ताज़ा खबर
 

अवसर: इतिहास में करें भविष्य की खोज

पुरातत्त्व विज्ञान काफी व्यापक विषय है। इसके तहत प्राचीन मानव संस्कृति को खंगाला जाता है। पुरातत्त्व विज्ञान ऐतिहासिक खोज की वह शाखा है, जो विशुद्घ रूप से वैज्ञानिक है।

Author July 5, 2018 6:10 AM
आर्कियोलॉजी एक बेहतर करिअर विकल्प साबित हो सकता है। इस क्षेत्र के माध्यम से आप लोगों को खत्म हो चुकी सभ्यताओं के बारे में बता सकते हैं।

इतिहासकार इएच कार कहते हैं कि इतिहास अतीत से लेकर वर्तमान के बीच का निरंतर संवाद है। अतीत से वर्तमान के इसी संवाद का शोध आपको इतिहासकार बनाता है। इतिहास एक वैसा विषय है जो अपनी समझ के लिए बेहतर वैज्ञानिक दृष्टिकोण मांगता है। इतिहास को पढ़ना मानव जाति को पढ़ना है। इतिहास पढ़ने के साथ आप एक पूरी वैज्ञानिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक समझ से लैस होते हैं। इतिहास एक वृहद् विषय है और इसकी कई शाखाएं हैं। इसकी सबसे रोचक शाखा है पुरातत्त्व विज्ञान यानी आर्कियोलॉजी का क्षेत्र।

आर्कियोलॉजी एक बेहतर करिअर विकल्प साबित हो सकता है। इस क्षेत्र के माध्यम से आप लोगों को खत्म हो चुकी सभ्यताओं के बारे में बता सकते हैं। एक पुरातत्त्वविद को ऐतिहासिक स्थानों की पहचान करनी होती है। साथ ही ऐतिहासिक या प्राचीन स्थलों की खुदाई करके वहां से मिले अवशेषों के आधार पर प्राचीन सभ्यता और संस्कृति से जुड़े तथ्यों और जानकारियों को दुनिया के सामने प्रस्तुत करना होता है। इसमें शोध बहुत जरूरी होता है।

HOT DEALS
  • Apple iPhone 6 32 GB Gold
    ₹ 25900 MRP ₹ 29500 -12%
    ₹3750 Cashback
  • Lenovo K8 Plus 32GB Venom Black
    ₹ 9597 MRP ₹ 10999 -13%
    ₹480 Cashback

क्या है पुरातत्त्व विज्ञान

पुरातत्त्व विज्ञान काफी व्यापक विषय है। इसके तहत प्राचीन मानव संस्कृति को खंगाला जाता है। पुरातत्त्व विज्ञान ऐतिहासिक खोज की वह शाखा है, जो विशुद्घ रूप से वैज्ञानिक है। इसमें प्राचीन चीजों और अवशेषों जैसे प्राचीन सिक्के, बर्तन, किताबें, शिलालेख, धार्मिक स्थल और हर प्रकार के प्राचीन अवशेष, मिट्टी के नीचे दबे शहरों के खंडहर या फिर पुरानी इमारतें, किले और वस्तुओं आदि का अध्ययन किया जाता है। पुरातत्त्व विज्ञान में इमारतों, आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स, साहित्य और प्राकृतिक चीजों के संरक्षण एवं प्रबंधन का कार्य भी करना होता है। इसके तहत न केवल इन चीजों का ज्ञान रखता है, बल्कि उनकी खोजबीन भी करता है।

पाठ्यक्रम के लिए योग्यता

पुरातत्त्व विज्ञान में इसमें कई तरह के पाठ्यक्रम मौजूद हैं। स्नातक करने के लिए बारहवीं कक्षा में इतिहास की पढ़ाई और उसमें पास होना आवश्यक है। पुरातत्त्व विज्ञान में स्नातक के बाद पोस्ट ग्रेजुएट या पीजी डिप्लोमा पाठयक्रम में प्रवेश मिलता है। इसके बाद एमफिल अथवा पीएचडी की राह आसान हो जाती है। पुरातत्त्व विज्ञान का पाठ्यक्रम उन लोगों के लिए है, जिनकी रुचि पुरानी सभ्यता और इतिहास जानने में है। इतिहास का अच्छा ज्ञान, चुनौतियों से निपटने के लिए अच्छी विश्लेषणात्मक क्षमता, तार्किक सोच, कला की समझ, कार्य के प्रति समर्पण, पढ़ने और नई जानकारियां रखने की आदत जैसे महत्वपूर्ण गुण जरूर होने चाहिए। इसके अलावा प्राचीन इतिहास, भूगोल, सांस्कृतिक समाजशास्त्र और पर्यावरण विज्ञान की अच्छी जानकारी भी आवश्यक है।

पुरातत्त्व विज्ञान में इसमें कई तरह के पाठ्यक्रम मौजूद हैं। स्नातक करने के लिए बारहवीं कक्षा में इतिहास की पढ़ाई और उसमें पास होना आवश्यक है।

प्रमुख पाठ्यक्रम

बीए इन आर्कियोलॉजी
बीएससी इन आर्कियोलॉजी
एमए इन आर्कियोलॉजी
एमएससी इन आर्कियोलॉजी
एमफिल इन आर्कियोलॉजी
पीएचडी इन आर्कियोलॉजी
डिप्लोमा इन आर्कियोलॉजी

इन स्थानों पर मिलेंगे अवसर

पुरातत्त्वविद का करिअर ग्राफ पूरी तरह उसकी शिक्षा और अनुभव पर निर्भर करता है, इसीलिए इस क्षेत्र में पीएचडी करने वाले उम्मीदवारों की बहुत मांग रहती है। किसी भी पुरातत्त्वविद के लिए नौकरी के विभिन्न स्तरों पर अवसर मौजूद होते हैं। पुरातत्त्वविदों के लिए भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (एएसआइ) में सबसे ज्यादा संभावनाएं होती हैं। एएसआइ केंद्र और राज्य, दोनों स्तरों पर काम करता है। पुरातत्त्व विज्ञान में स्नातकोत्तर करने के बाद विश्वविद्यालय में शिक्षक भी बना जा सकता है। भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद (आइसीएचआर), इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (इंटेक), राष्ट्रीय अभिलेखागार में पुरातत्त्वविदों के लिए काफी कुछ करने के लिए है। पुरातत्त्व विज्ञान के क्षेत्र में काम कर रहे गैर सरकारी संगठनों और कई विदेशी विश्वविद्यालयों में भी पुरातत्त्वविदों की मांग रहती है। इनके अलावा राष्ट्रीय पार्क, संग्राहालय और राज्यों की इतिहास सोसायटी में भी रोजगार के अच्छे अवसर होते हैं।

मुख्य शाखाएं

न्यूमिस्मैटिक्स (मुद्राशास्त्र), एपिग्राफी (पुरालेख विद्या), आर्काइव्स (अभिलेखागार) और म्यूजियोलॉजी (म्यूजियम के रखरखाव से संबंधित) पुरातत्त्व विज्ञान की मुख्य शाखाएं हैं। इसके अंतर्गत पांडुलिपि, जीवाश्म, अभिलेख और सिक्कों के बारे में विस्तार से पढ़ाया जाता है।

वेतनमान

हर क्षेत्र की तरह इस क्षेत्र में भी शिक्षा और अनुभव के आधार पर ही वेतन तय होता है। स्नातक पाठ्यक्रम करने के बाद शुरुआती तौर पर 15 हजार रुपए वेतन मिलता है जिसमें अनुभव के आधार पर वृद्धि होती है। महानिदेश पद पर अच्छा वेतन मिलता है। विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पढ़ाने लोगों को सरकार की ओर से तय वेतनमान मिलता है।

प्रमुख संस्थान

इंस्टीट्यूट ऑफ आर्कियोलॉजी , दिल्ली
डीआइएचआरएम, दिल्ली
पटना विश्वविद्यालय, पटना, बिहार
पंजाब विश्वविद्यालय, पंजाब
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र
आंध्र विश्वविद्यालय, विशाखापट्टनम
मद्रास विश्वविद्यालय, चेन्नई
हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय

पुरातत्त्वविदों को इन पदों पर मिलती है नौकरी

पुरातत्त्व प्रशिक्षक, ऑनलाइन सर्च विशेषज्ञ, पुरातत्त्व विज्ञान प्रयोगशाला सहायक, पुरातत्त्व विज्ञान निदेशक, कॉन्ट्रेक्ट आर्कियोलॉजिस्ट, हेरिटेज कंजरवेटर्स, रिसर्च असिस्टेंट, क्यूरेटर इन म्यूजियम, रिसर्च आर्कियोलॉजिस्ट, हेरिटेज मैनेजर, कल्चरल रिसोर्स स्पेशलिस्ट, शिक्षक आदि पदों पर विभिन्न संस्थानों और विश्वविद्यालयों नौकरी के अवसर मिलते हैं।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App