चैंपियन महिला एथलीट दुतीचंद ने कबूले समलैंगिक रिश्ते, कहा- मुझे किसी का सहारा भी चाहिए

दुती चंद ने कहा कि उन्होंने एलजीबीटी समुदाय के अधिकारों के लिए आवाज उठाने के लिए उस वक्त हिम्मत जुटाई, जब पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आईपीसी के सेक्शन 377 को अपराध के दायरे से बाहर कर दिया।

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एथलीट दुती चंद। (express archive)

भारत की सबसे तेज महिला धावक दुती चंद ने स्वीकार किया है कि उनके बीते कुछ सालों से अपने गृहनगर की एक लड़की से रिश्ते हैं। 100 मीटर का रिकॉर्ड दुती चंद के ही नाम है। वह 2018 एशियन गेम्स में दो सिल्वर मेडल भी जीत चुकी हैं। वह संभवत: ऐसी पहली भारतीय स्पोर्ट्स स्टार हैं, जिन्होंने समलैंगिक रिश्ते होने की बात कबूली है। 23 साल की दुती चंद ने अपने पार्टनर की पहचान सार्वजनिक नहीं की है। उनके मुताबिक, वह नहीं चाहतीं कि उनकी पार्टनर ‘फिजूल में लोगों के आकर्षण’ का केंद्र बने।

दुती चंद फिलहाल विश्वस्तरीय प्रतियोगिताओं और टोक्यो ओलंपिक में क्वालिफाई करने के लिए जमकर पसीना बहा रही हैं। द संडे एक्सप्रेस से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘मुझे कोई ऐसा मिल गया है जोकि मुझे जान से प्यारा है। मुझे लगता है कि हर किसी को इस बात की आजादी होनी चाहिए कि वह किसके साथ रहना चाहता है। मैंने हमेशा उन लोगों के अधिकारों की पैरवी की है जो समलैंगिक रिश्तों में रहना चाहते हैं। यह किसी व्यक्ति विशेष की अपनी इच्छा है। फिलहाल मेरा फोकस वर्ल्ड चैंपियनशिपों और ओलंपिक खेलों पर है, लेकिन भविष्य में मैं उसके साथ सेटल होना चाहूंगीं। ‘ दुती चंद ने कहा कि उन्होंने एलजीबीटी समुदाय के अधिकारों के लिए आवाज उठाने के लिए उस वक्त हिम्मत जुटाई, जब पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आईपीसी के सेक्शन 377 को अपराध के दायरे से बाहर कर दिया।

बता दें कि भारत में भले ही एलजीबीटी शादियों को मान्यता न दी गई हो, लेकिन समान लिंग के लोगों के साथ रहने के खिलाफ कोई कानून नहीं है। पिछले साल सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने 158 साल पुराने ब्रिटिशकालीन कानून को दरकिनार करते हुए समलैंगिक संबंधों को अपराध के दायरे से बाहर कर दिया था। दुती ने कहा कि उनका सपना था कि कोई ऐसा मिले जो उसके पूरे जीवन का साथी बने। उन्होंने कहा, ‘मैं किसी ऐसे के साथ रहना चाहती थी, जो मुझे बतौर खिलाड़ी प्रेरित करे। मैं बीते 10 साल से धावक हूं और अगले 5 से 7 साल तक दौड़ती रहूंगी। मैं प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने पूरी दुनिया घूमती हूं। यह आसान नहीं है। मुझे किसी का सहारा भी चाहिए।’

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