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BCCI के 38 पूर्ण सदस्यों में एक तिहाई से ज्यादा में पूर्व अधिकारियों-राजनेताओं के बेटे या रिश्तेदार काबिज, बोर्ड के इतिहास में यह सबसे ज्यादा

बीसीसीआई के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा, ‘इतने सारे संघ कभी नहीं रहे हैं, जो परिवारों द्वारा शासित होते हैं।’

Rajasthan Congress CM Ashok Gehlot son Vaibhav Gehlot is in charge of cricket in the state
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत राज्य में क्रिकेट के प्रभारी हैं। (सोर्स- फाइल फोटो)

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बेटे महाआर्यमन सिंधिया को इस महीने की शुरुआत में ग्वालियर डिवीजन क्रिकेट एसोसिएशन (जीडीसीए) का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया। ऐसे समय में जब वंशवाद बिल्कुल भी राजनीतिक सम्मान का टैग नहीं है, तब यदि यह पता चले कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के 38 पूर्ण सदस्यों में से एक तिहाई से ज्यादा में शीर्ष स्तर पर पूर्व अधिकारियों या रसूखदार राजनेताओं के बेटे या रिश्तेदार विराजमान हैं, तो लोगों का चौंकना स्वाभाविक है। यह संख्या बीसीसीआई के इतिहास में सबसे ज्यादा है। यह सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त आरएम लोढ़ा समिति की सिफारिश के बावजूद है।

साल 2016 में नए बीसीसीआई संविधान को तैयार करते हुए, यह रेखांकित किया गया था, ‘कुछ राज्यों में सभी सदस्य कुछ परिवारों या एक ही परिवार से होते हैं। इससे कुछ विशेष व्यक्तियों के हाथों में ही क्रिकेट का नियंत्रण बना रहता है।’ संविधान में प्रशासकों के लिए 6 साल के कार्यकाल के बाद तीन साल का कूलिंग ऑफ पीरियड रखा गया और 70 साल की अधिकतम आयु सीमा तय की गई। हालांकि, इससे कुछ पिताओं को अपने बेटों को गद्दी सौंपने का मंच तैयार हो गया।

बीसीसीआई के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा, ‘इतने सारे संघ कभी नहीं रहे हैं, जो परिवारों द्वारा शासित होते हैं।’ कागजों पर, इन पदों की राह हर इकाई में चुनाव के माध्यम से होती है। लेकिन यह सिर्फ कागजों पर है। व्यवहार में, अगली पीढ़ी को सत्ता का हस्तांतरण होता है, क्योंकि अनुभवी प्रशासकों ने अपने तगड़े गुट बना रखे हैं। वर्षों तक, उन्होंने अपनी इकाइयों में सभी प्रमुख नियुक्तियों का फैसला किया, ताकि वे जिलों, क्लबों या व्यक्तिगत सदस्यों में मतदाताओं को प्रभावित कर सकें।

बीसीसीआई के एक वरिष्ठ पदाधिकारी बताते हैं, ‘ज्यादातर इकाइयां निजी क्लबों की तरह चल रही थीं, किसी भी बाहरी व्यक्ति के लिए इसमें प्रवेश करना मुश्किल था। जब शक्तिशाली राजनेताओं के बेटे और रिश्तेदार मैदान में उतरे, तो कभी-कभी पुराने लोगों को रास्ता बनाना पड़ता था।’ उदाहरण के लिए, राजस्थान के कांग्रेस सीएम अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत राज्य में क्रिकेट के प्रभारी हैं।

मध्य प्रदेश में क्रिकेट प्रबंधन में वंशवाद और राजनीतिक सत्ता समानांतर चलती है। ग्वालियर संभाग के अध्यक्ष प्रशांत मेहता के अनुसार, महाआर्यमन की नियुक्ति को ज्योतिरादित्य की मंजूरी हासिल थी। प्रशांत मेहता ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ को बताया, ‘सदन अध्यक्ष का चुनाव करता है और अध्यक्ष को प्रबंध समिति की नियुक्ति के लिए अधिकृत किया जाता है। ज्योतिरादित्य सिंधिया अध्यक्ष (ग्वालियर) चुने गए, लेकिन उन्होंने मना कर दिया और फिर उन्होंने मुझे (पद) दे दिया। फिर उन्होंने महाआर्यमन को उपाध्यक्ष बनाकर प्रबंध समिति बनाई। ज्योतिरादित्य ग्वालियर डिवीजन के संरक्षक और चंबल डिवीजन के अध्यक्ष हैं।’

जय शाह बीसीसीआई सचिव बनने से पहले गुजरात क्रिकेट संघ के संयुक्त सचिव थे। उनके पिता अमित शाह जीसीए अध्यक्ष थे। सौराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन (एससीए) के अध्यक्ष के रूप में पूर्व रणजी कप्तान जयदेव शाह हैं। उनके पिता निरंजन शाह चार दशक तक एससीए सचिव थे और बीसीसीआई में इसी पद पर रहे। संपर्क करने पर निरंजन शाह ने परिवार को सत्ता की बैटन ट्रांसफर करने का बचाव किया।

निरंजन शाह ने कहा, ‘किसी को चुनाव लड़ने से कौन रोक सकता है? यदि कोई व्यक्ति एक सक्षम प्रशासक है और खेल के प्रति प्रेम रखता है तो क्या यह मायने रखता है कि वह व्यक्ति किसी पूर्व अधिकारी से संबंधित है? लोढ़ा समिति के नियमों के कारण मुझे रिटायर किया गया है। लेकिन वर्षों से बनी संस्था को गलत हाथों में नहीं जाना चाहिए। मेरा बेटा प्रथम श्रेणी का क्रिकेटर है, उसकी अपनी पहचान है और वह क्रिकेट को बढ़ावा देना चाहता है।’

एक नजर

  • जय शाह (बीसीसीआई सचिव, गुजरात क्रिकेट संघ के पूर्व संयुक्त सचिव): पिता: अमित शाह, पूर्व जीसीए अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री।
  • सौरव गांगुली (बीसीसीआई अध्यक्ष): भाई स्नेहाशीष गांगुली बंगाल क्रिकेट संघ (कैब) के महासचिव, चाचा देबाशीष गांगुली (कैब कोषाध्यक्ष), गांगुली बीसीसीआई में अध्यक्ष बनने से पहले कैब में सचिव और अध्यक्ष रह चुके थे।
  • अरुण धूमल (बीसीसीआई कोषाध्यक्ष): भाई: अनुराग ठाकुर, पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष और केंद्रीय सूचना और प्रसारण और युवा मामले और खेल मंत्री।
  • रोहन जेटली (दिल्ली और जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष): पिता: स्वर्गीय अरुण जेटली, डीडीसीए के पूर्व अध्यक्ष, आईपीएल गवर्निंग काउंसिल के सदस्य।
  • महाआर्यमन सिंधिया (ग्वालियर डिवीजन क्रिकेट एसोसिएशन (जीडीसीए) के उपाध्यक्ष): पिता: ज्योतिरादित्य सिंधिया, पूर्व अध्यक्ष, एमपी क्रिकेट एसोसिएशन; अध्यक्ष, चंबल डिवीजन क्रिकेट एसोसिएशन।
  • जयदेव शाह (सौराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन (एससीए) के अध्यक्ष): पिता: निरंजन शाह, पूर्व एससीए और बीसीसीआई सचिव।
  • अविषेक डालमिया (बंगाल क्रिकेट संघ (सीएबी) के अध्यक्ष): पिता: स्वर्गीय जगमोहन डालमिया, पूर्व कैब, बीसीसीआई, आईसीसी अध्यक्ष।
  • अद्वैत मनोहर (विदर्भ क्रिकेट संघ (वीसीए) के अध्यक्ष): पिता: शशांक मनोहर, पूर्व वीसीए, बीसीसीआई, आईसीसी अध्यक्ष।
  • माहिम वर्मा (क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड (सीएयू) सचिव): पिता: पीसी वर्मा, सीएयू के पूर्व सचिव।
  • निधिपति सिंघानिया, जेके ग्रुप (यूपी क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए) के अध्यक्ष): चाचा: स्वर्गीय यदुपति सिंघानिया, यूपीसीए के पूर्व अध्यक्ष।
  • धनराज नाथवानी (गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन (जीसीए) के उपाध्यक्ष): पिता: परिमल नथवानी, पूर्व जीसीए उपाध्यक्ष।
  • प्रणव अमीन (बड़ौदा क्रिकेट संघ (बीसीए) के अध्यक्ष): पिता: चिरायु अमीन, पूर्व बीसीए अध्यक्ष और पूर्व अंतरिम आईपीएल अध्यक्ष।
  • अजीत लेले (बड़ौदा क्रिकेट संघ (बीसीए) सचिव): पिता: स्वर्गीय जयवंत लेले, पूर्व बीसीए और बीसीसीआई सचिव
  • संजय बेहरा (ओडिशा क्रिकेट संघ (ओसीए) सचिव): पिता: आशीर्वाद बेहरा, पूर्व ओसीए सचिव।
  • विपुल फड़के (गोवा क्रिकेट संघ (जीसीए) सचिव): पिता: विनोद फड़के, पूर्व जीसीए सचिव।
  • केचांगुलि रियो (नगालैंड क्रिकेट एसोसिएशन (एनसीए) के अध्यक्ष): पिता: नेफ्यू रियो, पूर्व एनसीए अध्यक्ष और नगालैंड के मुख्यमंत्री।

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