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इन 5 लोगों ने पूरी जिंदगी में कभी नहीं खेला क्रिकेट, लेकिन करते हैं लाजवाब कॉमेंट्री

पुराने जमाने में रेडियो पर लोग क्रिकेट कॉमेंट्री सुना करते थे। यही चीज उन्हें घंटों तक हिलने नहीं देती थी।

अब ब्रॉडकास्ट कंपनियां एेसे क्रिकेट खिलाड़ियों को जिम्मेदारी देने लगी हैं, जो मजेदार तरीके से कॉमेंट्री कर सकें।

क्रिकेट में जितनी अहम बल्लेबाजी और गेंदबाजी होती है, उतनी ही कॉमेंट्री भी। यह न हो तो मैच के दौरान उत्साह नहीं आ पाता। साल 1998-99 में जब सचिन तेंडुलकर अॉस्ट्रेलियाई टीम की बखिया उधेड़ रहे थे तो टोनी ग्रेग की कॉमेंट्री ने समां बांध दिया था। पुराने जमाने में रेडियो पर लोग क्रिकेट कॉमेंट्री सुना करते थे। यही चीज उन्हें घंटों तक हिलने नहीं देती थी। वक्त बदला और क्रिकेट में कई बदलाव हुए, लेकिन कॉमेंट्री आज भी वैसी ही है। अब तो ब्रॉडकास्ट कंपनियां एेसे क्रिकेट खिलाड़ियों को जिम्मेदारी देने लगी हैं, जो मजेदार तरीके से कॉमेंट्री कर सकें और जिन्हें इस खेल की हर बारीकी पता हो। लेकिन कॉमेंट्री करने वाले कई लोग एेसे भी हैं, जिन्होंने कभी बल्ला नहीं पकड़ा, गेंद नहीं फेंकी। यानी उन्होंने कभी क्रिकेट नहीं खेला और उन्होंने दशकों तक क्रिकेट कमेंट्री की या कर रहे हैं।

जिम मैक्सवेल: रिची बर्नाड के बाद अॉस्ट्रेलिया के सबसे जाने-पहचाने कॉमेंटटेटर। अॉस्ट्रेलियाई ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन के लिए साल 1973 से कमेंट्री कर रहे हैं और एशेज सीरीज के लिए बीबीसी के टेस्ट मैच स्पेशलिस्ट माने जाते हैं। इन्होंने ईए स्पोर्ट्स क्रिकेट गेम्स पर 2004 और 2005 में भी कॉमेंट्री की। मैक्सवेल ने तीन किताब भी लिखी हैं, जिसमें स्टंप्स: स्लेजिंग, स्लॉगिंग, स्कैंडल, सक्सेस शामिल है। क्रिकेट के अलावा वह हॉकी, गोल्फ, रग्बी भी कवर करते हैं। साथ ही उन्होंने तीन ओलिंपिक भी कवर किए हैं।

साइमन मान : 25 वर्षों तक बीबीसी के लिए कॉमेंट्री करने वाले साइमन फिलहाल बीबीसी रेडियो के लिए कॉमेंट्री करते हैं। साल 1996 से लेकर अब तक इंग्लैंड के हर दौरे और विश्व कप में उन्होंने कॉमेंट्री की है। वह लाइमलाइट में उस वक्त आए थे, जब साल 1999 के विश्व कप सेमीफाइनल में उन्होंने पिच पर हुई कुछ अप्रत्याशित घटनाओं का जिक्र किया था। यह मैच द.अफ्रीका और अॉस्ट्रेलिया के बीच हुआ था।

नील मैनथॉर्प: नील साउथ अफ्रीकन ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (एसएबीसी) और रेडियो 2000 के लिए काम करते हैं और अब तक प्रोटियाज टीम के 50 से ज्यादा दौरे कवर कर चुके हैं। वह एक फ्रीलांस पत्रकार हैं और 5 किताबें भी लिख चुके हैं, जिसमें ग्रीम स्मिथ, बाउच, गैरी कस्टर्न भी शामिल हैं। वह सुपर स्पोर्ट्स के लिए एक मशहूर कॉलम भी लिखते हैं। उन्होंने साल 1992 में प्रिंट और ब्रॉडकास्ट पत्रकारों के लिए एक स्पोर्ट्स एजेंसी शुरू की थी।

टोनी कोजियर: वेस्टइंडीज क्रिकेट में टोनी कोजियर एक जाना-पहचाना नाम हैं। उन्होंने जर्नलिजम की पढ़ाई की है और 15 साल की उम्र में पहला मैच कवर किया था। 1965 में अॉस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज के बीच हुए टेस्ट मैच की उन्होंने रेडियो कॉमेंट्री की थी। यह उनका पहला अनुभव था। वह बीसीसी के टेस्ट मैच स्पेशलिस्ट हैं और 1966 से लेकर अब तक जो भी वेस्टइंडीज का इंग्लैंड दौरा होता है वह उसकी कॉमेंट्री करते हैं। उन्होंने एक किताब भी लिखी है, जो 1978 में पब्लिश हुई थी।

हर्षा भोगले: भारतीय क्रिकेट कॉमेंट्री की सबसे दमदार आवाज। हर्षा ने अॉल इंडिया रेडियो में सिर्फ 19 साल की उम्र में ही कॉमेंट्री करनी शुरू कर दी थी। अब तक वह 400 अंतरराष्ट्रीय वनडे, 100 टेस्ट मैचो में कॉमेंट्री कर चुके हैं। वह सीएनएन आईबीएन पर क्रिकेट एनालिस्ट भी हैं। हर्षा ने कई किताबें लिखी हैं, जिसमें से एक बेस्ट सेलिंग थी। वह अपनी पत्नी अनीता के साथ एक स्पोर्ट्स कम्युनिकेशन कंसलटेंसी भी चलाते हैं।

सुनिए टोनी ग्रेग की शानदार कमेंट्री:

देखें वीडियो ः

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