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आकलनः कबड्डी में स्वर्ण पदक के लिए नहीं करनी पड़ेगी ‘कुश्ती’

एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक की गारंटी वाला एकमात्र खेल है कबड्डी, जिसमें भारत अब तक पुरुषों के सभी सात और महिलाओं के सभी दो स्वर्ण पदक अपने नाम कर चुका है।

Author Published on: August 9, 2018 5:35 AM
इस बार भारत को दोनों वर्गों में थोड़ी बहुत चुनौती ईरान से मिल सकती है।

मनोज जोशी

एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक की गारंटी वाला एकमात्र खेल है कबड्डी, जिसमें भारत अब तक पुरुषों के सभी सात और महिलाओं के सभी दो स्वर्ण पदक अपने नाम कर चुका है। पुरुषों की कबड्डी को इन खेलों में 1990 के बेजिंग एशियाई खेलों से शामिल किया गया था। वहीं महिलाओं के सफर की शुरुआत 2010 के आयोजन से हुई। इस बार भारत को दोनों वर्गों में थोड़ी बहुत चुनौती ईरान से मिल सकती है। उसकी दोनों टीमें पिछली बार फाइनल में पहुंची थीं। पुरुषों में तब भारत केवल दो अंकों से जीत दर्ज कर सका था जबकि महिलाओं में ये अंतर दस अंकों का था। अच्छी बात यह है कि पहली बार इस खेल में पुरुषों के वर्ग में 12 टीमें भाग ले रही हैं जबकि 1994 और 2006 के आयोजनों में केवल पांच ही टीमें थीं।

जाहिर है कि ज्यादा टीमों के बीच स्वर्ण पदक जीतने के मायने भी ज्यादा होंगे। राष्ट्रीय कोच बलवान सिंह, राममेहर सिंह, रामबीर सिंह खोकर और श्रीनिवास रेड्डी की राष्ट्रीय चयन समिति ने ज्यादा ऑलराउंडरों को टीम में शामिल करने पर ध्यान दिया है। कबड्डी का यह ट्रेंड हाल में दुबई में आयोजित मास्टर्स टूर्नामेंट से शुरू हुआ है। ज्यादा से ज्यादा युवा खिलाड़ियों को दोनों टीमों में मौका दिया गया है। यहां तक कि मंजीत छिल्लर, सुरजीत सिंह और सुरेंद्र नाडा जैसे दिग्गजों को भी टीम से बाहर करने से परहेज नहीं किया गया है। जाहिर है कि भारत अपनी जीत को लेकर आश्वस्त है। ऐसे प्रयोग भविष्य में उसे और मजबूत टीम बनाने में मददगार साबित होंगे।

टीम में कप्तान अजय ठाकुर, रिशांक देवादिगा, रोहित कुमार, प्रदीप नरवाल, राहुल चौधरी और गंगाधारी मल्लेश के रूप में रेडर हैं जबकि गिरीश मारुति एरनाक, मोहित छिल्लर और राजूलाल डिफेंडर हैं। दीपक निवास हूडा और संदीप नरवाल टीम के ऑलराउंडर हैं। मौजूदा टीम में इंचियोन में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम से केवल अजय ठाकुर ही मौजूद होंगे। हाल में दुबई में आयोजित कबड्डी मास्टर्स में वह 50 रेड में से 34 अंक हासिल करने वाले टॉप स्कोरर थे। इसी टूर्नामेंट में मोनू गोयत ने 40 रेड में से 28 अंक अर्जित किए। टीम के लेफ्ट कॉर्नर डिफेंडर गिरीश मारुति एरनाक से एक बार फिर दुबई के प्रदर्शन को दोहराने पर सबकी निगाहें होंगी। खासकर पाकिस्तान और कोरिया के खिलाफ उन्होंने 12-12 अंक बटोरकर अपने बेहतरीन रक्षण का परिचय दिया था।

उनके अलावा टीम में मोहित छिल्लर और राजू लाल चौधरी के रूप में दो राइट कॉर्नर डिफेंडर हैं तो वहीं एक अन्य कॉर्नर डिफेंडर मल्लेश गंगाधारी टीम के नए चेहरे हैं। महिलाओं में भी एशियाई चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम की कप्तान अभिलाषा म्हात्रे को टीम में शामिल नहीं किया गया है जबकि जकार्ता में सोनाली शिंगाते, सयाली केरीपाले, शालिनी पाठक, उषा रानी और मधु के रूप में कुछ नए चेहरों को शामिल किया गया है। टीम की अनुभवी खिलाड़ी कविता देवी और प्रियंका ने इंचियोन में भी भाग लिया था। जाहिर है कि इनका अनुभव बाकी खिलाड़ियों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है।

भारतीय पुरुष खिलाड़ियों के लिए अच्छी बात यह है कि उन्हें प्रो कबड्डी लीग के अलावा हाल में दुबई में कबड्डी मास्टर्स में खेलने का मौका मिल चुका है जबकि महिलाएं पर्याप्त एक्सपोजर न मिलने की समस्या से जूझ रही हैं। हालांकि ऐसी ही स्थिति दूसरे देशों की महिलाओं की भी है लेकिन ईरान की महिलाएं इस बारे में अपवाद हैं जो न सिर्फ लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग ले रही हैं बल्कि अपने घरेलू मैदानों पर भी वह अपनी तैयारी को गम्भीरता से अंजाम देने में जुटी हैं। जाहिर है कि ईरान से भारत का मुकाबला रोमांचक हो सकता है लेकिन परिणाम को लेकर किसी भी तरह का संदेह व्यक्त नहीं किया जा सकता।

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