पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण भारत समेत पूरा विश्व कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस में किल्लत जूझ रहा है। इस बीच इंग्लैंड में अलग ही समस्या पैदा हो गई है। इंग्लैंड में क्रिकेट सीजन शुरू होने से पहले गेंद की कमी हो गई है। इसका कारण अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध है। इंग्लैंड में टेस्ट और प्रथम श्रेणी क्रिकेट के लिए ड्यूक्स कंपनी की लाल गेंदों का इस्तेमाल होता है। 1760 से गेंद बना रही यह कंपनी इंग्लैंड के क्रिकेट सीजन में चाह हजार से पांच हजार गेंद बनाती है।
लगभग चार दशकों से कंपनी के मालिक दिलीप जाजोदिया ने कहा कि युद्ध के कारण सप्लाई-चेन में बाधा ने कंपनी को सीजन की शुरुआत में काउंटी तक वितरण सीमित करने के लिए मजबूर किया है। डेली मेल के अनुसार जाजोदिया ने यह तक कहा दिया कि अगर उन्हें पता होता कि ऐसी दिक्कत होती तो वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से युद्ध देरी से शुरू करने का आग्रह करते।
दक्षिण एशिया में होती है सिलाई
जाजोदिया ने डेली मेल से कहा, ‘अगर मुझे पता होता कि ऐसा होने वाला है, तो मैं डोनाल्ड ट्रंप से बात करता। कृप्या क्रिकेट सत्र शुरू होने से पहले किसी पर हमला मत करना!’ ड्यूक्स गेंद ब्रितानी गायों की चमड़ी से बनाई जाती हैं और चेस्टरफील्ड में तैयार की जाती हैं। गेंदों को सिलाई के लिए दक्षिण एशिया भेजा जाता है। फिर ब्रिटेन वापस भेज दिया जाता है। गेंद सिलने के लिए गई है, लेकिन लौटने में दिक्कत हो रही है। यही गेंद की कमी का कारण है।
बकवास खाड़ी युद्ध के कारण बड़ा संकट
जजोदिया ने कहा, ‘इस बकवास खाड़ी युद्ध की वजह से अभी हमारे सामने एक बड़ा संकट है। हमें क्लबों को सीजन की शुरुआत में उनकी 50 प्रतिशत गेंद ही दे पाएंगे और फिर दिक्कत को सुलझना होगा। उपमहाद्वीप में हमारे कारखानों में बहुत सारा माल जाने के लिए तैयार है, लेकिन गतिरोध के कारण विमान कंपनियां माल नहीं ले रही हैं।
गेंद की ढुलाई की कीमत बढ़ी
जाजोदिया ने बताया कि गेंद की ढुलाई की कीमत बढ़ गई है। उन्होंने कहा, ‘रेट भी बढ़ गए हैं। आमतौर पर 120 क्रिकेट बॉल के एक बॉक्स के लिए एयरलाइंस लगभग 5 डॉलर प्रति किलो लेती हैं। अब यह 15 डॉलर प्रति किलो हो गया है। ज्यादा सामान पश्चिम एशिया से जाता है, लेकिन अगर अचानक रॉकेट उड़ने लगें,तो आपके लिए एक बड़ा संकट हो जाएगा।’
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