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अक्षय कुमार हॉकी लीजेंड बलबीर सिंह के निधन से दुखी, जानिए क्यों बताया खुद को सौभाग्यशाली

हॉकी लीजेंड बलबीर सिंह के निधन से न सिर्फ खेल जगत बल्कि बॉलीवुड के लोगों के बीच भी शोक की लहर है। बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार ने भी बलबीर को लेकर अपने सोशल अकाउंट पर एक ट्वीट किया।

फिल्म गोल्ड के वक्त अक्षय कुमार ने बलबीर सिंह के साथ बिताए थे कुछ पल

हॉकी के महानतम खिलाड़ियों में से एक तीन बार के ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता बलबीर सिंह सीनियर का सोमवार को निधन हो गया। उनके जाने का दुख न सिर्फ खेल जगह से ताल्लुख रखने वाले लोगों है बल्कि बॉलीवुड के सुपरस्टार भी उनके निधन पर शोक व्यक्त कर रहे हैं। हाल ही में बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार ने बलबीर को लेकर अपने सोशल अकाउंट पर एक ट्वीट किया।

उन्होंने लिखा, ‘हॉकी लीजेंड बलबीर सिंह जी के निधन के बारे में सुनकर बेहद दुख हुआ। यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे उनसे मिलने का मौका मिला। वह एक शानदार शख्सियत थे। मेरी संवेदनाएं उनके परिवार के साथ हैं।’

बता दें कि अक्षय की बलबीर सिंह से मुलाकात फिल्म ‘गोल्ड’ के सेट पर हुई थी। गोल्ड की कहानी भारत द्वारा 1948 के लंदन ओलंपिक में शानदार जीत हासिल करने के गौरवशाली पल पर आधारित थी। तभी रील खिलाड़ी हॉकी के असली खिलाड़ी से मिले थे। देश के महानतम खिलाड़ियों में से एक बलबीर सिंह सीनियर अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति द्वारा चुने गए आधुनिक ओलंपिक इतिहास के 16 महानतम ओलंपियनों में शामिल थे।

बलबीर सिंह को लेकर महान धाविका पीटी उषा ने ट्वीट करते हुए कहा, ‘बलबीर सिंह सीनियर जी निधन के बारे में सुनकर दुख हुआ। शब्दों से परे वह एक शानदार एथलीट और रोल मॉडल थे। मेरे संवेदनाएं उनके परिवार, दोस्तों और फैन्स के साथ हैं।’

अभिनव बिंद्रा ने ट्वीट किया, ‘भारत के सबसे प्रतिष्ठित ओलंपियनों में से एक बलबीर सिंह सीनियर के निधन के बारे में सुनकर दुख हुआ। ऐसे एथलीट और रोल मॉडल काफी कम होते हैं। उन्हें जानना सम्मान की बात है। मुझे उम्मीद है कि उनका उदाहरण दुनिया भर के एथलीटों को प्रेरित करता रहेगा।’

हेलंसिंकी ओलंपिक (1952) फाइनल में नीदरलैंड के खिलाफ पांच गोल करने का उनका रिकार्ड आज भी कायम है ।उन्हें 1957 में पद्मश्री से नवाजा गया था। यह सम्मान पाने वाले वह पहले खिलाड़ी थे। बलबीर सिंह सीनियर ने लंदन (1948), हेलसिंकी (1952) और मेलबर्न (1956) ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीते थे । वह 1975 में विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम के मैनेजर भी रहे थे।

कौशल के मामले में मेजर ध्यानचंद के समकक्ष कहे जाने वाले बलबीर सिंह सीनियर आजाद भारत के सबसे बड़े खिलाड़ियों में से थे। वह और ध्यानचंद भले ही कभी साथ नहीं खेले, लेकिन भारतीय हॉकी के ऐसे अनमोल नगीने थे जिन्होंने पूरी पीढ़ी को प्रेरित किया। पंजाब के हरिपुर खालसा गांव में 1924 में जन्में बलबीर को भारत रत्न देने की मांग लंबे अर्से से की जा रही है।

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