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खिताबी शतकवीर रोजर फेडरर

फेडरर के लिए फरवरी 2004 से अगस्त 2008 की अवधि बेहद शानदार रही जब वे लगातार 237 सप्ताह नंबर वन की कुर्सी पर कायम रहे। लेकिन उनके लिए खराब समय भी आया जब जुलाई 2012 से जनवरी 2016 की अवधि में एक भी ग्रैंड स्लेम नहीं जीत पाए।

रोजर फेडरर (फाइल)

आत्माराम भाटी

स्विटजरलैंड के रोजर फेडरर टेनिस जगत के शहंशाह हैं। इनकी बेहतरीन सर्विस व दमदार रिटर्न व वॉली का जवाब देना आज भी विरोधी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं होता। बहुत कम ही अवसर होते हैं जब टेनिस का यह महानायक मैदान में जल्द हार मान ले। यही कारण है कि 1998 में जूनियर विंबलडन खिताब के बाद सीनियर में 2001 में मिलान इंडोर टूर्नामेंट के रूप में अपना पहला सिंगल खिताब और 2003 में विबंलडन के साथ पहला ग्रैंड स्लेम जीतने वाले फेडरर के पास आज सबसे ज्यादा 20 ग्रैंड स्लेम के साथ कुल 100 खिताब हैं। आज रोजर फेडरर पुरुष वर्ग में सबसे ज्यादा खिताब जीतने के मामले में जिमी कोनर्स 109 खिताब के बाद 100 खिताब अपने नाम कर खिताबी शतकवीर बन चुके हैं। हाल ही में फेडरर ने दुबई ओपन टेनिस टूर्नामेंट में जब यूनान के स्टीफानोस सितसिपास को हराकर सबसे ज्यादा आठवीं बार दुबई ओपन का खिताब जीता तो उनके नाम एक रेकॉर्ड दर्ज हो गया। यह है अपने करअिर में खिताबों का शतक पूरा करने का।

फेडरर आज भले ही अपने जीवन के 37वें वसंत में चल रहे हों, लेकिन 100वां खिताब जीतकर उन्होंने दिखला दिया है कि टेनिस के मैदान में इनकी जीत की भूख आज भी कम नहीं हुई है। इस उम्र में भी वे आज की युवा पीढ़ी को नाको चने चबाकर गाहे-बगाहे उनके हाथ से अपने तेज-तर्रार सर्विस व अनुभवी रिटर्न के सहारे जीत छीन लेने का कोई अवसर जाने नहीं देते हैं। इसका सीधा सा कारण है उनका दमखम और चुस्ती-फुर्ती के साथ शांत व सौम्य स्वभाव। इसके लिए फेडरर फुटबॉल, बैडमिंटन व बॉस्केटबाल खेल के साथ मेडिटेशन व भरपूर नींद पर बहुत ध्यान देते हैं। स्विटजरलैंड के बासेल शहर में 8 अगस्त 1981 को पैदा हुए रोजर फेडरर आज जिस मुकाम पर हैं उसकी शुरुआत 30 साल पहले हो चुकी थी जब उनमें छह साल की उम्र में टेनिस खेल के प्रति दीवानगी पैदा हो गई थी। लगभग दो दशक में फेडरर ने अपने से कहीं ज्यादा युवा खिलाड़ियों के तेज-तर्रार खेल के बीच अपने को बनाए रखा है।

फेडरर के लिए फरवरी 2004 से अगस्त 2008 की अवधि बेहद शानदार रही जब वे लगातार 237 सप्ताह नंबर वन की कुर्सी पर कायम रहे। लेकिन उनके लिए खराब समय भी आया जब जुलाई 2012 से जनवरी 2016 की अवधि में एक भी ग्रैंड स्लेम नहीं जीत पाए। 2016 में जब उनके घुटनों की सर्जर्री हुई तब सभी ने मान लिया कि अब फेडरर का करिअर समाप्त हो गया है। लेकिन टेनिस को ही अपना सबकुछ समझने वाले फेडरर ने हार नहीं मानी। मैदान और बाहर अपने को टेनिस में मिल रही हार को भी सकारात्मक लेते हुए जीत के लिए संघर्ष जारी रखा। आखिर एक बार फिर से जीत का स्वाद आस्ट्रेलियाई ओपन 2017 में मिल ही गया। इसी साल विंबलडन का खिताब भी अपनी झोली में डाला। जनवरी 2018 में रैंकिंग में एक बारी फिर नंबर वन बन सबसे ज्यादा उम्र में नंबर वन बनने का रेकॉर्ड अपने नाम कर आंद्रे अगासी से यह उपलब्धि छीन ली।

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