नीरज चोपड़ा, पीवी सिंधु, तेजस्विन शंकर और मुरली श्रीशंकर जैसे भारतीय खिलाड़ियों के साथ काम कर चुके वेन लोम्बार्ड आज देश के शीर्ष एथलीटों के भरोसेमंद फिटनेस और परफॉर्मेंस विशेषज्ञों में शामिल हैं। चोट से वापसी हो या शरीर को बड़े टूर्नामेंट के लिए तैयार करना हो, वेन लोम्बार्ड का काम सिर्फ एक्सरसाइज और आंकड़ों तक सीमित नहीं है। वह खिलाड़ियों की चिंताओं और मानसिक स्थिति को भी समझने की कोशिश करते हैं। दिलचस्प यह है कि भारतीय खेलों में उनकी यह लंबी पारी किसी बड़े प्लान के साथ नहीं, बल्कि फेसबुक पर आये एक संदेश से शुरू हुई थी।
2026 राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान तेजस्विन शंकर के घुटने में अचानक पुरानी समस्या उभर आई। वह हाई जंप स्पर्धा से हट गए। उन्हें डर था कि घुटने के पटेलर टेंडन की पुरानी परेशानी कहीं गंभीर रूप तो नहीं ले चुकी है। उस रात उनके मन में कई तरह के सवाल चल रहे थे। अगले दिन उन्होंने वेन लोम्बार्ड से संपर्क किया। तेजस्विन शंकर ने बाद में उन्हीं खेलों में डेकाथलॉन पूरा किया और कांस्य पदक जीता। वह राष्ट्रमंडल खेलों में डेकाथलॉन में पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने।
इस पूरे घटनाक्रम ने भारतीय खेलों में वेन लोम्बार्ड की खास भूमिका को सामने रखा। वेन लोम्बार्ड सिर्फ स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच नहीं हैं। न ही उनका काम केवल खिलाड़ियों के शरीर से जुड़े आंकड़ों और एक्सरसाइज तक सीमित है। जब किसी खिलाड़ी को अपने शरीर को लेकर डर या चिंता होती है तो वेन लोम्बार्ड उन लोगों में शामिल होते हैं जिनसे वह बात करना चाहता है।
करीब 30 शीर्ष भारतीय खिलाड़ियों के साथ कर रहे काम
वेन लोम्बार्ड के मुताबिक, वह अभी करीब 30 शीर्ष भारतीय खिलाड़ी ट्रेनिंग करते हैं या किसी न किसी रूप में उनके संपर्क में हैं। इनमें भारतीय खेलों के कई बड़े नाम शामिल हैं। पीवी सिंधु के साथ वह कई ओलंपिक चक्रों से काम कर चुके हैं। चोटों से जूझने के एक और दौर के बाद सिंधु ने पिछले साल उन्हें अपनी टीम में फिर शामिल किया।
मुरली श्रीशंकर भी मानते हैं कि वेन लोम्बार्ड के तैयार किए कार्यक्रमों ने उनके करियर को दोबारा पटरी पर लाने में बड़ी भूमिका निभाई। घुटने की गंभीर चोट के बाद वापसी के दौरान वेन लोम्बार्ड उनके साथ थे। महिला हॉकी टीम के मुख्य कोच के रूप में इस साल जब सोजर्ड मारिन की वापसी हुई तो उनकी शर्तों में लोम्बार्ड को टीम का हिस्सा बनाना भी शामिल था। मतलब वेन लोम्बार्ड के साथ खिलाड़ियों का रिश्ता केवल ट्रेनिंग तक सीमित नहीं है। यह भरोसे का रिश्ता है।
भारत आने की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं
दिलचस्प यह है कि वेन लोम्बार्ड भारत किसी बड़े विजन या योजना के साथ नहीं आए थे। उनकी भारत यात्रा शुरू हुई थी फेसबुक के एक मैसेज से। भारत आने से पहले वेन लोम्बार्ड दक्षिण अफ्रीका में क्रिकेट खेलते थे। उन्होंने कुछ प्रथम श्रेणी मैच भी खेले, लेकिन उन्हें पता था कि उनका क्रिकेट करियर बहुत आगे नहीं जाने वाला। वह कहते हैं, ‘‘मैं अगले स्तर तक पहुंचने के लिए पर्याप्त अच्छा नहीं था।’’
वेन लोम्बार्ड ने इसके बाद डरबन की एक अकादमी में स्पोर्ट्स मैनेजमेंट की पढ़ाई शुरू की। धीरे-धीरे उनकी रुचि स्पोर्ट्स साइंस में बढ़ने लगी। तीन साल की अंडरग्रेजुएट पढ़ाई के बाद उन्होंने बायोकाइनेटिक्स में ऑनर्स किया। इसमें चोट से उबरने, खिलाड़ियों की वापसी और शरीर की कार्यप्रणाली जैसे विषय शामिल थे।
इसके बाद दक्षिण अफ्रीका के स्पोर्ट्स साइंस इंस्टीट्यूट से जुड़े हाई परफॉर्मेंस सेंटर में इंटर्नशिप ने उनके करियर की दिशा तय की। वेन लोम्बार्ड कहते हैं कि वहीं से उनकी असली यात्रा शुरू हुई। वेन लोम्बार्ड ने पीएचडी पूरी की। चीन गए और फिर दक्षिण अफ्रीका लौटे। इसके बाद जब वह अगले अवसर की तलाश में थे, तभी फेसबुक पर उन्हें एक संदेश मिला।
यह संदेश जेएसडब्ल्यू स्पोर्ट के तत्कालीन साइंस प्रमुख डोनोवन पिल्ले का था। उन्होंने पूछा था कि क्या वेन लोम्बार्ड भारत आकर इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट में काम करने में दिलचस्पी रखते हैं। मजेदार बात यह थी कि वेन लोम्बार्ड आमतौर पर फेसबुक के मैसेज चेक ही नहीं करते थे, लेकिन इस बार उन्होंने संदेश देख लिया और यही एक संदेश उनकी जिंदगी बदलने वाला साबित हुआ।
2016 में भारत आए, सामने थे तीन बड़े नाम
वेन लोम्बार्ड बताते हैं, ‘‘दस साल बाद भी मैं यहीं हूं।’’ साल 2016 में वेन लोम्बार्ड भारत पहुंचे। यहां शुरुआती दौर में ही उनका सामना तीन ऐसे युवा खिलाड़ियों से हुआ, जो आगे चलकर भारतीय खेलों के बड़े सितारे बनने वाले थे। नीरज चोपड़ा उस समय विश्व अंडर-20 भाला फेंक रिकॉर्ड तोड़ चुके थे और कोहनी की समस्या से जूझ रहे थे। तेजस्विन शंकर हाई जंप में अपनी पहचान बनाना शुरू कर रहे थे। विनेश फोगाट रियो ओलंपिक की अपनी चोट के बाद दोबारा वापसी की कोशिश कर रही थीं।
विनेश के साथ वेन लोम्बार्ड ने दक्षिण अफ्रीका की फिजियोथेरेपिस्ट संध्या सिलाल के साथ काम किया। यह शुरुआत आसान नहीं थी। विनेश गंभीर चोट से गुजर चुकी थीं। ऐसे में किसी नए व्यक्ति की बात पर तुरंत भरोसा करना उनके लिए स्वाभाविक नहीं था। वेन लोम्बार्ड भी मानते हैं कि शुरुआत में उन्हें विनेश फोगाट का भरोसा जीतने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी।
हालांकि, जैसे-जैसे काम वक्त गुजरा, नतीजे सामने आने लगे। विनेश फोगाट ने वेन लोम्बार्ड के कार्यक्रम पर भरोसा करना शुरू किया और फिर दोनों के बीच काम करने का रिश्ता मजबूत होता गया। यही भरोसा आगे वेन लोम्बार्ड के काम की सबसे बड़ी पहचान बन गया।
सिर्फ आंकड़ों और मशीनों से नहीं चलता खेल
आधुनिक खेलों में खिलाड़ियों की फिटनेस पर काम करने के लिए कई तरह की तकनीक और आंकड़ों का इस्तेमाल होता है। फोर्स प्लेट, ब्लड प्रोफाइल, ट्रेनिंग लोड, बायोमैकेनिक्स और मूवमेंट से जुड़े आंकड़े अब हाई परफॉर्मेंस खेल का हिस्सा हैं। वेन लोम्बार्ड भी इनका इस्तेमाल करते हैं, लेकिन वह मानते हैं कि किसी खिलाड़ी को सिर्फ आंकड़ों के आधार पर नहीं समझा जा सकता।
वेन लोम्बार्ड के मुताबिक, खिलाड़ी भी आखिर इंसान ही हैं। वह कहते हैं कि उनकी भावनाओं को समझना जरूरी है। किसी खिलाड़ी को केवल ऐसे व्यक्ति की तरह नहीं देखा जा सकता जिसे तैयार करके मैदान पर प्रदर्शन के लिए भेज दिया जाए। वेन लोम्बार्ड के मुताबिक, किसी को अपने काम में अच्छा होना जरूरी है, लेकिन अगर व्यवहार ऐसा हो कि खिलाड़ी ही आपसे बात न करना चाहे तो आपकी विशेषज्ञता का कोई फायदा नहीं।
हर खिलाड़ी के लिए अलग कार्यक्रम
वेन लोम्बार्ड के काम करने का शायद यही सबसे अहम हिस्सा है। वह शरीर को समझते हैं, आंकड़ों को पढ़ते हैं, ट्रेनिंग कार्यक्रम तैयार करते हैं और फिर खिलाड़ी की बात सुनते हैं। हालांकि, वेन लोम्बार्ड का कोई एक तय कार्यक्रम नहीं है जिसे हर खिलाड़ी पर लागू किया जा सके।
हॉकी में खिलाड़ियों को लगातार तेज गति से दौड़ना पड़ता है। बैडमिंटन में अचानक तेजी से आगे बढ़ने, रुकने और दिशा बदलने की क्षमता जरूरी होती है। वहीं तेजस्विन शंकर जैसे डेकाथलॉन के खिलाड़ी के लिए चुनौती बिल्कुल अलग है। उन्हें एक ही शरीर से 10 अलग-अलग स्पर्धाओं के लिए तैयार होना होता है।
वेन लोम्बार्ड बताते हैं कि तेजस्विन को मजबूत ऊपरी शरीर की जरूरत है। उन्हें फिट रहना होता है, क्योंकि उन्हें 1500 मीटर दौड़ना है। साथ ही उन्हें स्प्रिंट भी करना होता है। मतलब एक ही खिलाड़ी के लिए ताकत, गति, सहनशक्ति और तकनीकी जरूरतों के बीच संतुलन बनाना पड़ता है।
पीवी सिंधु के साथ काम में आंकड़ों की बड़ी भूमिका
पीवी सिंधु के साथ वेन लोम्बार्ड का काम भी समय के साथ बदलता गया है। अब इसमें आंकड़ों और तकनीक की भूमिका पहले से ज्यादा है। उनकी मूवमेंट, जंपिंग और ट्रेनिंग लोड जैसी चीजों को लगातार मापा और समझा जाता है, लेकिन इस प्रक्रिया में पीवी सिंधु की अपनी भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। पीवी सिंधु सवाल पूछती हैं, अलग-अलग चीजों को आजमाती हैं और अगर कोई तरीका काम नहीं करता तो अपनी बात रखती हैं।
वेन लोम्बार्ड की कार्यशैली की यह खासियत है। वह कार्यक्रम तैयार करते हैं, आंकड़े जुटाते हैं और विज्ञान का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अंतिम प्रक्रिया में खिलाड़ी की आवाज को भी उतनी ही अहमियत देते हैं।
भारतीय खिलाड़ियों के लिए एक बड़ी चुनौती
भारत में लंबे समय तक खेल प्रतिभा और हाई परफॉर्मेंस ट्रेनिंग के बीच एक बड़ी दूरी रही है। वेन लोम्बार्ड के अनुभव में भारतीय खिलाड़ियों की शुरुआती जिंदगी भी उनकी फिटनेस और चोटों पर असर डालती है। वेन लोम्बार्ड के मुताबिक, कई खिलाड़ी ऐसे परिवारों से आते हैं जहां बचपन में पोषण पर्याप्त नहीं रहा।
कम उम्र में पोषण की कमी आगे चलकर खिलाड़ियों के शरीर पर असर डाल सकती है। वेन लोम्बार्ड मानते हैं कि अगर बचपन से ही पोषण पर ध्यान दिया जाए तो राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने वाले खिलाड़ियों की तैयारी बेहतर हो सकती है। वेन लोम्बार्ड के अनुसार, इससे ओवरयूज इंजरी यानी शरीर के किसी हिस्से पर लगातार पड़ने वाले दबाव से होने वाली चोटों को भी कम किया जा सकता है।
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