Sarkari Naukri: From salary to target, here are 5 myths about govt jobs in India - टार्गेट नहीं, तय काम के घंटे और मोटी सैलरी! सरकारी नौकरी के बारे में झूठे हैं ये 5 मिथक - Jansatta
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टार्गेट नहीं, तय काम के घंटे और मोटी सैलरी! सरकारी नौकरी के बारे में झूठे हैं ये 5 मिथक

आम जनमानस के बीच सरकारी नौकरी को लेकर कुछ बातें बड़ी आम हैं, जैसे कि सरकारी नौकरी का मतलब है सुकून की नौकरी। जानकार मानते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में सरकारी नौकरी को लेकर मानी जाने वाली कुछ बातें वर्तमान में सिवाय मिथक के कुछ नहीं हैं।

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (Image Source: pixabay)

आम जनमानस के बीच सरकारी नौकरी को लेकर कुछ बातें बड़ी आम हैं, जैसे कि सरकारी नौकरी का मतलब है सुकून की नौकरी। जानकार मानते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में सरकारी नौकरी को लेकर मानी जाने वाली कुछ बातें वर्तमान में सिवाय मिथक के कुछ नहीं हैं। Onlinetyari.com सह-संस्थापक और सीओओ राजवीर मीणा ने सरकारी नौकरी को लेकर बड़े पैमाने पर फैले 5 मिथकों के बारे में बताया है। 1. कोई टार्गेट नहीं: यह सुना जाना आम है कि सरकारी नौकरी में कोई टारगेट नहीं होता है। यह समाज फैले मिथक के अलावा कुछ नहीं है। सरकारी नौकरी में भी टारगेट पूरा करना होता है। खासकर ऊचे पदों पर काम करने वालों को करियर में आगे बढ़ने के लिए टारगेट पूरा करना होता है। बैंकों में कुछ शीर्ष कैडर की नौकरियों में नियमित रूप से व्यक्तिगत टारगेट होते हैं। इसी प्रकार शिक्षण संस्थानों में प्रोफेसर्स को करियर में आगे बढ़ने के लिए परफॉर्मेंस बेस्ड अप्रेजल सिस्टम (पीबीएएस) से गुजरना होता है।

2. काम के निर्धारित घंटे: सरकारी नौकरी में निर्धारित घंटे ही काम करना होता है यह भी एक मिथक है। आज के हालात बदल गए हैं। हाईकैडर के सरकारी कर्मचारियों को प्राइवेट नौकरी वालों की तरह निर्धारित घंटों से भी ज्यादा काम करना पड़ता है। 3. बड़े पे-चैक और फायदे: सरकारी नौकरी में शुरुआत तो अच्छी सैलरी से हो जाती है और एक जैसा काम करते रहने कर्मचारी कंफर्ट जोन भी बना लेता है लेकिन यह कंफर्ट जोन कर्मचारियों को असाधारण उपलब्धियों को हासिल करने से रोकता है। इस प्रकार वे प्राइवेट कर्मचारियों के मुकाबले अतिरिक्त पे-चेक जैसे फायदों से वंचित रह जाते हैं। वहीं प्राइवेट सेक्टर में असाधारण प्रतिभाओं के लिए छूने को आसमान है।

4. एक बार नौकरी लगी तो कोई निकाल नहीं सकता: यह भी एक मिथक है। प्राइवेट कंपनियों की तरह सरकारी नौकरियों में भी कर्मचारियों को सस्पेंड या नौकरी से निकाला जाता है अगर वे इकाई को धोखा देते पाए जाते है और दोषी साबित होते हैं। अगर ऐसा होता है तो उनके करियर पर बदनुमा दाग लग जाता है। 5. कोई गंभीर बात नहीं: यह मिथक है कि सरकारी नौकरी वाले गंभीरता से काम नहीं करते हैं और वे अपने काम के घंटों और बैठकों के दौरान मजे करते हैं। जवाब है कि अगर ऐसा है तो देश आगे कैसे बढ़ रहा है?

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