साक्षी राज। एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय टेबल टेनिस टीम में जगह नहीं मिलने के बाद मनिका बत्रा ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स की गोल्ड मेडलिस्ट और दो बार की ओलंपियन मनिका बत्रा का कहना है कि उनका उद्देश्य टीम में वापसी नहीं, बल्कि चयन से जुड़े सवालों के जवाब पाना है। मनिका बत्रा ने कहा कि वह वह किसी तरह की विशेष छूट नहीं मांग रही हैं।
मनिका बत्रा ने टेबल टेनिस फेडरेशन ऑफ इंडिया (TTFI) की चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाया है। मनिका बत्रा ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो वह कानूनी रास्ता अपनाने पर विचार करेंगी। मनिका बत्रा ने फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और खेल मंत्री मनसुख मांडविया से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने कहा कि वह चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता, निरंतरता और जवाबदेही की हकदार हैं।
मनिका बत्रा को एशियन गेम्स के लिए टीम में जगह नहीं मिली है। टीटीएफआई के तय चयन मानकों को पूरा नहीं करने के कारण उन्हें टीम में शामिल नहीं किया गया। इन मानकों में राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी भी शामिल थी। मनिका बत्रा ने अपने ताजा बयान में कहा, ‘‘पिछले कुछ दिनों में मैंने कई लोगों को यह कहते सुना कि मैं एशियन गेम्स टीम में जगह मांग रही हूं या विशेष रियायत की मांग कर रही हूं।’’
मनिका बत्रा ने कहा, ‘‘मैं इसे साफ करना चाहती हूं। मैं चयन की मांग नहीं कर रही हूं। मैं किसी से फैसला बदलने के लिए नहीं कह रही हूं। मैं सिर्फ जवाब मांग रही हूं। मुझे पूरी उम्मीद है कि इस फैसले के आधार पर स्पष्ट और तथ्यात्मक जानकारी दी जाएगी, लेकिन अगर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है तो मेरे पास अपनी कानूनी टीम के माध्यम से कानूनी रास्ते सहित उपलब्ध सभी विकल्पों पर विचार करने के अलावा विकल्प नहीं बचेगा।’’
TTFI ने टीम में नहीं चुनने की स्पष्ट वजह नहीं बताई: मनिका बत्रा
गोल्डकोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स की गोल्ड मेडलिस्ट और दो बार की ओलंपियन मनिका बत्रा ने कहा कि टीटीएफआई ने उन्हें टीम में नहीं चुने जाने की स्पष्ट वजह नहीं बताई है। मनिका बत्रा ने कहा, ‘‘मैं इस समय विश्व रैंकिंग में 51वें स्थान पर हूं। टेबल टेनिस की रैंकिंग हर सप्ताह अपडेट होती है और यह लगातार बदलने वाली प्रणाली पर आधारित होती है। ऐसे में सवाल उठता है कि खिलाड़ियों के मूल्यांकन के लिए कौन-सी समय सीमा को आधार बनाया गया? क्या यह पिछले 12 महीने, छह महीने, दो महीने या किसी एक सप्ताह की रैंकिंग पर आधारित था?’’
मनिका बत्रा ने कहा, ‘‘अगर कोई खिलाड़ी लगातार टॉप-50 के आसपास रहा है और एक-दो सप्ताह में 50 से 51 नंबर पर पहुंच जाता है तो क्या वह अचानक अयोग्य हो जाता है? इन सवालों के स्पष्ट जवाब मिलने चाहिए।’’ राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं लेने को लेकर हो रही आलोचना पर मनिका बत्रा ने कहा कि TTFI को उनके व्यस्त अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम को भी ध्यान में रखना चाहिए था।
मनिका बत्रा ने कहा, ‘‘मुझे राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का पूरा सम्मान है और मुझे हमेशा इनमें खेलने पर गर्व रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार खेलने वाले खिलाड़ियों को व्यस्त वैश्विक कार्यक्रम, रिकवरी, यात्रा, वीजा प्रक्रिया और बड़े टूर्नामेंट की तैयारी के बीच तालमेल बैठाना पड़ता है।’’
भविष्य में हर स्तर पर योगदान देने की कोशिश रहेगी: मनिका बत्रा
मनिका बत्रा ने कहा, ‘‘घरेलू प्रतियोगिताओं में भागीदारी को अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं से अलग करके नहीं देखा जा सकता। हालांकि, भविष्य में मैं राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने को लेकर और अधिक ध्यान रखूंगी और भारतीय टेबल टेनिस में हर स्तर पर योगदान देने की पूरी कोशिश करूंगी।’’
मौजूदा सीजन में अपने प्रदर्शन का जिक्र करते हुए मनिका बत्रा ने कहा कि चयन समिति को उनके हालिया प्रदर्शन को भी ध्यान में रखना चाहिए था। मनिका बत्रा ने कहा कि वर्ल्ड टेबल टेनिस सर्किट में शीर्ष एशियाई खिलाड़ियों और मजबूत चीनी खिलाड़ियों के खिलाफ उनकी जीत को चयन प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए था। खेल मंत्रालय भी एशियन गेम्स के लिए खिलाड़ियों और टीमों के चयन में मौजूदा फॉर्म को ध्यान में रखने की बात कहता है।
मनिका बत्रा ने कहा कि सिर्फ उनके चयन को लेकर ही नहीं, बल्कि कुछ अन्य खिलाड़ियों को बाहर किये जाने को लेकर भी सवाल उठते हैं। मनिका बत्रा ने कहा, ‘‘अयहिका मुखर्जी का उदाहरण लें। वह पिछले एशियन गेम्स में भारत की ऐतिहासिक महिला डबल्स पदक जीतने वाली टीम का हिस्सा थीं। जब इस तरह की उपलब्धियां रखने वाले खिलाड़ियों को बाहर किया जाता है तो स्वाभाविक रूप से चयन के मानकों और मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं।’’
मनिका बत्रा ने कहा कि उन्हें बताया गया है कि अंतिम चयन वोटिंग प्रक्रिया के जरिए हुआ। उन्होंने कहा, ‘‘अगर ऐसा है तो मेरा मानना है कि खिलाड़ियों को यह जानने का अधिकार है कि ये फैसले किसने लिए और उनका आधार क्या था। फैसलों के पीछे क्या कारण थे? क्या उन्हें दर्ज किया गया था? क्या खिलाड़ियों को इसकी जानकारी दी गई थी? क्या हितों के टकराव की जानकारी दी गई थी?’’
चयन समिति की योग्यता पर भी उठाये सवाल
मनिका बत्रा ने TTFI की चयन समिति की योग्यता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारतीय टेबल टेनिस फेडरेशन ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर चयन समिति की संरचना की जानकारी नहीं दी है। मनिका ने कहा, ‘‘खिलाड़ियों को यह जानने का हक है कि फैसले कौन ले रहा है। चयन प्रक्रिया में उनकी योग्यता या अनुभव क्या है। चयन समिति के कितने सदस्य भारत का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व कर चुके हैं?’’
मनिका बत्रा ने कहा, ‘‘कितने सदस्यों ने ओलंपिक, कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स या टेबल टेनिस के उच्चतम स्तर पर हिस्सा लिया है? अगर मेरे खिलाफ वोट हुआ तो उसके पीछे क्या कारण थे? क्या वे फैसले प्रदर्शन के दर्ज मानकों पर आधारित थे या व्यक्तिगत राय पर?’’
TTFI पर पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए मनिका बत्रा ने कहा कि उनकी चिंता को किसी एक चयन फैसले पर भावनात्मक प्रतिक्रिया के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। मनिका बत्रा ने कहा, ‘‘इसी वजह से मैंने प्रधानमंत्री और खेल मंत्री से इस मामले को देखने का अनुरोध किया है, इसलिए नहीं कि मुझे टीम में जगह चाहिए, इसलिए भी नहीं कि मुझे कोई विशेष छूट चाहिए, बल्कि इसलिए क्योंकि मेरा मानना है कि हर खिलाड़ी चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता, निरंतरता और जवाबदेही का हकदार है।’’ मनिका ने दोहराया, ‘‘मैं सवाल पूछ रही हूं, विशेष विचार की मांग नहीं कर रही हूं।’’
मनिका को एशियाड की टीम में नहीं मिली जगह, वर्ल्ड रैंकिंग में 45वें नंबर की खिलाड़ी को मिल गई एंट्री
भारत की स्टार टेबल टेनिस खिलाड़ी मनिका बत्रा को एशियाई खेल 2026 के स्क्वाड में जगह नहीं मिली है। उनकी जगह वर्ल्ड रैंकिंग 45वें पर काबिज श्रीजा अकुला महिला टीम का नेतृत्व करेंगी। (पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें)
चौथे नंबर पर रहे नीरज चोपड़ा, कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए किया क्वालिफाई; श्रीलंका के खिलाड़ी ने जीता गोल्ड मेडल
नीरज चोपड़ा ने लंबे वक्त के बाद मैदान पर वापसी की, लेकिन उनकी वापसी ज्यादा सफल नहीं हो पाई। उन्होंने 2026 दोहा डायमंड लीग में चौथा स्थान हासिल किया और उनका बेस्ट थ्रो इस इवेंट में 85.69 मीटर का रहा। इस इवेंट में कुछ ही बड़े थ्रो देखने को मिले। सबसे बड़ा थ्रो श्रीलंका के उभरते हुए जैवलिन सुपरस्टार और मौजूदा वर्ल्ड लीड रुमेश थरंगा पथिराज ने किया। रुमेश ने चौथे राउंड में 88.68 मीटर का बेस्ट थ्रो फेंककर दोहा लेग जीता और गोल्ड मेडल हासिल किया। (पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें)
