एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFI) ने स्थापना के 80 वर्ष पूरे होने के मौके पर हाल ही में नई दिल्ली में ‘इंडियन एथलेटिक्स अवार्ड्स’ का आयोजन किया। इस समारोह में हिस्सा लेने के लिए दिग्गज एथलीट अविनाश साबले भी नई दिल्ली पहुंचे। 2022 एशियन गेम्स में 3000 मीटर स्टीपलचेज में गोल्ड, 5000 मीटर में सिल्वर मेडल जीतकर देश का नाम रोशन करने वाले अविनाश साबले फिर बड़े लक्ष्य के साथ लौटने को तैयार हैं।
ACL इंजरी के कारण लंबा समय प्रतिस्पर्धा से दूर रहने के बाद अब अविनाश साबले की नजर एशियन गेम्स 2026 में अपने पिछले प्रदर्शन को बेहतर करने पर है। अविनाश साबले ने जनसत्ता से खास बातचीत में अपनी चोट, रिहैब, वापसी के सफर और मेडल का रंग बदलने की तैयारी को लेकर विस्तार से बात की।
सवाल: प्रतिस्पर्धा दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। युवा एथलीट भी शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। इस अंतर को पाटने के लिए क्या प्रयास कर रहे हैं?
अविनाश साबले: देखिये युवा एथलीट आ रहे हैं। यह बहुत अच्छी चीज है, क्योंकि जो हमारा जो स्टैंडर्ड है, ओवरऑल स्टैंडर्ड बहुत अच्छा हो रहा है। कुछ समय पहले ऐसा था कि किसी भी इवेंट में, एक आधा एथलीट अच्छा कर रहा है, कोई दो एथलीट अच्छा कर रहे हैं, लेकिन अभी आप एथलेटिक्स के किसी भी इवेंट में देखेंगे कि उसमें बहुत कॉम्पीटिशन बढ़ा है। मुझे लगता है कि यह बहुत अच्छा है कि सीनियर तो अच्छा कर ही रहे हैं और उसके साथ-साथ जूनियर भी प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।
मतलब सीनियर्स के जैसा स्टैंडर्ड अचीव करने की कोशिश कर रहे हैं। तो यह बहुत अच्छा संकेत है। जैसे युवा एथलीटों के लिए भी एक लक्ष्य तय है, कि हां मुझे यहां तक पहुंचना है। मुझे लगता है कि इसमें जो हमारे सीनियर एथलीट हैं उनका भी बहुत बड़ा योगदान है कि वे जूनियर एथलीट के सामने टारगेट सेट कर रहे हैं कि हमें यहां तक पहुंचना है, क्योंकि जब तक हम किसी के सामने एक लक्ष्य निर्धारित नहीं करेंगे तब तक हम वहां नहीं पहुंचेंगे। यह बहुत अच्छी चीज है कि सीनियर एथलीट जो टारगेट बना रहे हैं उनको जूनियर एथलीट हासिल कर रहे हैं।
इससे यह है कि हम बहुत जल्द विश्व स्तर के स्टैंडर्ड तक पहुंच जाएंगे। वर्ल्ड लेवल छूने के लिए हम स्टेप बाई-स्टेप पहुंच सकते हैं। जैसे पहले था कि किसी भी इवेंट में टारगेट कम हुआ करता था। अभी आप देख रहे हैं कि नेशनल इवेंट में बहुत सारे रिकॉर्ड ब्रेक हो रहे हैं, तो यह बहुत अच्छी चीज है। पहले देखिए कुछ रिकॉर्ड्स तो ऐसे भी थे जो 30-30, 35-35, 40-40 साल पुराने थे। उनको हम ब्रेक कर रहे हैं।
मुझे लगता है कि यह जो बीच वाला समय था, उसमें हम शायद थोड़े पीछे रहे। मतलब मुझे ऐसा लगता है कि इतने वर्षों तक कोई रिकॉर्ड बना रहा तो उसका अर्थ है कि हम उस स्तर से आगे ही नहीं बढ़ पाए और हम इतने साल पीछे ही रहे, लेकिन आज की जनरेशन, अभी जो एथलीट हैं, वह एथलेटिक्स को उस मानक तक लेकर जा रहे हैं, जो जूनियर एथलीट हैं उनका टारगेट यह है कि हम इससे भी आगे कैसे लेकर जाएं।
सवाल: आपको एसीएल की समस्या हुई थी। उससे तो उबर चुके हैं, लेकिन इस दौरान क्या समस्या आई, जैसे दोहा डायमंड लीग आपका अच्छा नहीं हुआ। इस बारे में विस्तार से बताइए।
अविनाश साबले: अपनी इंजरी के बारे में बात करूं तो पिछले साल एशियन चैंपियनशिप में मेडल जीता उसके बाद डायमंड लीग खेलने गया। डायमंड लीग में पहले लैप (वाटर जम्प में) में ही गिर गया। उस समय मुझे वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी हिस्सा लेना था। वह भी नहीं खेल पाया।
मतलब ऐसा था कि मुझे लगता है कि उस समय जो मेरी फिटनेस थी वह शायद मेरी जिंदगी की अब तक की सर्वश्रेष्ठ फिटनेस थी। मुझे काफी सारी उम्मीदें थीं कि वर्ल्ड चैंपियनशिप में अच्छा होगा, क्योंकि सारी चीजें सभी एकसाथ थीं, जैसे अनुभव है, फिटनेस है, जो मैं पहले कभी कर नहीं पा रहा था वह कर रहा था। लेकिन फिर डायमंड लीग में चोटिल हुआ। सर्जरी हुई। उसके बाद पूरा साल ऐसा ही चला गया।
जब से मैंने खेलना शुरू किया है तब से यह पहली बार था कि मेरा पूरा साल खाली चला गया। मतलब मैं एक साल से कॉम्पीटिशन से दूर हूं। ऐसे समय में कभी-कभी डिप्रेस भी महसूस किया। रिहैब के समय आपको कभी-कभी लगता है कि इंजरी ठीक क्यों नहीं हो रही है। मेरे साथ ऐसा समय आकर चला गया है। हम कोशिश करते हैं, लेकिन कुछ न कुछ समस्या आ जाती थी।
इससे एक चीज सीखी है कि हमें हार नहीं माननी है। हमें कंटीन्यू करना है। अभी मुझे जैसे लग रहा है कि मेरी फिटनेस अच्छी है। अभी जैसे एशियन गेम्स आने वाले हैं, तो उसके लिए भी मैं तैयारी कर रहा हूं कि मुझे अच्छा करना है। जैसे मेरा स्टीपलचेज है, तो उसमें फिर से कॉन्फिडेंस लाना है कि मुझे दोबारा कॉम्पीटिशन में अच्छा करना है।
मेरे लिए मुख्य बात तो यह है कि इंजरी की वजह से कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए क्वालिफाई नहीं कर पाया, लेकिन मेरा यह है कि चलो इंजरी तो एथलीट लाइफ का एक पार्ट है तो जो हो गया उसे भूल जाओ, इसलिए अभी मैं पूरा फोकस एशियन गेम्स पर कर रहा हूं।
सवाल: एशियन गेम्स आप खेलेंगे, वहां के लिए क्या लक्ष्य है, क्या संभावना है?
अविनाश साबले: यदि मैं एशियन गेम्स की बात करूं तो मैंने पिछले एशियाई खेलों में एक गोल्ड मेडल और एक सिल्वर मेडल जीता था। मेरा गोल है कि मैं अपने पिछले प्रदर्शन से बेहतर करूं और अपने देश के लिए जो भी मेरा सर्वश्रेष्ठ है, मैं अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करूंगा।
सवाल: सिल्वर को गोल्ड मेडल में बदलने के लिए कितनी मेहनत कर रहे हैं?
अविनाश साबले: मेहनत तो बहुत कर रहा हूं। अभी तैयारी भी अच्छी है। पिछले साल मेरा इंजरी के कारण बर्बाद हो गया। उससे काफी डिस्टर्ब हुआ था, लेकिन नियमित रिहैब वगैरह करके फिर से पुरानी फॉर्म में लौट रहा हूं। मेरी जो अभी जर्नी है, उसमें एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने बहुत सपोर्ट किया है। जैसे मेरे रिहैब का प्लान है या जो भी है, साई (स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया) और सभी ने बहुत सपोर्ट किया है। तैयारी बहुत अच्छी है तो शायद लगता है कि जो मेरा पिछला प्रदर्शन है उससे इस बार वाला बेहतर रहेगा।
सवाल: लक्ष्य क्या निर्धारित किया है? कितने सेकंड, कितने मिनट, ऐसा कुछ?
अविनाश साबले: नहीं, अभी टारगेट तो मेडल का ही है। मेरा लक्ष्य यह है कि कैसे मेडल का रंग बदल सकता हूं। जैसे मैं स्टीपलचेज में गोल्ड मेडल जीता था और भी एक इवेंट है, जिसके बारे में मैं सोच रहा हूं कि उसमें मुझे मेडल जीतना है। अभी मैं सिर्फ सोच रहा हूं…।
एक इवेंट साथ में लेकर चल रहा हूं। तो मेरा अभी यही प्लान है कि जैसे अभी मेरे पास जितना टाइम है, उसमें मैं कितना ग्रो करता हूं। मतलब मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की कोशिश करूंगा।
सवाल: इंडियन एथलेटिक्स अवार्ड्स की जो शुरुआत हुई है, उसके बारे में क्या कहेंगे?
अविनाश साबले: हमारे भारतीय एथलीटों के लिए एक प्रेरणा है। वे अच्छा करने के लिए प्रोत्साहित होंगे। जैसे किसी एथलीट के सामने टारगेट होता है तो वह यह सोचता है कि मुझे इसे हासिल करना है। तो मुझे लगता है कि वे एथलीट भी सोचेंगे कि हां यह अवार्ड मुझे भी मिलना चाहिए। तो वे और मेहनत करेंगे। …और अच्छे से परफॉर्म करेंगे।
एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के 80 साल पूरे होने पर जैसे अभी हमारे भारतीय एथलीटों का यह कार्यक्रम हुआ, तो हमें यह बहुत अच्छा लगा। जैसे हम अभी आज यहां आए। हम अपने पुराने लीजेंड्स एथलीटों को नाम से तो जानते थे, लेकिन कभी मिले नहीं थे तो उनसे यहां मिलने का मौका मिला। बहुत अच्छा लगा और कार्यक्रम भी अच्छा था।
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भारत के मध्यम दूरी के धावक अविनाश साबले दाएं पैर की पिंडली और हैमस्ट्रिंग में चोट के कारण इस सीजन अब तक अपने पर्सनल बेस्ट (8 मिनट 9:91 सेकंड) के आसपास भी नहीं पहुंच पाए हैं। पिछले वर्ष पेरिस डायमंड लीग में अविनाश साबले 3000 मीटर स्टीपलचेज में 8 मिनट 10 सेकंड से कम समय में रेस पूरी करने वाले पहले भारतीय बने थे, जो राष्ट्रीय रिकॉर्ड है। (पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें)
