वेंकट कृष्णा बी। अफगानिस्तान ने आईसीसी टी20 विश्व कप के आखिरी मैच में कनाडा को 82 रन से हराकर अपने कोच जोनाथन ट्रॉट को शानदार विदाई दी। साल 2022 में अफगानिस्तान की कमान संभालने के बाद जोनाथन ट्रॉट के समय में टीम ने अपनी काबिलियत से ज्यादा अच्छा प्रदर्शन किया। 50 ओवर के वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में पहुंचने से चूकने के बाद टीम 2024 T20 वर्ल्ड कप के आखिरी चार में पहुंची। अफगानिस्तान को एक मजबूत टीम बनाने के बाद इंग्लैंड के इस पूर्व ओपनर ने एक इमोशनल बातचीत में अपने समय के बारे में बताया।
अफगानिस्तान के साथ सबसे अच्छे पलों पर जोनाथन ट्रॉट ने कहा, ‘बहुत सारी अच्छी यादें। मैं हमेशा खुद को बहुत खुशकिस्मत महसूस करता हूं कि एक खिलाड़ी के तौर पर और अब एक कोच के तौर पर भी मेरे पास बहुत सारी यादें हैं। मुझे लगता है कि इसी मैदान पर, पाकिस्तान को हराना, मुझे लगता है, वर्ल्ड कप में पहली बार, 50 ओवर का गेम, इंग्लैंड को हराना, सेंट विंसेंट में दो गेम, यह वर्ल्ड कप जैसा ही है।’
जोनाथन ट्रॉट ने कहा, ‘हमने हालांकि और भी बहुत कुछ हासिल किया है, द्विपक्षीय सीरीज, पहली बार हमने पाकिस्तान, बांग्लादेश को हराया, साउथ अफ्रीका, ये सब चीजें, इसलिए मैं बहुत खुशकिस्मत हूं कि मुझे कुछ बहुत अच्छे खिलाड़ियों, कुछ बहुत अच्छे इंसानों और बहुत सारे अच्छे लोगों को कोचिंग देने का मौका मिला।’
कोचिंग से हटना मेरा फैसला नहीं: ट्रॉट
अफगानिस्तान से अलग होने का फैसला किस वजह से हुआ। इस सवाल पर जोनाथन ट्रॉट ने कहा, ‘यह मेरा फैसला नहीं है, इसलिए मैं इसे यहीं खत्म करता हूं। शायद समय सही हो, शायद नहीं। मुझे नहीं पता, लेकिन मैं सभी को भविष्य के लिए शुभकामनाएं देता हूं। मुझे यह मौका मिलने के लिए बहुत शुक्रगुज़ार हूं। मुझे यह मौका सच में संयोग से मिला।’
ग्राहम थोर्प को बनना था कोच
जोनाथन ट्रॉट ने बताया, ‘ग्राहम थोर्प को कोच बनना था और बदकिस्मती से वह यह रोल नहीं कर पाए। फिर मुझे यह जॉब ऑफर हुई और मैंने इसे दोनों हाथों से ले लिया, लेकिन साथ ही ग्राहम ने एक कोच के तौर पर मेरे डेवलपमेंट में बहुत बड़ा रोल निभाया और उन्होंने मुझे ECB में बेहतरीन मौके दिए और एक कोच के तौर पर मुझ पर पूरा भरोसा और विश्वास किया, इसलिए इस रोल के लिए मुझे उनका बहुत शुक्रगुजार होना चाहिए, इसलिए मैं यहां संयोग से हूं। मैंने अपना सब कुछ दिया।’
जोनाथन ट्रॉट ने कहा, ‘मुझे उम्मीद है कि खिलाड़ी खेल के लिए मेरे प्यार और खिलाड़ियों और लोगों के तौर पर उनके लिए मेरी परवाह को देख सकते हैं। लेकिन सिर्फ यही नहीं, इस जॉब में मेरे लिए सबसे बड़ी खुशी यह है कि मैंने प्लेयर्स को मैदान के बाहर भी डेवलप होते और जिंदगी बदलते हुए देखा, सिर्फ मैदान ही नहीं, बल्कि खिलाड़ियों की अपने परिवार की किस्मत और एक परिवार और लोगों के ग्रुप के तौर पर आगे बढ़ने की काबिलियत को भी, इसलिए मुझे लगता है कि इस गेम के जरिए हम यह देख पाए हैं और इसमें एक छोटा सा रोल निभा पाना बहुत अच्छा लग रहा है। क्रिकेट साइड को भूल जाइए, जब मैंने काम संभाला तो लड़कों को खुद को तैयार होते और युवाओं के तौर पर आगे बढ़ते और यंग मैन बनते देखना बहुत फायदेमंद है।’
जोनाथन ट्रॉट मुश्किल से रोक पाए आंसू
अफगानिस्तान को कैसे एक मजबूत टीम बनाया, के सवाल पर जोनाथन ट्रॉट ने अपने आंसू रोकते हुए कहा, ‘खैर, मुझे लगता है और मैं यहां बैठकर आपको अपनी आंखों से देखी हुई बहुत सी कहानियां सुना सकता हूं। हां- मैंने कहा था कि मैं परेशान नहीं होना चाहता। मुझे बस अपनी पहली ट्रिप याद है, जब हम आयरलैंड में थे और मैंने बस ऐसी चीजें देखीं जिससे मुझे अहसास हुआ कि ये लड़के कितने टैलेंटेड और फोकस्ड हैं। प्लेयर्स को बहुत क्रेडिट देने की जरूरत है।’
अब रहती है फाइनल खेलने की उम्मीद
जोनाथन ट्रॉट ने बताया, ‘वे दूसरे देशों की तुलना में इतने ऊंचे लेवल पर काम करते हैं। फिर वे इस स्टेज पर आकर मुकाबला कर सकते हैं और लोग हमसे सेमीफाइनल और फाइनल में पहुंचने की उम्मीद करते हैं, जो मुझे कमाल की बात लगती है कि वे ऐसा कर सकते हैं, दबाव संभाल सकते हैं। वह भी तब जब बैकग्राउंड यह है कि उनके पास उस तरह की रोजाना की कोचिंग, एकेडमी और सुविधाएं और स्कूलिंग नहीं जो युवा खिलाड़ियों के पास होती हैं।’
जोनाथन ट्रॉट ने कहा, ‘मैं आज सोच रहा था, अगर मैं स्कूल नहीं गया होता और एकेडमी में नहीं गया होता, कोचिंग सेशन में हिस्सा नहीं लिया होता और मेरी परवरिश वैसी नहीं हुई होती जैसी मुझे मिली, तो मुझे यकीन नहीं है कि मैं 20 हजार लोगों के सामने उस मैदान पर खड़ा होकर कुछ कर पाता। जितनी कोचिंग मुझे मिली है, उसकी तुलना में ये लोग अब इंटरनेशनल लेवल पर जो कोचिंग दे रहे हैं, वह बहुत कम है, इसलिए मैं उनमें से हर एक को सलाम करता हूं। मेरे लिए, जिस लेवल पर वे काम करते हैं, वह मुझे हमेशा हैरान कर देगा और दूर से देखने पर, मैं हमेशा उन्हें बहुत पसंद करूंगा और चाहूंगा कि वे लोग अच्छा करें।’
