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भारतीय ओलंपिक दल में करीब 50 फीसद महिला एथलीट, बेटियों के कंधे पर देश की शान

रियो ओलंपिक 2016 की यादों से उबरते हुए लगभग पांच साल हो गए। कोरोना महामारी के कारण तोक्यो ओलंपिक एक साल के लिए टाला गया और 23 जुलाई से खेलों के महासमर का आगाज होगा।

ऊपर (बाएं) मीराबाई चानू, भवानी देवी। (बीच में) तोक्यो के खेल गांव में अभ्यास सत्र के दौरान तैराक श्रीहरि नटराज और माना पटेल। नीचे (बाएं) दीपा कर्माकर, सुशीला देवी । फाइल फोटो।

रियो ओलंपिक 2016 की यादों से उबरते हुए लगभग पांच साल हो गए। कोरोना महामारी के कारण तोक्यो ओलंपिक एक साल के लिए टाला गया और 23 जुलाई से खेलों के महासमर का आगाज होगा। पिछले ओलंपिक की यादों की पोटली को खोलें तो बैडमिंटन में पीवी सिंधू के रजत पदक के अलावा बहुत कुछ ध्यान नहीं आता। टूर्नामेंट के अंत तक बड़े धमाके का इंतजार कर रहे प्रशंसकों को अंतत: हमारी बेटी ने पूरा किया। तोक्यो के लिए खिलाड़ियों की सूची लगभग तैयार हो चुकी है और इस बार भी बेटियों से कमाल की उम्मीद है। इससे ज्यादा जो गर्व की बात है, 119 एथलीटों में करीब 50 फीसद महिलाएं हैं। लैंगिक समानता की बात करने से ज्यादा भारतीय ओलंपिक संघ ने इस बार इसे सच कर दिखाया है। दीपिका, मनु भाकर, विनेश फोगाट, मीराबाई चानू और माना पटेल जैसी कई महिलाएं देश के लिए पदक की सबसे बड़ी दावेदार हैं। टीम और व्यक्तिगत स्पर्धा के 18 खेलों में से पांच में पदक दिलाने की जिम्मेदारी पूरी तरह से महिलाओं पर ही है। कुछ खेल तो ऐसे हैं, जिसमें पहली बार भारत से किसी ने क्वालीफाई किया है।

दरअसल, 2019 में विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप का खिताब जीतने वाली सिंधू तोक्यो में भी पदक की सबसे तगड़ी दावेदार हैं। बावजूद इसके, बीते कुछ सालों में महिला एथलीटों ने अपने प्रदर्शन से बेहतर संकेत दिए हैं। निशानेबाजी, तीरंदाजी, कुश्ती, बैडमिंटन, जिमनास्टिक और ट्रैक एंड फील्ड जैसे खेलों में ओलंपिक की तैयारी के लिहाज से महिला एथलीट, पुरुषों की तुलना में कहीं ज्यादा सशक्त दावेदार लग रही हैं। एक ऐसे देश में जहां परंपरागत तौर पर पुरुषों की प्रधानता रही है, जहां महिलाओं पर सामाजिक और सांस्कृतिक पाबंदियां लगी रही हों और खेल के लिए आधारभूत ढांचे का अभाव हो, वहां अगर महिलाएं पुरुषों के साथ या उनसे आगे खड़ी दिखती हैं तो इसकी बड़ी वजह महिला खिलाड़ियों के बीते कुछ सालों में बेहतर प्रदर्शन रहा है।

बीस साल पहले भारत ने सिडनी ओलंपिक के लिए 72 खिलाड़ियों का दल भेजा था, तब दल को एक कांस्य पदक हासिल हुआ था। यह पदक भी महिला एथलीट ने जीता था। वहीं हाल रियो ओलंपिक में रहा। 15 खेल प्रतियोगिताओं में भारत की ओर से 117 सदस्यीय दल शामिल हुआ। इनमें 54 महिला एथलीट थे जिन्होंने कुल मिलाकर दो मेडल हासिल किए। इस लिहाज से महिलाओं का प्रदर्शन लगातार पुरुष एथलीटों से बेहतर कहा जा सकता है। 1900 में पहले भारतीय के ओलंपिक में भाग लेने के 52 साल बाद महिला एथलीटों ने खेलों के महाकुंभ में हिस्सा लिया।

यह सफर आसान नहीं होने वाला था लेकिन धीरे-धीरे अपनी काबिलियत के दम पर उन्होंने भारतीय समाज और दुनिया के सामने मिसाल पेश की। 1952 के हेलांस्की ओलंपिक में चार महिला एथलीट पदक नहीं जीत पाईं लेकिन दिल जरूर जीत लिया। 50 साल बाद 2000 के सिडनी ओलंपिक में कर्णम मल्लेश्वरी ने पदक जीत कर इतिहास रच दिया। वह खेलों के महाकुंभ में पदक जीतने वाली पहली महिला खिलाड़ी बनीं। 2012 में दो महिला खिलाड़ियों ने उत्सव का मौका दिया। ऐसा पहली बार हुआ जब दो भारतीय महिलाओं ने पदक जीता। मुक्केबाजी में मैरीकॉम ने और बैडमिंटन में साइना नेहवाल ने कांस्य पदक जीते। 2016 ओलंपिक को तो महिला एथलीटों ने यादगार ही बना दिया। पदक के सूखे को समाप्त करते हुए कुश्ती में साक्षी मलिक और बैडमिंटन में सिंधू ने पदक जीते। 2021 में भी उनसे इसी तरह के शानदार प्रदर्शन की देश को उम्मीद है।

भारोत्तोलन

मीराबाई चानू दूसरी बार ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करेंगी। 26 साल के इस भारोत्तोलक ने 2016 रियो ओलंपिक के क्लीन एंड जर्क वर्ग में पदक की दावेदार थीं लेकिन जीत हासिल नहीं कर पाई थीं। इस बार 49 किलो भार वर्ग में उनसे पदक की उम्मीद है। वह फिलहाल विश्व रैंकिंग में चौथे स्थान पर काबिज हैं। साथ ही इस साल अप्रैल में हुए ताशकंद एशियन भारोत्तोलन चैंपियनशिप में चानू ने स्नैच में 86 किलो का भार उठाने के बाद क्लीन एंड जर्क में विश्व रेकॉर्ड बनाते हुए 119 किलो भार उठाया था। 2017 विश्व भारोत्तोलन चैंपियनशिप के 49 किलो भार वर्ग में स्वर्ण पदक हासिल किया। उन्होंने 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में भी स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उनके हाल के प्रदर्शन को देखते हुए ओलंपिक में पदक दावेदार के तौर पर चानू का नाम लिया जा सकता है।

तलवारबाजी

ओलंपिक में तलवारबाजी स्पर्धा के लिए क्वालीफाई करना भारतीय एथलीटों का सपना था। इस सपने को भवानी देवी ने पूरा किया। वह ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाली पुरुष या महिला किसी वर्ग में देश की पहली तलवारबाज बनीं। इसे साथ ही फेंसिंग में राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक दिलाने वाली भी पहली तलवारबाज बनीं। 2017 में आइसलैंड में टर्नोई सैटेलाइट फेंसिंग चैंपियनशिप में देश के लिए स्वर्ण जीत चुकी भवानी फिलहाल इटली में जोरदार तैयारी में लगी हैं। वह यहां से सीधे ओलंपिक के लिए रवाना होंगी। भावनी से भी देश को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है।

जिम्नास्टिक

दीपा कर्माकर ने 2016 रियो ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन किया। वे पदक से कुछ अंकों के अंतर से दूर रह गर्इं। हालांकि अपनी कलाबाजी से सबको प्रभावित किया। स्पर्धा में चौथे स्थान पर रहने के बाद भी उन्होंने काफी सराहना बटोरी। इस साल जिमनास्टिक में प्रणती नायक भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। वह इस स्पर्धा में देश के लिए खेलने वाली दूसरी एथलीट होंगी। उन्हें एशियाई कोटा के तहत ओलंपिक में जगह मिली है। वे 2011 में एशियान आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक चैंपियनशिप में देश के लिए कांस्य पदक जीत चुकी हैं

जूडो

जुडो का सुशीला देवी तोक्यो में इस स्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली अकेली खिलाड़ी हैं। उन्होंने एशियाई कोटे से खेलों के महासमर का टिकट हासिल किया है। उनकी एशियाई रैंकिंग सात है। इसी वजह से 48 किलोग्राम वर्ग में उन्हें कोटा मिला। राष्ट्रमंडल खेल 2014 में उन्होंने देश के लिए रजत पदक जीता है। उन्हें पदक का दावेदार तो नहीं कहा जा सकता लेकिन उनके भीतर यह काबिलियत है कि वह पदक जीत सकें। फिलहाल उनकी तैयारी की व्यवस्था साई द्वारा दिल्ली में ही की गई है।

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