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ग्‍लव्‍स खरीदने तक के पैसे नहीं थे, नंगे हाथ प्रैक्टिस करने वाले अमित ने बॉक्सिंग में जीता सोना

अमित के बड़े भाई अजय का कहना है कि बॉक्सर की ग्रोथ के लिए अच्छी डाइट बेहद जरुरी है और ये एक ऐसी चीज थी, जिसकी कमी अमित के पास हमेशा रही। इसके बावजूद उसने अपने से बड़े और अनुभवी बॉक्सरों को हराया।

भारतीय बॉक्सर अमित पंघल गोल्ड मेडल जीतने के बाद दर्शकों का अभिवादन करते हुए। (PTI Photo/ Shahbaz Khan)

इंडोनेशिया में हुए 18वें एशियन गेम्स में भारतीय मुक्केबाज उम्मीदों के अनुरुप मेडल जीतने में नाकाम रहे। हालांकि एक मुक्केबाज ने अपने प्रदर्शन से ना सिर्फ भारत को गोल्ड मेडल दिलाया, बल्कि अपने बेहतरीन प्रदर्शन से भविष्य के लिए उम्मीदें जगा दी हैं। इस मुक्केबाज का नाम है अमित पंघल। हरियाणा का यह प्रतिभाशाली मुक्केबाज रोहतक के मैना गांव का निवासी है। अमित के पिता के पास सिर्फ एक एकड़ जमीन है, जिसमें वह गेंहू और बाजरा उगाते हैं। परिवार के आर्थिक हालात ऐसे भी नहीं हैं कि उसे बहुत अच्छा कहा जाए। यही वजह है कि अमित के बड़े भाई अजय पंघल को बॉक्सिंग छोड़नी पड़ी थी। अमित के बड़े भाई अजय पंघल का कहना है कि उन्होंने अनिल धनकर से कोचिंग ली है और वह भी अन्तरराष्ट्रीय बॉक्सर बन सकते थे, लेकिन घर की आर्थिक हालात अच्छी नहीं होने के चलते उनका यह सपना पूरा नहीं हो सका।

बता दें कि अजय पंघल ने साल 2011 में भारतीय सेना में नौकरी करना शुरु कर दिया, लेकिन उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि अमित की बॉक्सिंग की ट्रेनिंग जारी रहे। यह अमित पंघल का बॉक्सिंग के प्रति जुनून और समर्पण ही था कि उन्होंने 6 माह तक बिना बॉक्सिंग ग्लव्स के ही ट्रेनिंग की। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के अनुसार, अजय ने बताया कि अमित के ग्लव्स पुराने होकर फट चुके थे, जिस कारण करीब 6 माह तक उसने बिना ग्लव्स के ट्रेनिंग की। हमारे पास उस वक्त नए ग्लव्स खरीदने के पैसे नहीं थे, क्योंकि उनकी कीमत करीब 3000 रुपए थी। बॉक्सर की ग्रोथ के लिए अच्छी डाइट बेहद जरुरी है और ये एक ऐसी चीज थी, जिसकी कमी अमित के पास हमेशा रही। इसके बावजूद उसने अपने से बड़े और अनुभवी बॉक्सरों को हराया। ऐसा भी वक्त था जब वह भूखे पेट लड़ा था और जीता भी था। अजय के अनुसार, अमित रिंग में अपनी टेक्नीक से हमेशा प्रभावित करता रहा।

उल्लेखनीय है कि अमित भी भारतीय सेना में जूनियर कमीशंड ऑफिसर के तौर पर कार्यरत है और नायब सूबेदार के पद पर तैनात है। अमित ने साल 2006 में अपनी बॉक्सिंग की शुरुआत की थी। अमित के पिता चाहते हैं कि अब वह ओलंपिक में गोल्ड मेडल लाने पर अपना ध्यान केन्द्रित करें। अमित के पिता विजेन्दर सिंह का कहना है कि एशियाड में गोल्ड मेडल जीतना एक मील का पत्थर है। हमारे परिवार ने जो भी त्याग किए हैं, वो सब एक ओलंपिक मेडल के लिए किए गए हैं। एशियाड का मेडल उसके विश्वास में इजाफा करेगा। इसके साथ ही एशियाड से उसे वह जरुरी अनुभव मिलेगा, जो ओलंपिक जैसे बड़े मंच के लिए जरुरी है। ओलंपिक पदक जीतना ना सिर्फ उसका बल्कि हम सभी का सपना है।”

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