वेंकट कृष्णा बी। भारतीय क्रिकेट लंबे समय तक एक ऐसे दौर में रहा, जहां बड़े नाम अक्सर फैसलों के ऊपर भारी पड़ जाते थे। चयनकर्ता कई बार प्रदर्शन से ज्यादा प्रतिष्ठा का ख्याल रखते दिखते थे, लेकिन पिछले कुछ समय में यह तस्वीर बदलती नजर आई है। इसकी एक बड़ी वजह मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर के वे फैसले रहे, जिनमें उन्होंने साफ संदेश दिया कि टीम किसी भी खिलाड़ी से बड़ी है। जब उन्होंने कहा, ‘किसी को तो बाहर होना पड़ेगा’ तो यह सिर्फ एक खिलाड़ी के चयन या बहिष्कार की बात नहीं थी, बल्कि टीम इंडिया के उस स्टार कल्चर को चुनौती थी जो वर्षों से चला आ रहा था।
भारत के टी20 विश्व कप टीम की घोषणा करने से एक रात पहले सब कुछ ऐसा था जिसमें कोई हैरानी नहीं थी। यह टीम निरंतरता पर ही आगे बढ़ी थी। फिर मुंबई में चयन बैठक में मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर ने ऐसा सवाल रखा जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी।
यह शुभमन गिल के बारे में था। उस समिति ने छह महीने पहले एशिया कप के लिए अचानक शुभमन गिल को चुन लिया था। वह कदम कभी ठीक से काम नहीं आया। उस फैसले ने संजू सैमसन को बल्लेबाजी क्रम में नीचे कर दिया। टीम की बनाई निडरता को बिगाड़ दिया।
अगरकर ने टीम प्रबंधन को दिखाया आईना
एक ऐसी टीम में एक एंकर ला दिया जो खासतौर पर एंकर को हटाने के लिए बनी थी। इस फैसले पर पहले ही जांच हो चुकी थी। श्रेयस अय्यर ने भी शानदार IPL खत्म किया था और उन्हें बाहर करना कई लोगों को समझ से बाहर लग रहा था। शुभमन गिल के फैसले को पलटने का मतलब सिर्फ तर्क नहीं, बल्कि मानना भी था। एक और बात- टीम प्रबंधन शुभमन गिल को चाहता था। अजीत अगरकर ने उन्हें आईना दिखा दिया।
अजीत अगरकर ने इसका उल्ट किया और साफ-साफ समझाया। अजीत अगरकर ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ‘आपकी राय मेरी राय से अलग हो सकती है। हमें अब भी लगता है कि वह एक क्वालिटी प्लेयर है। किसी को तो बाहर होना ही है। वह है- ऐसा इसलिए नहीं है कि वह अच्छा खिलाड़ी नहीं है। खुशकिस्मती से भारतीय क्रिकेट में हमारे पास विकल्प हैं।’
‘हार्दिक पंड्या से आगे देखें’
यह पहली बार नहीं था जब अगरकर ने ऐसा सवाल पूछा था जिसके लिए बैठक में उपस्थिति लोग तैयार नहीं थे। महीनों पहले अजीत अगरकर ने एक ऐसा आइडिया दिया था जिससे उनके अपने साथी भी हैरान रह गए थे। उन्होंने कहा था कि टी20 कप्तानी के लिए हार्दिक पंड्या से आगे देखें। हार्दिक पंड्या कैप्टन-इन-वेटिंग थे। वारिस तय लग रहा था।
बैठक में सब बंटे हुए थे। अजीत अगरकर ने सूर्यकुमार यादव के लिए वोट किया। जानने वालों के मुताबिक, उन्होंने अपने साथियों सुब्रतो बनर्जी, एस शरत, सलिल अंकोला, एसएस दास की खिंचाई की। इन सभी को अजीत अगरकर के चुनाव में कोई दम नहीं दिखा। जब उन्होंने सबके सामने अपनी बात रखी तो उनकी बात बिल्कुल सीधी थी।
कप्तानी के लिए सूर्या पर लगाया दांव
अजीत अगरकर ने कहा, ‘जिन मुख्य बातों पर बात हुई, उनमें से एक यह थी कि आप ऐसा कप्तान चाहते हैं जो सभी मैच खेले। हमें लगता है कि वह एक काबिल कैंडिडेट है। सब मान गए। सूर्यकुमार यादव को कप्तानी मिल गई। इसके बाद जो हुआ, वह सब जानते हैं।’
इशान किशन की वापसी तीसरी कॉल थी जिसके लिए आराम से ज्यादा भरोसे की जरूरत थी। इशान किशन ने 2023 के अंत में मेंटल ब्रेक के लिए साउथ अफ्रीका से फ्लाइट ली थी। यह फैसला पैनल को पसंद नहीं आया था। वह घरेलू किकेट में वापसी करने में धीमे रहे थे।
मामूली चोट का हवाला देकर इंग्लैंड के टेस्ट दौरे में शामिल होने में उनकी हिचकिचाहट के कारण भी बात आगे नहीं बढ़ी। हालांकि, पिछले सीजन वह लौटे, खूब रन बनाए। चयनकर्ता उन पर कड़ी नजर रख रहे थे। जब शुभमन गिल के विकल्प पर बात हो रही थी तो इशान सूची में पहला नाम नहीं थे। जितेश शर्मा और यशस्वी जायसवाल उनसे आगे थे।
अगरकर ने इशान का ऐसा रखा पक्ष
अजीत अगरकर ने कहा, ‘वह व्हाइट-बॉल क्रिकेट में शीर्ष पर बल्लेबाजी करते हैं। वह अच्छी फॉर्म में हैं। वह पहले भारत के लिए खेल चुके हैं। वह भारतीय टीम में इसलिए नहीं थे, क्योंकि उनसे आगे दो बहुत अच्छे खिलाड़ी ऋषभ पंत और ध्रुव जुरेल थे। इसका किसी और चीज से कोई लेना-देना नहीं है।’ अजीत अगरकर ने पिछली बातों को मौजूदा काबिलियत पर हावी नहीं होने दिया। नतीजा इशान टीम में थे।
सीनियर्स को ऐसा किया किनारे
भारत घर में टेस्ट मैचों में बुरी तरह हार रहा था। ऑस्ट्रेलिया में टीम इंडिया शर्मिंदा हुई। रोहित शर्मा की बल्लेबाजी इतनी खराब हो गई थी कि उन्होंने जनवरी में सिडनी टेस्ट से खुद को बाहर कर लिया। विराट कोहली की स्पिन के खिलाफ ऑफ स्टम्प के बाहर की पेस के खिलाफ कमियां लंबे समय से थीं और इसका कोई इलाज नहीं दिख रहा था।
टेस्ट में जब नतीजे नहीं आ रहे थे तो भारतीय क्रिकेट को अपने स्टार्स को इज्जत देते और कड़ा फैसला लेते हुए पीछे छोड़ना पड़ा। रोहित टस से मस नहीं हुए। अगरकर के पैनल ने उन्हें इंग्लैंड टूर से पहले बाहर कर दिया। कोहली कुछ ही समय बाद टेस्ट से हट गए। इसके बाद के नतीजों ने फैसले को सही साबित कर दिया।
विराट कोहली ने घर पर ODI में सेंचुरी लगाई। रोहित फिट हुए। घरेलू क्रिकेट में लौटे और 50-ओवर फॉर्मेट में फिर से स्टार बन गए। अजीत अगरकर ने उनके भविष्य के बारे में सोचा। अजीत अगरकर ने कहा, ‘वे ट्रायल पर नहीं हैं। उन्हें जो कुछ भी हासिल करना था, उन्होंने कर लिया है। अब भी बहुत लंबा रास्ता तय करना है। हम देखेंगे कि टीम कैसी बनती है, लेकिन हमारे पास कुछ आइडिया हैं।’
‘स्टार पूजा’ के इर्द-गिर्द बने कल्चर में जहां चयनकर्ताओं ने पहले से ही काम करने के बजाय नजरअंदाज कर दिया है, अगरकर ने अपने पास मौजूद सबसे मुश्किल काम किया। उन्होंने इसे पूरा किया।
दूसरे तरीकों से भी बदला कल्चर
वर्षों से चयनकर्ताओं ने टीम घोषणा करने के बाद मीडिया से बात नहीं की थी। अजीत अगरकर प्रेस कॉन्फ्रेंस को फिर से लाए, बैठे मुश्किल सवाल लिए, उनके जवाब दिए। गलतफहमियां अब भी हो सकती हैं। वे हमेशा होती हैं, लेकिन कम से कम उनकी बात रिकॉर्ड पर थी।
अजीत अगरकर ने यह भी अनिवार्य किया कि उपलब्ध खिलाड़ी घरेलू क्रिकेट खेलें। नतीजे दिख रहे थे। सिर्फ रोहित और कोहली के कॉम्पिटिटिव होने में ही नहीं, बल्कि कुछ और खास बातों में भी। हार्दिक पंड्या ने T20 वर्ल्ड कप में बिना किसी चिंता के नियमित गेंदबाजी की। घरेलू क्रिकेट में मैच के हालात ने इसे मुमकिन बनाया था।
जब गौतम गंभीर ने अपना ब्लूप्रिंट बनाया तो उसे ऐसे चयनकर्ताओं की जरूरत थी जो विरोध करने के बजाय एक साथ आएं। अजीत अगरकर दिल्ली कैपिटल्स से जुड़े थे और समझते थे कि फ्रेंचाइजी T20 क्रिकेट कितना आगे बढ़ चुका है। सितंबर 2025 तक पैनल का हिस्सा रहे एस शरत और सुब्रतो बनर्जी ने नींव रखी जिस पर बाकी चार ने काम किया।
गंभीर भी अगरकर के शुक्रगुजार
भारत ने तीन साल में तीन ICC टाइटल जीते। उनमें से हर एक में चयनकर्ताओं का रोल बहुत जरूरी रहा है। इस पर शायद ही कभी ध्यान दिया गया हो। T20 वर्ल्ड कप फाइनल के बाद ड्रेसिंग रूम में गौतम गंभीर ने सबके सामने यह बात कही, ‘मुझे लगता है कि मुझे यह ट्रॉफी अजीत अगरकर को समर्पित करनी चाहिए, क्योंकि उनकी बहुत बुराई होती है और मैं उनकी ईमानदारी के लिए शुक्रगुजार हूं।’
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