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‘MS Dhoni नहीं माने थे, हारने के बाद दोबारा कराया था टॉस,’ कुमार संगकारा ने वर्ल्ड कप फाइनल के किस्से पर तोड़ी चुप्पी

मैच के नतीजे के बाद मैदान पर एकदम अलग-अलग भावनाएं दिखीं थीं। भारतीय खिलाड़ी जीत की खुशी में आंसू बहा रहे थे। युवराज सिंह धोनी को गले लगा रहे थे। वहीं, टीवी कैमरे कुमार संगकारा पर फोकस थे। संगकारा मुस्‍कुराते हुए आगे बढ़ रहे थे।

Author Edited By आलोक श्रीवास्तव नई दिल्ली | Updated: May 29, 2020 1:44 PM
MS Dhoni and Yuvraj Singh celebrating 8502011 में वर्ल्ड कप जीतने के बाद महेंद्र सिंह धोनी और युवराज सिंह। मुस्कुराते हुए आगे बढ़ रहे श्रीलंका के तत्कालीन कप्तान कुमार संगकारा (बाएं)।

श्रीलंका के पूर्व कप्तान कुमार संगकारा का कहना है कि भारत के खिलाफ 2011 वर्ल्ड कप फाइनल में टॉस को लेकर भ्रम की स्थिति थी। भारतीय क्रिकेट टीम के तत्कालीन कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के आग्रह पर दोबारा टॉस कराया गया था। लॉकडाउन के दौरान रविचंद्रन अश्विन इंस्टाग्राम पर एक सीरीज ‘Reminisce with Ash’ चला रहे हैं। इसके ताजा एपिसोड में उन्होंने 2011 वर्ल्ड कप के दौरान श्रीलंका के कप्तान रहे विकेटकीपर बल्लेबाज कुमार संगकारा से बातचीत की। इस दौरान भारतीय ऑफ स्पिनर ने संगकारा से उस विवादित टॉस के बारे में पूछा।

मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए 2011 वर्ल्ड कप फाइनल में श्रीलंका टीम इंडिया के हाथों शिकस्‍त का सामना करना पड़ा था। उस मैच में धोनी ने नुवान कुलसेकरा की गेंद पर लांग ऑन में छक्का लगाकर टीम इंडिया को 28 साल बाद वर्ल्‍ड कप चैंपियन बनायाा था।

मैच के नतीजे के बाद मैदान पर एकदम अलग-अलग भावनाएं दिखीं थीं। भारतीय खिलाड़ी जीत की खुशी में आंसू बहा रहे थे। युवराज सिंह धोनी को गले लगा रहे थे। वहीं, टीवी कैमरे कुमार संगकारा पर फोकस थे। संगकारा मुस्‍कुराते हुए आगे बढ़ रहे थे। उनकी मुस्‍कुराते हुए फोटो थोड़ी देर में ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी।

अपनी उस हंसी को याद करते हुए संगकारा ने अश्विन को बताया, ‘उसके कारण मुझे दुख और निराशा छिपाने में मदद मिली। मेरे ख्‍याल से मेरी जिंदगी में श्रीलंका में ऐसी कई चीजें हुईं, जो आपको पीछे की ओर ले जाती हैं। ऐसी कई चीजें हैं, जिसकी आपको चिंता करनी होती है। हमारे यहां 30 साल गृहयुद्ध चला। 2005 में प्राकृतिक आपदा देखी। हमने अन्य कई मामले देखे। हालांकि, श्रीलंका की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वह हर बार दुखों से ऊपर उठता है। यह हमारे अंदर है। जब हम खेलते हैं तो जीतना चाहते हैं। हम काफी प्रतिस्‍पर्धी हैं।’

उन्‍होंने आगे कहा, ‘चाहे हम जीते या हारें। हमें पता है कि जीत या हार किस तरह लेना है। मुस्‍कुराहट से काफी सीमा तक दुख और निराशा छिप जाती है। श्रीलंका में दो करोड़ लोग 1996 से इस खिताब का इंतजार कर रहे थे। 2011 और 2007 में हमारे पास मौका था। 2009 और 2012 में टी20 वर्ल्ड कप में यह मौका था। इस कारण जीत या हार को समझने के लिए अच्‍छा तरीका है कि जब कोई चीज आपकी तरह नहीं चल रही हो तो यह समझें कि जिंदगी ऐसी है। हालांकि, जरूरी यह है कि आप उसे तब भी वैसे ही चलाएं।’


संगकारा ने फाइनल में दो बार टॉस होने के विवाद पर भी अपनी चुप्‍पी तोड़ी। संगकारा ने कहा कि वानखेड़े स्‍टेडियम पर दर्शकों के शोर के बीच मैंने जो कहा, ‘वह महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) को सुनाई नहीं दिया। धोनी ने दोबारा टॉस करने के लिए कहा।’ संगकारा ने बताया, ‘यह दर्शकों के कारण हुआ। श्रीलंका में कभी ऐसा नहीं हुआ। ऐसा मेरे साथ भारत में ही हुआ। एक बार ईडन गार्डन्‍स में मैं पहली स्लिप पर खडे़ खिलाड़ी से जो कह रहा था वह मुझे खुद को ही सुनाई नहीं दे रहा था। फिर वह तो वानखेड़े स्‍टेडियम था। मुझे याद है कि माही को याद नहीं था कि मैंने क्‍या कहा।’

संगकारा ने बताया, ‘तब माही ने कहा था, क्‍या आपने टेल्‍स कहा। मैंने कहा- नहीं हेड्स कहा। मैच रेफरी ने कहा कि मैंने टॉस जीता है। माही ने तब कहा, नहीं, नहीं नहीं, कुछ उलझन है। फिर से टॉस करते हैं। तब दोबारा टॉस हुआ।’

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