट में जैसा आगाज अजहर का हुआ वैसा पहले न किसी बल्लेबाज का हो पाया था और न बाद में किसी का हुआ। दिसंबर 1984 में अंग्रेज टीम भारत के दौरे पर थी। तब अजहर स्टेट बैंक में क्लर्क की नौकरी कर रहे थे और अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। इस मुकाबले में उन्हें बल्लेबाजी का मौका मिली। पहले तीन मैच में तीन शतक लगा कर उन्होंने बवंडर बांध दिया। सभी इस प्रदर्शन से अचंभित थे।

अजहर की नफासत भरी बल्लेबाजी और उनकी कलाइयों की तुलना गुंडप्पा विश्वनाथ, जहीर अब्बास और ग्रेग चैपल जैसे दिग्गजों से होने लगी। उन्हें देश के साथ विदेश में भी ख्याति मिलने लगी। काफी तेजी से आगे बढ़ रहे इस खिलाड़ी को फिक्सिंग कांड का ऐसा झटका लगा कि सब कुछ बदल गया। जो प्रशंसक उनकी तस्वीरों को अपने घर में सजाते वही उसे सड़क पर जलाते भी नजर आए।

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