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अवसर: फायर इंजीनियरिंग – साहस और सूझबूझ से सुरक्षित बनाने का पेशा

सिविल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, एनवायरनर्मेंटल इंजीनियरिंग जैसे विषयों से तो इसका संबंध होता ही है। आग लगने पर आसपास के लोगों और पीड़ितों के साथ कैसा व्यवहार किया जाए आदि पर भी ध्यान दिया जाता है।

Author June 7, 2018 05:35 am
एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में हर रोज सौ से अधिक आग लगने की घटनाएं सामने आती हैं। राष्ट्रीय राजधानी के साथ देश के छोटे-बड़े शहरों की कमोवेश यही स्थिति है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में हर रोज सौ से अधिक आग लगने की घटनाएं सामने आती हैं। राष्ट्रीय राजधानी के साथ देश के छोटे-बड़े शहरों की कमोवेश यही स्थिति है। फायर इंजीनियरिंग एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें आग लगने के प्रकार, आग बुझाने के तरीके, आग बुझाने के उपकरण, आग में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है। ये एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें आग बुझाने के लिए साहस और सूझबूझ का प्रशिक्षण दिया जाता है। इंजीनियरिंग की बाकी फील्ड की तरह इसमें भी करिअर की अच्छी संभावनाएं हैं। इस क्षेत्र में फायरमैन से लेकर मुख्य अग्निशमन अधिकारी जैसे पदों पर काम किया जा सकता है। देश में अग्नि सुरक्षा बाजार की अनुमानित क्षमता 1150 करोड़ रुपए है और इसमें हर साल 25 फीसद के हिसाब से वृद्धि हो रही है। इसके कारण अग्नि सुरक्षा पेशेवरों की मांग बढ़ रही है।

नौकरी के मौके

फायर इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए नौकरी के अवसर सरकारी और निजी क्षेत्रों में हैं। सरकारी क्षेत्र में स्थानीय निकायों के अग्नि विभाग और बीमा कंपनियों के अलावा रेलवे, सुरक्षा, हवाई अड्डे आदि में उन्हें नियुक्त किया जाता है। औद्योगिकी क्षेत्र में पेट्रोलियम, प्लास्टिक, फर्टिलाइजर, टेक्सटाइल और केमिकल प्लांट्स में भी रोजगार के मौके मौजूद हैं। फायर सर्वेयर या रिस्क मैनेजमेंट कंसल्टेंट के रूप में स्वतंत्र रूप से काम करने का विकल्प भी चुन सकते हैं। विदेशों में भारतीय पेशेवरों की मांग ज्यादा है क्योंकि तेल के कुएं ज्यादा होने के कारण अग्नि दुर्घटनाएं ज्यादा होती हैं। वहीं, विदेशों में फायर इंजीनियर को देश के मुकाबले करीब दोगुने पैकेज पर नियुक्त किया जाता है। यहां शुरुआती पैकेज पांच से छह लाख रुपए सालाना होता है।

फायर इंजीनियर का कार्य

फायर इंजीनियर का कार्य काफी चुनौतीपूर्ण होता है। इसके लिए साहस के साथ-साथ समाज के प्रति प्रतिबद्धता जरूरी है। फायर इंजीनियर की प्रमुख जिम्मेदारी दुर्घटना के समय आग के प्रभाव को खत्म करना या फिर सीमित करना होता है। हर दिन आगजनी की घटनाएं होती रहती हैं। कभी चलती कार में आग लग जाती है, तो कभी बड़े-बड़े मॉल्स व ऊंची-ऊंची इमारतों में। अगर आग अनियंत्रित हो जाए, तो जान-माल को काफी नुकसान होता है। ऐसी स्थिति में फायर इंजीनियरिंग से जुड़े लोगों की जरूरत होती है, जो आग पर काबू करना अच्छी तरह जानते हैं। फायर इंजीनियर औद्योगिक या रिहायशी इलाकों के लिए तंत्र तैयार करता है जिससे अग्नि दुर्घटनाओं का खतरा कम हो। इसके लिए वास्तुकला या डिजाइनिंग की जानकारी होनी चाहिए। इससे संबंधित पाठ्यक्रम करने वाले छात्रों को अधिक पैकेज दिया जाता है और विकास के मौके भी ज्यादा होते हैं।

वेतनमान – फायर इंजीनियरिंग में स्नातक स्तर के पाठ्यक्रम कर चुके छात्रों का शुरुआती सालाना पैकेज दो से तीन लाख रुपए तक होता है। स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम करने वाले छात्रों का शुरुआती वेतन तीन से चार लाख रुपए तक होता है।

उपलब्ध पाठ्यक्रम

  • बीई फायर इंजीनियरिंग
  • बीटेक फायर एंड सेफ्टी इंजीनियरिंग
  • सर्टिफिकेट कोर्स इन फायर एंड सेफ्टी इंजीनियरिंग (सीएफएसई)
  • डिप्लोमा इन फायर एंड इंडस्ट्रियल सेफ्टी इंजीनियरिंग
  • डिप्लोमा इन फायर एंड सेफ्टी इंजीनियरिंग मैनेजमेंट (डीएफएसइएम)
  • डिप्लोमा इन फायर एंड सेफ्टी इंजीनियरिंग
  • डिप्लोमा इन फायर इंजीनियरिंग
  • डिप्लोमा इन इंडस्ट्रियल सेफ्टी इंजीनियरिंग
  • पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन फायर एंड सेफ्टी इंजीनियरिंग

योग्यता

इस कोर्स को करने के लिए रसायन शास्त्र के साथ भौतिकी या गणित विषयों में 50 फीसद अंकों के साथ 12वीं पास होना आवश्यकता है। इन योग्यताओं के साथ कुछ शारीरिक क्षमताएं होना भी जरूरी है। रसायन शास्त्र, भौतिकी और गणित के साथ बीएससी कर चुके छात्र बीई या बीटेक पाठ्यक्रम में प्रवेश ले सकते हैं। अधिकतर संस्थानों में प्रवेश परीक्षा के आधार पर दाखिला मिलता है। केमिकल, सिविल, मैकेनिकल या इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री लेने के बाद फायर इंजीनियरिंग के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में प्रवेश ले सकते हैं।

प्रमुख संस्थान

  • दिल्ली इंस्टीट्यूट ऑफ फायर इंजीनियरिंग, नई दिल्ली
  • भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खड़गपुर
  • राष्ट्रीय अग्निशमन सेवा महाविद्यालय, पालम रोड, नागपुर
  • कॉलेज ऑफ फायर टेक्नोलॉजी, अहमदाबाद
  • इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फायर इंजीनियरिंग सेफ्टी एंड सिक्योरिटी मैनेजमेंट, पुणे
  • गवनर्मेंट इंजीनियरिंग कॉलेज, जम्मू
  • कॉलेज ऑफ फायर इंजीनियरिंग एंड सेफ्टी मैनेजमेंट, फरीदाबाद

क्या है फायर इंजीनियरिंग

सिविल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, एनवायरनर्मेंटल इंजीनियरिंग जैसे विषयों से तो इसका संबंध होता ही है। आग लगने पर आसपास के लोगों और पीड़ितों के साथ कैसा व्यवहार किया जाए आदि पर भी ध्यान दिया जाता है। इसके अलावा कई सारी तकनीकी चीजें सिखाई जाती हैं, जैसे आग बुझाने के यंत्रों की तकनीकी जानकारी, स्प्रिंक्लर सिस्टम, अलार्म, कम समय में सीमित संसाधनों के साथ ज्यादा सुरक्षा और पानी की बौछार का सही इस्तेमाल करना। इसमें अग्निसुरक्षा के विभिन्न तरीकों का इस्तेमाल, अग्निशमन के आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल और उसके रखरखाव की तकनीक में सुधार करना भी अग्निशमन कर्मी की जिम्मेदारी होती है।

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