प्रीतीश राज। एक हाथ में राष्ट्रीय रिकॉर्ड की उपलब्धि थी और दूसरे हाथ में उस पिता की तस्वीर, जिसका सपना अब बेटी ने पूरा कर दिया था। कर्नाटक की जी सिंधुश्री ने गुरुवार 25 जून 2026 को महिला पोल वॉल्ट में राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया, लेकिन यह पल उनके लिए सिर्फ जीत का नहीं, बल्कि दिवंगत पिता आर गणेश के अधूरे सपने को पूरा करने का भी था।
आर गणेश बेटी को अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करते देखना चाहते थे, लेकिन दुर्भाग्यवश तीन साल पहले उनका निधन हो गया। सिंधुश्री के पिता बिजली मिस्त्री थे। खास बात यह है कि सिंधुश्री ने जिस पोल के सहारे इतिहास रचा, वह उनका अपना नहीं था, लेकिन हौसला और पिता का सपना पूरा करने की जिद ने उन्हें नई ऊंचाई तक पहुंचा दिया।
भुवनेश्वर में आयोजित राष्ट्रीय अंतर-राज्यीय चैंपियनशिप में जी सिंधुश्री ने महिला पोल वॉल्ट में 4.25 मीटर की रिकॉर्ड छलांग के साथ एशियन गेम्स के लिए भी क्वालिफाई कर लिया। उन्होंने बारानिका इलानगोवन के मार्च 2026 में बनाए गए 4.23 मीटर के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। सिंधुश्री को जब फोटो के लिए पोज देने को कहा गया तो वह भावुक हो गईं। वह अपने बैग की ओर बढ़ीं और दिवंगत पिता की पासपोर्ट साइज तस्वीर निकाल ली।
सिंधुश्री ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ‘‘मुझे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करते देखना मेरे पिता का सपना था, लेकिन जब यह सपना पूरा हुआ तो वह हमारे साथ नहीं हैं।’’ पिता के गुजर जाने के बाद सिंधुश्री का रास्ता आसान नहीं था। उन्हें तमाम तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा।
सिंधुश्री ने बताया, ‘‘पोल वॉल्ट बहुत महंगा खेल है और मेरे लिए इसका खर्च उठाना बहुत कठिन है। मेरी मां सिलाई का काम करती हैं, जिससे बहुत मुश्किल से गुजारा हो पाता है, इसलिए दादा-दादी ही मेरा सहारा हैं।’’
फाइनल में जिस पोल से सिंधुश्री ने खेला वह भी उन्होंने किसी अन्य खिलाड़ी से उधार लिया था। सिंधुश्री ने कहा, ‘‘मेरी जैसी तकनीक है, उसे देखते हुए मेरे पास सही पोल नहीं है। आर्थिक तंगी के कारण मैंने छोटे पोल के साथ ही अभ्यास किया है। अंतर-राज्यीय मुकाबले से पहले मैंने अपने दोस्त राहुल से पोल लिया। वह भी मेरे कोच की निगरानी में ही ट्रेनिंग करता है।’’
सिंधुश्री बेंगलुरु में कोच विजयेश एमएम के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण ले रही हैं। सिंधुश्री के प्रशिक्षण और मेहनत के बारे में बताते हुए कोच विजयेश ने कहा, ‘‘उसने छोटे पोल के साथ अभ्यास करते हुए अपनी तकनीक में काफी सुधार किया, लेकिन ज्यादा अभ्यास के कारण वह पोल ढीला पड़ गया। लंबा पोल न होने की वजह से उसने अपनी तकनीक पर बहुत काम किया और छोटे पोल के अनुकूल खुद को ढाल लिया।’’
विजयेश ने बताया, ‘‘आज भी उसे अच्छे वॉल्ट के लिए रनवे पर अपने कदम कम करने पड़े। वह हमेशा सोलह कदमों के साथ खेलती है, लेकिन आज चौदह कदम ही लिए।’’ सिंधुश्री ने अपनी सफलता का श्रेय अपने कोच को भी दिया। सिंधुश्री को लगता है कि वह कोच की निगरानी में बड़ी सफलता हासिल करेंगी।
सिंधुश्री बताती हैं, ‘‘मेरे प्रशिक्षण के लिए मेरे कोच पूरा प्रयास करते हैं। मैं साल 2021 से उनके मार्गदर्शन में सीख रही हूं और तब से मैंने बहुत सुधार किया है। मैंने 3.30 मीटर के साथ शुरुआत की थी और अब मैं 4.25 मीटर के ऊपर वॉल्ट कर रही हूं।’’
कोच विजयेश का मानना है कि सिंधुश्री और बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता रखती हैं। विजयेश ने बताया, ‘‘बहुत लोग सोचते हैं कि वह पोल वॉल्ट के लिए लंबाई में छोटी है, जो केवल एक मिथ है।’’ राष्ट्रीय रिकॉर्ड और एशियाई खेलों में क्वालिफाई करने के बाद सिंधुश्री को उम्मीद है कि उन्हें बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
सिंधुश्री ने कहा, ‘‘मेरे लिए राष्ट्रीय रिकॉर्ड बहुत मायने रखता है, क्योंकि यह मेरे परिवार के नसीब को बदल देगा। मुझे लगता है राष्ट्रीय रिकॉर्ड के बाद मुझे ज्यादा सपोर्ट मिलेगा। उम्मीद है कि प्रशिक्षण सुविधाओं के साथ मेरी डाइट में भी सुधार होगा।’’ सिंधुश्री के कोच विजयेश चाहते हैं कि एशियन गेम्स में खेलने से पहले सिंधुश्री अपने खेल में और सुधार करें, ताकि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को टक्कर दे पाएं।
विजयेश ने कहा, ‘‘उसके लिए 4.25 मीटर का मार्क अच्छा है। हालांकि, उसके पास और आगे बढ़ने की क्षमता है। उसकी सबसे अच्छी बात दृढ़ता है। कुछ वर्षों पहले वह 3.80 मीटर से ज्यादा को पार नहीं कर पा रही थी, लेकिन उसने हार नहीं मानी और प्रयास करती रही, जिसका परिणाम सामने है।’’
सिंधुश्री के लिए एशियन गेम्स में हिस्सा लेना एक सपने के साकार होने से बढ़कर है। एक उधार ली गई पोल, दिवंगत पिता की तस्वीर और भारत की जर्सी के सपने के साथ सिंधुश्री नई ऊंचाइयां छूने के लिए तैयार हैं।
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