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खेलों के लिए कुछ खास नहीं रहा जेटली के आम बजट में

खेल संस्थानों को सहायता के लिए 545.90 करोड़ रुपए रखे गए हैं। युवा मामलों और एनएसएस योजना के तहत 215.70 करोड़ रुपए आबंटित किए गए हैं।

Author नई दिल्ली/जलंधर | February 29, 2016 10:51 PM
बजट पेश करने के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान । (पीटीआई फोटो)

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को यहां संसद में पेश 2016-17 के केंद्रीय बजट में खेल मंत्रालय के लिए आबंटन में पिछले साल के मुकाबले 50 करोड़ 87 लाख रुपए का मामूली इजाफा किया है। जेटली ने योजना व्यय के तहत 1400 करोड़ रुपए जबकि गैर योजना व्यय के तहत 192 करोड़ रुपए आबंटित करते हुए खेल मंत्रालय को कुल कुल 1592 करोड़ रुपए आबंटित किए। पिछले साल कुल 1541 करोड़ 13 लाख रुपए आबंटित किए गए थे।

योजना व्यय में पिछले साल की तुलना में 10 करोड़ 82 लाख रुपए जबकि गैर योजना व्यय में 40 करोड़ 15 लाख रुपए का इजाफा किया गया है। पूर्वोत्तर के क्षेत्रों के योजना के तहत आबंटन पिछले साल के 150.23 करोड़ रुपए की तुलना में संशोधित करके 144.98 करोड़ रुपए कर दिया गया है। राष्ट्रीय शिविरों के आयोजन की जिम्मेदारी रखने वाले भारतीय खेल प्राधिकरण को 11.91 करोड़ रुपए के इजाफे के साथ इस साल 381.30 करोड़ रुपए दिए गए हैं।

खेल संस्थानों को सहायता के लिए 545.90 करोड़ रुपए रखे गए हैं। युवा मामलों और एनएसएस योजना के तहत 215.70 करोड़ रुपए आबंटित किए गए हैं। पिछले साल की तुलना में इस बार भी डोपिंग रोधी गतिविधियों के लिए 12 करोड़ रुपए आबंटित किए गए हैं।

जलंधर के विश्वप्रसिद्ध खेल सामग्री उद्योग के लिए आम बजट में कोई घोषणा नहीं होने से निराश उद्योगपतियों ने यहां कहा कि उद्योग को फिर से जीवित करने पर न तो केंद्र सरकार का और न ही राज्य सरकार का ध्यान है। निराश खेल सामग्री निर्माताओं ने कहा कि बजट से निराशा ही हाथ लगी है। उनकी पुरानी मांग पर भी कोई विचार नहीं किया गया है। जूते और खिलाड़ियों के बैग पर से उत्पाद शुल्क भी नहीं घटाया गया है। जलंधर के खेल सामग्री निर्माताओं के एक संगठन स्पोर्ट्स फोरम के प्रमुख संजय कोहली ने कहा कि हमारी पुरानी मांग है कि खेल सामग्री पर लगने वाला उत्पाद शुल्क ड्यूटी समाप्त कर दिया जाए, लेकिन केंद्र और राजग सरकारों ने अब तक इस पर कोई विचार नहीं किया है और न ही इसे समाप्त किया है।

उन्होंने कहा कि हमें आशा थी कि उत्पाद शुल्क को इस बजट में समाप्त कर दिया जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं किए जाने से केवल निराशा ही हाथ लगी है। एक सवाल के जवाब में कोहली ने कहा कि खेल सामग्री पर दो फीसद का शुल्क लगता है। हम इसे समाप्त करने की मांग कर रहे हैं। ऐसे भी इसे खतम कर देने से सरकार के राजस्व पर कोई असर नहीं पड़ेंगा।

कोहली ने कहा कि स्पोर्ट्स शू पर 12 फीसद एक्साइज है। खिलाड़ी जो बैग लेकर चलते हैं उस पर भी 12 फीसद एक्साईज लगता है। ऐसे भी खेल सामग्री पर पंजाब सरकार के वैट थोपने से यहां का व्यापार प्रभावित ही हुआ है और जलंधर का खेल सामग्री उद्योग धीरे धीरे समाप्त हो रहा है। दूसरी ओर खेल उद्योग संघ के विजय धीर ने कहा कि बजट में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे यह लगे कि खेल उद्योग को किसी प्रकार की राहत देने या इसे पुनर्जीवित करने की दिशा में उठाया गया कदम है।
हमें केवल निराशा ही हाथ लगी है।

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