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ड्रग्स ने तबाह कर दी थी जिंदगी लेकिन एक आइडिया से खड़ी कर दी अरबों की कंपनी, पढ़ें ‘पिलो किंग’ की कामयाबी की कहानी

माइक लिंडेल को न सिर्फ अमेरिका बल्कि सारी दुनिया में पिलो किंग के नाम से जाना जाता है।

द पिलो किंग माइक लिंडेल (Photo Source: Facebook/Crowdfunding PR Campaigns)

माइक लिंडेल को न सिर्फ अमेरिका बल्कि सारी दुनिया में पिलो किंग के नाम से जाना जाता है। ‘MyPillow’ के सीओई की कहानी जानकर आप न सिर्फ हैरान रह जाएंगे, बल्कि यह भी समझेंगे कि कैसे आप संघर्षकर अपने सपनों को हकीकत में बदल सकते हैं और कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ सकते हैं। लिंडेल के लिए सक्सेस हासिल करना आसान नहीं था। आप यह जानकर दंग रह जाएंगे कि वह एक ड्रग एडिक्ट थे। सीएनबीसी को दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, “कोई क्रैक(एक प्रकार की ड्रग) एडिक्ट कामयाब शख्सियत नहीं बनता, लेकिन मैं बन गया।”

माइक लिंडेल के माईपिलो बनाने की कहानी शुरू होती है साल 2004 से और यह काम उन्होंने एक ड्रग एडिक्ट रहते हुए ही शुरू किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ड्रग्स को वह हमेशा के लिए अलविदा कह चुके हैं। साल 2009 में उन्होंने ड्रग्स की लत से पीछा छुड़ाया। बहरहाल, बात करते हैं माइक की सक्सेस स्टोरी की। माइक एक कॉलेज ड्रॉपआउट हैं। 1979 में वह यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा से पढ़ाई तो कर रहे थे लेकिन उन्होंने सिर्फ एक क्वॉटर तक ही कॉलेज अटेंड किया। पढ़ाई के साथ वह दो जॉब्स भी कर रहे थे। इस दौरान यूनिवर्सिटी की पढ़ाई उन्हें टाईम वेस्ट लगी। माइक ने पढ़ाई छोड़ दी लेकिन जॉब करते रहे।

नौकरी से निकाले गए
माइक एक ग्रॉसरी स्टोर पर भी नौकरी कर चुके हैं, जहां से उन्हें निकाल दिया गया था। किसी बात को लेकर स्टोर के मैनेजर से उनकी कहा सुनी हो गई थी। लेकिन नौकरी से निकाले जाने वाले अनुभव को लेकर भी माइक काफी पॉजिटिव सोच रखते हैं। उनका विश्वास है कि उस मैनेजर ने ही उनके अंदर एक कामयाब बिजनेसमैन बनने की आग भड़काई। माइक कहते हैं कि मैनेजर ने मुझसे कहा था कि अगर तुम्हें यह जगह पसंद नहीं तो तुम अपनी ही एक कंपनी बना लेनी चाहिए।

कई बार हुए फेल
माइक ने अपने जीवन में कई नौकरियां की। उन्होंने 80 के दशक में कार्पेट क्लीनिंग का बिजनेस से शुरू किया। इसके बाद लास वेगास में उन्होंने प्रोफेशनल कार्ड काउंटर की नौकरी की। इसके बाद उन्होंने सुअर पालन का काम भी काम किया और आखिर में खाने का वैगन/स्टॉल भी लगाया। इन सब कामों के अलावा लिंडेल बार टेंडर भी रह चुके हैं।

सपने से मिला बिजनेस
माइक लिंडेल को सोने में परेशानी होती थी। इसकी वजह उनका तकिया था। तकिया आरामदायक नहीं होने की वजह से उनकी नींद पूरी नहीं होती थी। एक रात सोते वक्त अचानक उनकी नींद टूटी और उन्होंने अपने घर के हर कोने में ‘मायपिलो’ लिख डाला। यहीं से उनके बिजनेस की शुरुआत हुई। माइक अपने बेटे के साथ इस काम में जुट गए। दोनों मिलकर कई घंटे तक फोम काटते, सिलाई करते और फिर तकियों को टेस्ट करते।

माईपिलो की शुरुआत
पिलो बनाने के बाद उन्होंने इसकी बिक्री शुरू की। बिक्री को बेहतर बनाने के लिए उनके के एक रिश्तेदार ने उन्हें मॉल में इसका डिस्प्ले लगाने की सलाह दी। उनके पिलो की बिक्री शुरू हुई लेकिन काफी वक्त बिक्री धीमी रही। माइक का एक खरीदार मिनेपोलिस में एक लोकल होम शो चलाता था। माइक के मुताबिक, वह उनके पिलो से इतना इंप्रेस हुआ कि उसने माइक को शो में बुलाया। यहीं से माइक की कामयाबी हालिस करने की शुरुआत होती है।

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