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एश्ले बार्टी 5 साल पहले टेनिस छोड़कर क्रिकेटर बनीं; 2016 में वापसी की, अब दुनिया की नंबर वन रैंक हासिल की

क्रिकेटर बनने के पीछे बार्टी ने कहा था, 'यह एक ऐसा खेल है, जिसमें जब आप संघर्ष के समय अकेले नहीं होते हैं। कठिन समय में आपकी मदद के लिए 10 और लड़कियां आपके साथ होती हैं। वे आपको उस मुश्किल दौर से वापस ला सकती हैं।'

Author नई दिल्ली | Updated: June 24, 2019 9:54 AM

Ashleigh Barty became only second Australian woman एश्ले बार्टी ने रविवार को बर्मिंघम डब्ल्यूटीए खिताब जीत लिया। इस जीत के साथ ही वे वर्ल्ड वुमन्स टेनिस रैंकिंग में टॉप पर पहुंच गईं। उन्होंने जापान की नाओमी ओसाका को पीछे छोड़ा। बार्टी के अब 6540 अंक हो गए हैं, जबकि ओसाका के 6377 अंक हैं। बार्टी वर्ल्ड टेनिस रैंकिंग में नंबर वन बनने वाली दूसरी महिला ऑस्ट्रेलियाई हैं। उनसे पहले मार्गेट कोर्ट ने यह उपलब्धि हासिल की थी। बार्टी इस साल की शुरुआत में फ्रेंच ओपन का भी खिताब जीत चुकी हैं। वे फ्रेंच ओपन जीतने वाली 5वीं ऑस्ट्रेलियाई महिला हैं। ऑस्ट्रेलिया के लिए पिछली बार मार्गेट कोर्ट ने 1973 में फ्रेंच ओपन फाइनल जीता था।

शायद बहुत कम लोगों को पता हो कि बार्टी को शीर्ष पर पहुंचाने में क्रिकेट का भी अहम योगदान है। 23 साल की बार्टी खुद को मानसिक तौर पर मजबूत करने के लिए पांच साल पहले टेनिस छोड़कर क्रिकेटर बन गईं थीं। तब उन्हें टेनिस खेलना, देखना और यहां तक कि इस खेल के बारे में बात करना तक पसंद नहीं था। बार्टी सितंबर 2014 में यूएस ओपन के पहले दौर में हार गईं थीं। इसके बाद उन्होंने पेशेवर टेनिस से ब्रेक लेने का ऐलान किया। तब उन्होंने इसकी वजह नहीं बताई थी।

बाद में बताया, ‘मुझे मानसिक तौर पर अधिक मजबूत होने के लिए कुछ समय चाहिए था। मेरे लिए टेनिस खेलना कठिन हो गया था। मैं इसका पर्याप्त आनंद नहीं ले पा रही थी।’ क्रिकेटर बनने के पीछे बार्टी ने कहा था, ‘यह एक ऐसा खेल है, जिसमें जब आप संघर्ष के समय अकेले नहीं होते हैं। कठिन समय में आपकी मदद के लिए 10 और लड़कियां आपके साथ होती हैं। वे आपको उस मुश्किल दौर से वापस ला सकती हैं।’ बार्टी ने जब ब्रेक लिया, तब उनकी वुमन्स सिंगल्स में 216 और डबल्स में 40 रैंक थी। 24 अप्रैल 1996 को क्वींसलैंड में जन्मीं बार्टी ने 4 साल की उम्र से टेनिस खेलना शुरू किया था। वे 2011 में विम्बलडन जूनियर गर्ल्स चैम्पियन बन गईं थीं।

 

बार्टी ने 2015 में क्वींसलैंड फायर के तत्कालीन कोच एंडी रिचर्ड्स से मुलाकात कर क्रिकेट खेलने की इच्छा जाहिर की। रिचर्ड्स उनकी स्पोर्ट्स स्किल्स से बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने बार्टी को ट्रेनिंग देनी शुरू की। इसके बाद बार्टी ने वेस्टर्न सबर्ब्स के लिए 13 मैच खेले। उन्होंने एक शतक लगाया और 42.4 के औसत से 8 विकेट लिए। वेस्टर्न सबर्ब्स ने ही लीग का फाइनल जीता। उसी साल ऑस्ट्रेलिया में वुमन्स बिगबैश लीग शुरू हुई। बार्टी के साथ ब्रिसबेन हीट ने करार किया। बार्टी ने अपने पहले ही मैच में मेलबर्न स्टार्स के खिलाफ एक छक्के की मदद से 27 गेंद पर 39 रन बनाए। यह उनकी टीम में किसी बल्लेबाज का दूसरा हाइएस्ट स्कोर था। बिग बैश लीग खत्म होने के कुछ सप्ताह बाद ही बार्टी ने फरवरी 2016 में पेशेवर टेनिस में वापसी का ऐलान किया। शुरू में सिर्फ डबल्स इवेंट में हिस्सा लिया। मई 2016 से सिंगल्स भी खेलने लगीं और अब नंबर वन की कुर्सी हासिल की।

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