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भेदभाव का शिकार हुआ अमित मिश्रा

भारत और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सीरीज का तीसरा टैस्ट मैच बुधवार से शुरू होगा। सवाल यह है कि इस मैच में लेग स्पिनर अमित मिश्रा अंतिम ग्यारह में शामिल हो पाएंगे या नहीं।

Author नई दिल्ली | November 23, 2015 11:05 PM

भारत और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सीरीज का तीसरा टैस्ट मैच बुधवार से शुरू होगा। सवाल यह है कि इस मैच में लेग स्पिनर अमित मिश्रा अंतिम ग्यारह में शामिल हो पाएंगे या नहीं। क्योंकि इस प्रतिभाश्ली लेग स्पिनर के साथ हर स्तर पर भेदभाव हुआ है। क्या चयनकर्ताओं और क्या महेंद्र सिंह धोनी सबने अमित के साथ भेदभाव ही किया। भारतीय टैस्ट टीम की कप्तानी संभालने के बाद दिल्ली के ही उनके साथी खिलाड़ी रहे विराट कोहली से उम्मीद थी कि वे कम से कम इस प्रतिभावान बल्लेबाज को टीम में पर्यटक के तौर पर नहीं रखेंगे। बल्कि उनकी प्रतभिा का इस्तेमाल भी करेंगे। लेकिन विराट भी धोनी के नक्शेकदम पर ही चलते दिखाई दे रहे हैं। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मोहाली में खेले गए पहले टैस्ट में मिश्रा अंतिम ग्यारह में शामिल थे। लेकिन बंगलुरु में खेले गए दूसरे टैस्ट में उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया और उनकी जगह स्टुअर्ट बिन्नी को अंतिम ग्यारह में शामिल करने का हैरत भरा फैसला टीम प्रबंधन ने लिया।

अंतिम ग्यारह से छुट्टी करने के लिए न तो विराट कोहली ने कोई तर्क दिया और न ही टीम के निदेशक रवि शास्त्री ने। मिश्रा ने पहले टैस्ट में खराब गेंदबाजी की होती तो उनके हटाए जाने का किसी को मलाल नहीं होता लेकिन इस लेग स्पिनर ने मोहाली में अपने प्रदर्शन से साबित किया कि वे अभी भारत के सर्वश्रेष्ठ लेग स्पिनर हैं। उन्होंने मोहाली में दुनिया के नंबर एक बल्लेबाज एबी डिविलियर्स को दोनों पारियों में आउट कर भारतीय टीम की जीत में बड़ी भूमिका निभाई थी। यह सही है कि पहले टैस्ट में रविचंद्रन अश्विन और रवींद्र जडेजा ने ज्यादा विकटें लीं लेकिन दोनों पारियों में अमित मिश्रा ने डिविलयर्स को आउट कर भारत को जीत की राह पर लगया था। दिलचस्प तथ्य यह भी है कि उन्होंने डिविलयर्स को दोनों ही पारियों में बोल्ड किया था। लेकिन उनकी इस करिश्माई गेंदबाजी के बावजूद कोहली ने उन्हें दूसरे टैस्ट से बाहर कर उस स्टुअर्ट बिन्नी को जगह दी जिनकी प्रतिभा ‘पिता’ के चयनकर्ता रहते ही आगे बढ़ी थी।

कोहली की नीयत पर सवाल उठने इसलिए भी लाजमी हैं क्योंकि मिश्रा की जगह जिस बिन्नी को उन्होंने टीम में शामिल किया उनसे उन्होंने महज तीन ओवर ही गेंदबाजी करवाई। ऐसे में समझा जा सकता है कि बिन्नी की उपयोगिता टीम में कितनी और क्या है। इसी टैस्ट में आफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने 18 और बाएं हाथ के स्पिनर रवींद्र जडेजा ने 16 ओवर डालकर चारचार विकेट लिए थे। दक्षिण अफ्रीका पहली पारी में 214 रन पर आउट हो गई थी। मोहाली में दोनों पारियों में मिश्रा की गुगली पर गच्चा खा कर बोल्ड हुए डीविलियर्स बंगलुरु में एक छोर पर मोर्चा थामे रखा था। उन्होंने 85 रन की पारी खेली थी। इसी वजह से टीम प्रबंधन के मिश्रा की जगह बिन्नी को टीम में शामिल किए जाने पर सवाल उठने लाजमी हैं।

यह जानना भी कम दिलचस्प नहीं है कि बीसीसीआइ ने कुछ दिन पहले ही मुंबई में संपन्न वार्षिक आम बैठक में हितों के टकराव को मुद्दा बना कर राष्ट्रीय चयनकर्ता रोजर बिन्नी को हटा दिया था। तब यह तर्क दिया गया था कि स्टुअर्ट बिन्नी पर राष्ट्रीय चयनकर्ता का बेटा होने के नाते एक ठप्पा लगा रहता है इसलिए रोजर बिन्नी को हितों के टकराव के कारण हटाया गया है। हालांकि बीसीसीआइ को यह ख्याल काफी बाद में आया। स्टुअर्ट बिन्नी कोई अपनी प्रतिभा की वजह से टीम में शामिल नहीं किए जाते रहे हैं, रोजर बिन्नी की वजह से ही टीम में उन्हें जगह मिलती रही है।

पर जिस हितों के टकराव को मुद्दा बना कर रोजर बिन्नी को चयनकर्ता से हटाया गया, बंगलुरु में हितों का टकराव नदर नहीं आया। वहां मिश्रा बाहर हो गए और स्टुअर्ट अंदर। हालांकि इस बीच पंजाब के स्पिनर आलराउंडर गुरकीरत सिंह मान को विशेष रूप से इस टैस्ट के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया था। टैस्ट से पहले ऐसा माना जारहा था कि वे टीम में बतौर चौथे स्पिनर हो सकते हैं। लेकिन दूसरे टैस्ट की टीम सामने आई तो गुरकीरत भी नहीं थे और मिश्रा की जगह बिन्नी ने ले ली थी। बाद में गुरकीरत को दो अन्य खिलाड़ियों उमेश यादव और भुवनेश्वर कुमार के साथ कहा गया कि वे रणजी ट्राफी मुकाबले में हिस्सा लें।

मोहाली टैस्ट में भारत की जीत में प्रमुख भूमिका निभाने के बाद मिश्रा को दूसरे टैस्ट से बाहर करना उनके साथ नाइंसाफी ही कहा जाएगा और ऐसा कोई पहली बार हुआ हो, ऐसा भी नहीं है। मिश्रा हमेशा चयनकर्ताओं व टीम प्रबंधन के भेदभाव का शिकार होते रहे हैं। जिंबाब्वे में एकदिवसीय सीरीज में 18 विकेट लेने का रेकार्ड बनाने के बावजूद उन्हें अगली सीरीज में बाहर कर दिया गया था।

कई बार उन्हें टीम में शामिल भी किया गया लेकिन धोनी को उनकी शक्ल पसंद नहीं थी इसलिए उनकी प्रतिभा को दरकिनार कर धोनी अपनी पसंद थोपते रहे और वे पर्यटक की तरह टीम में आते-जाते रहे। उनका साथ भारतीय चयनकर्ताओं व टीम प्रबंधन ने किस तरह का व्यवहार किया है, आंकड़ों से समझा जा सकता है। 2008 में मोहाली में आस्ट्रेलिया के खिलाफ टैस्ट पदार्पण करने के बाद मिश्रा पिछले सात साल में सिर्फ 17 टैस्ट और 2003 में अपना वनडे पदार्पण करने के बाद पिछले 12 सालों 31 वनडे ही खेल पाए हैं।

मिश्रा की जगह टीम में शामिल किए गए बिन्नी ने पिछले लगभग डेढ़ साल के अंदर अब तक पांच टैस्ट खेले हैं जिसमें उन्होंने 85.66 के भारी भरकम औसत से सिर्फ तीन ही विकेट लिए हैं और उनके खाते में कुल 194 रन दर्ज हैं। मिश्रा 17 टैस्टों में 35.21 के औसत से 61 विकेट ले चुके हैं और उनके खाते में 557 रन दर्ज हैं। लेकिन बोर्ड में कोई गाडफादर नहीं होने की वजह से मिश्रा हाशिए पर हैं और स्टुअर्ट बिन्नी टीम के हिस्सा। दिलचस्प बात यह भी है कि अब विराट तर्क दे रहे हैं कि बंगलुरु में हालात को देखते हुए बिन्नी को टीम में शामिल किया गया था। लेकिन कोई अपने इस ‘आक्रामक’ कप्तान से पूछे कि हालात अगर बिन्नी के अनुकूल थे तो सिर्प तीन ओवर ही उनसे क्यों फिंकवाए। विरोट कोहली को इस सवाल का जवाब देना चाहिए। लेकिन वे ऐसा करेंगे, लगता नहीं है।

 

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