16 साल की तीरंदाज के संघर्ष की कहानी; ब्रेन हेमरेज हुआ, कई दिन बेहोश रही, अब 3 वर्ल्ड कप के लिए किया क्वालिफाई
पिछले साल पड़े ब्रेन स्ट्रोक से उबरने के बाद 16 साल की प्रगति चौधरी अब 3 वर्ल्ड कप में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए तैयार हैं। पिछले 10 महीने में प्रगति चौधरी ने संघर्ष और वापसी का जो जज्बा दिखाया है वह एक मिसाल है।
पिछले साल पड़े ब्रेन स्ट्रोक से उबरने के बाद 16 साल की प्रगति चौधरी अब 3 वर्ल्ड कप में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए तैयार हैं। पिछले 10 महीने में प्रगति चौधरी ने संघर्ष और वापसी का जो जज्बा दिखाया है वह एक मिसाल है। पांच मई 2020 की रात प्रगति चौधरी को अचानक चक्कर आने लगा। उस समय कोरोनावायरस महामारी के कारण देश भर में लॉकडाउन था, इसलिए अस्पताल पहुंचना भी टेढ़ी खीर था।
घरवाले किसी तरह प्रगति को अस्पताल लेकर गए। वहां पता चला कि उन्हें ब्रेन स्ट्रोक (ब्रेन हेमरेज) पड़ा है। प्रगति कई दिनों दिनों तक बेहोश रहीं। उनकी हालत खराब थी। प्रगति की मदद और दुआओं के लिए स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई), तीरंदाजी संघ और देश के नामी-गिरामी तीरंदाजों के हाथ उठ खड़े हुए। कई सप्ताह बाद जब घर लौटीं तो किसी ने नहीं सोचा था कि वह दोबारा धनुष-तीर उठा पाएंगी। सभी बस यह सोच रहे थे कि किसी तरह उनका शरीर और दिमाग पहले की तरह काम करने लगे।
इस मुश्किल घड़ी में प्रगति को माता-पिता के अलावा अपने कोच सुरेंदर कुमार का भी साथ मिला। वे प्रगति के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े थे। प्रगति पूर्वी दिल्ली में रहती हैं, लेकिन उनके माता-पिता उन्हें वहां से 30-35 किलोमीटर दूर नागलोई स्थित तीरंदाजी कोचिंग सेंटर लाए। पहले उन्हें तीरंदाजी मैदान में टहलाना शुरू किया। फिर प्रगति को उसकी तीरंदाजी के वीडियो दिखाए।
माता-पिता और कोच की मेहनत रंग लाई। आखिर प्रगति ने धनुष-तीर उठा लिए। यही नहीं प्रगति ने बुधवार यानी 3 मार्च 2021 को सोनीपत में अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। प्रगति नेशनल सेलेक्शन ट्रायल्स में तीसरे स्थान पर रहीं। इसके साथ ही उन्होंने तीरंदाजी के तीन वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई कर लिया। अप्रैल में ग्वाटेमाला में वर्ल्ड कप होना है। ग्वाटेमाला के बाद मई 2021 में शंघाई में अगला वर्ल्ड कप होना है। उसके बाद जून में पेरिस में तीसरा वर्ल्ड कप होना है।
प्रगति ने पहली बार सीनियर विश्व कप के लिए भारतीय टीम में जगह बनाई। वह कंपाउंड वर्ग में चुनी गई हैं। प्रगति ढाका अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में एक स्वर्ण और 2 रजत पदक जीत चुकी हैं। प्रगति के कोच सुरेंदर कुमार अपनी शिष्या की वापसी को किसी चमत्कार से कम नहीं मानते हैं।
सुरेंदर कुमार कहते हैं कि राष्ट्रीय ट्रायल प्रगति के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं था। हालांकि, प्रगति ने तो उस परीक्षा में कमाल ही कर दिया। उन्होंने दो हजार सात सौ 76 का स्कोर किया। प्रगति ने ब्रेन हेमरेज से पहले कभी भी इतना स्कोर नहीं किया था।















