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आज की बात: दफ्तर में हो जिंदगी का बिंदास सफर

बंगलुरु की एक आइटी कंपनी में काम करने वाली अंबिका नंदिनी का कहना है लड़कियों के लिए नौकरी करना बहुत आसान नहीं है। एक तो लड़की होने के नाते कई कंपनी आपको जल्दी नौकरी नहीं देतीं। दूसरा जिन लड़कियों को नौकरी मिल भी जाती है तो उन्हें शारीरिक शोषण का भी सामना करना पड़ता है।

Author Published on: January 31, 2019 6:54 AM
तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (Image Source: pixabay)

मीना

कामकाजी महिलाओं को कई भूमिकाओं का निर्वाह करना पड़ता है। ऐसे में उनकी जिंदगी की खुशहाली उनके कार्यस्थल से जुड़ी रहती है। अगर कार्यस्थल पर माहौल हल्का-फुल्का, मजाकिया और पारिवारिक होगा तो महिलाएं अपने कार्य में बेहतर प्रदर्शन कर पाती हैं। अगर संस्था महिलाओं के लिए दोस्ताना है तो उनकी जिंदगी निखर सकती है। और अगर ऐसा नहीं है तो जिंदगी बिखर भी सकती है।

दिल्ली की एक मार्केटिंग कंपनी में काम करने वाली ज्योति तोमर का कहना है कि हमारे जीवन में नया बदलाव लाने में हमारी कंपनी की बहुत बड़ी भूमिका होती है। इसलिए कोई भी लड़की जो नौकरी की तलाश में है उसे ऐसी नौकरी ढूंढ़नी चाहिए जहां संस्था महिलाओं के प्रति संवेदनशील हों। ज्योति का कहना है कि अक्सर लड़कियां मार्केटिंग फील्ड में नौकरी नहीं करती हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि इस फील्ड में तनाव बहुत है, लेकिन मेरा मानना है कि आप जो भी नौकरी करना चाहती हैं उसे करें पर घर में नहीं बैठें। घर में बैठने से आप कुएं के मेढक की तरह ही रह जाएंगी। जिंदगी को बदलने में और खुद के सपनों को पाने के लिए जरूरी है कि घर के बाहर काम किया जाए।

बंगलुरु की एक आइटी कंपनी में काम करने वाली अंबिका नंदिनी का कहना है लड़कियों के लिए नौकरी करना बहुत आसान नहीं है। एक तो लड़की होने के नाते कई कंपनी आपको जल्दी नौकरी नहीं देतीं। दूसरा जिन लड़कियों को नौकरी मिल भी जाती है तो उन्हें शारीरिक शोषण का भी सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि जिस कंपनी में वो काम करती हैं वहां के पुरुष कर्मचारी बहुत रूढ़िवादी सोच के हैं। वहं हम लड़कियां खुलकर अपनी बात नहीं रख पाते। उन्होंने कहा कि अगर लड़कियों को खुलकर जिंदगी को जीना है तो इस तरह की रूढ़ियों को तोड़ना होगा।

महिलाएं आखिर कैसा दफ्तर चाहती हैं? उनकी किसी कार्यालय से क्या उम्मीद रहती है? इन्हीं सवालों का जवाब देता है ‘कूल कन्या’। ‘कूल कन्या’ एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जहां महिलाओं को उनके पसंद की नौकरी दिलाने का प्रयास किया जाएगा। इसके अलावा यहां महिलाओं को करिअर से संबंधित किसी भी समस्या का हल मिलेगा। ‘कूल कन्या’ को शुरू करने वाली मुंबई की 25 साल की वंशिका गोयनका का कहना है कि एक औरत जवान, बुजुर्ग, तलाकशुदा, मां आदि कोई भी हो सकती है। इन सभी को करिअर को लेकर अपने-अपने तरह की समस्याएं आती हैं। सभी महिलाओं की करिअर संबंधी समस्या को दूर करने के लिए हमने ‘कूल कन्या’ की शुरुआत की है। यह प्लेटफॉर्म अप्रैल में शुरू होगा। वंशिका का कहना है किसी भी महिला को कामयाबी तभी मिल सकती है जब उसकी निजी और प्रोफेशनल जिंदगी अच्छी चल रही हो।

वंशिका का कहना है कि आजकल कारपोरेट कंपनियों में माहौल ऐसा रहता है कि महिलाएं तनाव, अवसाद आदि में चली जाती हैं यही नहीं खुदकुशी भी कर लेती हैं। महिलाओं को कार्यस्थल पर कौन सी समस्याएं आती हैं यह जानने के लिए ‘कूल कन्या’ एक सर्वे कर रहा जिसका परिणाम 31 जनवरी को आएगा। कूल कन्या एक और सर्वे कर रहा है जिसमें ऐसी महिलाओं को शामिल किया गया है जिन महिलाओं ने अपनी जिंदगी में कुछ हासिल किया हो। जो महिलाएं अपने काम की जगह से खुश नहीं हैं या उन्हें काम को लेकर किसी और तरह की समस्या आ रही है। उन महिलाओं की कूल कन्या ऐसी महिलाओं से बात कराएगा जिन्होंने उनकी जैसी ही परेशानी झेली हो। वंशिका का कहना है कि ‘कूल कन्या’ ऐसी महिलाओं को नौकरी भी मुहैया कराएगा।

अक्सर लड़कियां अपने करिअर का लुत्फ इसलिए नहीं उठा पाती हैं क्योंकि उनके मन में हमेशा एक शंका रहती है कि उन्हें शादी के बाद तो नौकरी छोड़नी ही पड़ेगी। मध्य प्रदेश की स्वाति ने 34 साल की उम्र में शादी की। प्रदान संस्था में एग्जीक्यूटिव (प्रोजेक्ट) के पद पर काम करते हुए उन्हें छह साल हो गए हैं। उनका कहना है कि करिअर में शादी कभी रुकावट नहीं बनेगी अगर आपका साथी जैसा आप चाहते हैं वैसा हो। स्वाति बताती हैं कि उनकी शादी गाजियाबाद में हुई लेकिन अपनी नौकरी की वजह से वहां नहीं जा पार्इं। अब उनके पति उनसे मिलने मध्य प्रदेश आते हैं। स्वाति का कहना है कि किसी भी कामकाजी महिला के लिए घर और दफ्तर के बीच संतुलन बनाए रखना बहुत मुश्किल होता है लेकिन अगर दफ्तर और साथी दोनों सहयोग करें तो महिलाएं बहुत ऊंची उड़ान भर सकती हैं। स्वाति का कहना है कि किसी भी संस्था को आप अपने अनुकूल तभी बना सकती हैं जब ‘मैं’ की भावना छोड़कर ‘हम’ में विश्वास करें। स्वाति का मानना है कि जब हम खुलकर बात करेंगे तभी अधिक से अधिक महिलाएं अपनी परेशानियां बता पाएंगी और विभिन्न संस्थाएं उनके लिए दोस्ताना माहौल तैयार कर पाएंगी।

वंशिका ने बताया कि हर लड़की किसी ना किसी संघर्ष को पार करके बाहर निकलती है इसलिए वो खुद में कूल कन्या है। और यही वजह है कि हमने इस प्लेटफॉर्म का नाम ‘कूल कन्या’ रखा। उन्होंने बताया कि महिलाओं के पास पुरुषों से ज्यादा जिम्मेदारियां होती हैं जिस वजह से वे अपने दफ्तर में पूरा सौ फीसद नहीं दे पाती हैं। उनकी परेशानियों को समझने और उन्हें एक नई दिशा देने के लिए हमने यह शुरुआत की। इसके जरिए आधी दुनिया कही जाने वाली आबादी को खुशहाल जिंदगी का मंच मुहैया कराना ही मकसद है। ताकि एक बेहतर कल की कल्पना की जा सके। ज्यादा से ज्यादा महिलाएं घर की दहलीज को लांघकर नौकरी करने के लिए निकलें। तभी वे अपने मुताबिक दुनिया बना पाएंगी।

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