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सौरव घोषाल ने रचा इतिहास, एशियाई खेलों के फाइनल में बनाई जगह

इंचियोन। सौरव घोषाल ने एशियाई खेलों के फाइनल में पहुंचकर नया इतिहास रचने के साथ ही भारत के लिये कम से कम रजत पदक पक्का किया लेकिन दीपिका पल्लीकल को महिला एकल में कांस्य पदक से ही संतोष करना पड़ा। घोषाल ने दो बार के पूर्व चैंपियन और शीर्ष दस खिलाड़ियों में शामिल मलेशिया के […]

Updated: September 23, 2014 9:15 AM

इंचियोन। सौरव घोषाल ने एशियाई खेलों के फाइनल में पहुंचकर नया इतिहास रचने के साथ ही भारत के लिये कम से कम रजत पदक पक्का किया लेकिन दीपिका पल्लीकल को महिला एकल में कांस्य पदक से ही संतोष करना पड़ा।

घोषाल ने दो बार के पूर्व चैंपियन और शीर्ष दस खिलाड़ियों में शामिल मलेशिया के ओंग बेंग ही के खिलाफ बेहतरीन प्रदर्शन किया। उन्होंने यह मैच केवल 45 मिनट में 11-9, 11-4, 11-5 से जीता और इस तरह से स्क्वाश के फाइनल में पहुंचने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने।

भारत के 28 वर्षीय खिलाड़ी ने इस तरह से मलेशियाई खिलाड़ी से 2006 एशियाई खेलों में मिली हार का बदला चुकता कर दिया। बेंग ही ने वहां स्वर्ण पदक जीतकर 2002 के बुसान खेलों के अपने खिताब का बचाव किया था।

घोषाल ने मैच के बाद कहा, ‘‘मैं पीसीए सर्किट में उसके खिलाफ ज्यादा नहीं खेला हूं लेकिन मैंने उसने एक बार टीम स्पर्धा में हराया था और उसने मुझे दोहा एशियाई खेलों के सेमीफाइनल में 3-1 से पराजित यिका था। ’’

घोषाल कल फाइनल में विश्व के 46वें नंबर के कुवैती खिलाड़ी अब्दुल्लाह अल मुजायेन से भिड़ेंगे जिन्होंने सेमीफाइनल में हांगकांग के मैक्स ली को 3-2 से पराजित किया।

इससे पहले दुनिया की 12वें नंबर की खिलाड़ी पल्लीकल को दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी निकोल डेविड के हाथों पराजय के बाद कांस्य पदक से ही संतोष करना पड़ा।

भारत की 23 वर्षीय दीपिका को डेविड ने 25 मिनट के भीतर 4 . 11, 4 . 11, 5 . 11 से हराया।

शीर्ष वरीयता प्राप्त मलेशियाई खिलाड़ी निकोल खिताब की प्रबल दावेदार है जिसने 1998 बैंकाक एशियाई खेलों में स्क्वाश को पहली बार शामिल किए जाने के बाद से एक भी मैच नहीं गंवाया है। वह मुकाबले की शुरूआत से ही जबर्दस्त फार्म में थी जिससे पल्लीकल को मौका ही नहीं मिल सका।

भारत ने ग्वांग्झू खेलों में चार वर्ग में से तीन में कांस्य पदक जीते थे लेकिन इस बार टीम चैम्पियनशिप समेत चारों वर्ग में वह पदक का दावेदार है।
घोषाल ने बाद में कहा कि वह एक बार में एक मैच पर ध्यान दे रहे थे और पदक को लेकर ज्यादा नहीं सोच रहे थे।

उन्होंने कहा, ‘‘पिछले तीन दिन में मैं तीन अच्छे खिलाड़ियों से खेला। कल मैंने खेल गांव जाने के बाद विचार किया कि अगला मैच कैसे खेलना है। मैं आज भी ऐसा ही करूंगा। मैं एक बार में एक मैच पर ध्यान दे रहा हूं। हां स्वर्ण पदक बहुत बड़ी उपलब्धि होगी लेकिन मैं पदक के बजाय मैच पर ध्यान दे रहा हूं। ’’

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