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अवसर: सिविल अभियांत्रिकी से करें करिअर का निर्माण

सिविल अभियांत्रिकी सबसे पुरानी अभियांत्रिकी शाखा है। देश में जितनी तेजी से ढांचागत निर्माण हो रहा है, उतनी ही तेजी से सिविल अभियंताओं की भी मांग बढ़ रही है।

Author August 2, 2018 5:52 AM
वर्तमान में अनुभवी सिविल अभियंताओं की भारी मांग है और रोजगार की बहुत संभावनाएं हैं।

सिविल अभियांत्रिकी सबसे पुरानी अभियांत्रिकी शाखा है। देश में जितनी तेजी से ढांचागत निर्माण हो रहा है, उतनी ही तेजी से सिविल अभियंताओं की भी मांग बढ़ रही है। वर्तमान में अनुभवी सिविल अभियंताओं की भारी मांग है और रोजगार की बहुत संभावनाएं हैं। सिविल अभियंता सड़कों, हवाई अड्डों, सुरंगों, पुलों, जल आपूर्ति एवं सीवेज तंत्र, बंदरगाह, रेलमार्ग प्रणाली, बिजली आपूर्ति प्रणाली, भवन और यहां तक की परमाणु ऊर्जा संयंत्र की योजना बनाने और निर्माण का कार्य करते हैं। इतना ही नहीं स्थानीय, राज्य और केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में इनकी नियुक्ति होती है। इस समय सिविल अभियंता केंद्र तथा राज्य सरकारों की महत्त्वपूर्ण निर्माण परियोजनाओं में कार्यरत हैं।

सिविल अभियंता का काम

सिविल अभियंता लोक निर्माण परियोजनाओं पर कार्य करते हैं। इनका कार्यक्षेत्र किसी भी प्रोजेक्ट की योजना और डिजाइनिंग, निर्माण और रखरखाव तक सीमित होता है। उसके लिए उनके पास न केवल उच्चस्तरीय ज्ञान का होना आवश्यक है, बल्कि प्रशासन कौशल भी होना जरूरी है। जब भी कोई योजना बनती है तो उसके लिए पहले योजना, डिजाइनिंग और संरचनात्मक कार्यों से लेकर शोध एवं हल तैयार करने का कार्य किया जाता है। यह कार्य किसी सामान्य व्यक्ति से न कराकर पेशेवर लोगों से ही कराया जाता है।

डिप्लोमा से स्नातकोत्तर तक पाठ्यक्रम

सिविल अभियांत्रिकी के क्षेत्र में जाने के लिए आइटीआइ या पॉलिटेक्निक से डिप्लोमा किया जा सकता है। इसके अलावा भौतिक शास्त्र, रसायन शास्त्र और गणित से 12वीं कक्षा पास करने के बाद सिविल अभियांत्रिकी में बीटेक या बीई कर सकते हैं। इसके लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) मुख्य देनी होगी। यदि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में दाखिला लेने है तो इस परीक्षा के बाद जेईई एडवांस्ड परीक्षा में बेहतर रैंक लानी होगी। बीई या बीटेक करने के बाद स्नातकोत्तर की डिग्री भी हासिल की जा सकती है, जिसे करने के बाद शोध और शिक्षण के क्षेत्र में जाया जा सकता है। वहीं, कारोबार के क्षेत्र में जाने के लिए अतिरिक्त डिग्री की जरूरत है। डिप्लोमा करने वाले विद्यार्थी भी बाद में स्नातक पाठ्यक्रम में दाखिला ले सकते हैं।

इन बातों की जानकारी आवश्यक

  • नक्शे, सर्वे रिपोर्ट और अन्य योजनाओं का विश्लेषण करना, निर्माण लागत के बारे में जानकारी होना
  • निर्माण में लगने वाली सामग्री, उपकरणों और मजदूरी की अनुमानित लागत बताना, सरकारी नियमों की गहराई से जानकारी होना
  • पर्यावरण को किसी तरह का नुकसान तो नहीं होगा, इसके बारे में पता होना
  • निर्माण करने में लगने वाला कंक्रीट, स्टील जैसी अन्य सामग्रियों की जांच करना

वेतनमान

सिविल अभियंता का वेतनमान कई चीजों पर निर्भर करता है जिनमें शैक्षणिक योग्यता, नियोक्ता, उद्योग, काम का स्थान आदि शामिल हैं। सिविल अभियांत्रिकी में डिप्लोमा करने वाले उम्मीदवारों को शुरुआती तौर पर 15 हजार रुपए महीने मिल जाते हैं। अनुभव के साथ इसमें बढ़ोतरी होती है। अच्छे अनुभव के बाद सिविल अभियंताओं का वेतन छह अंकों में भी पहुंच जाता है।

इस रूप में कर सकते हैं काम

’ सिविल अभियंता
’निर्माण प्लांट अभियंता
’ टेक्नीशियन
’ योजना अभियंता
’ निर्माण प्रोजेक्ट अभियंता
’ सहायक अभियंता
’ कार्यकारी अभियंता
’ पर्यवेक्षक
’ प्रोजेक्ट सह संयोजक
’साइट/ प्रोजेक्ट अभियंता

प्रमुख संस्थान

’भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, नई दिल्ली
’बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, रांची
’दिल्ली प्रौद्योगिकी संस्थान, नई दिल्ली
’भारतीय विज्ञान संस्थान, बंगलुरु
’राष्ट्रीय निर्माण प्रबंधन एवं शोध संस्थान

सिविल इंजीनियरिंग में नौकरी के अवसर

सिविल अभियांत्रिकी पेशेवरों की मांग हमेशा बनी रहती है। इसके पाठ्यक्रम करने वालों के सामने नौकरी की समस्या नहीं होती है। उम्मीदवारों को सरकारी संस्थानों, निजी और सार्वजनिक क्षेत्र उद्योगों में रोजगार मिल जाता है। शोध या शिक्षण में दिलचस्पी रखने वालों के लिए भी कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर भरपूर मौके हैं। बीटेक करने के बाद उम्मीदवार के पास रोड प्रोजेक्ट, भवन निर्माण, परामर्श फर्म, हाउसिंग सोसाइटी और प्रयोगशालाओं में नौकरी के अवसर मौजूद हैं। किसी भी प्रमुख निर्माण योजना के लिए राज्य और केंद्र सरकार की ओर से सिविल अभियांत्रिकी पेशेवरों की नियुक्ति की जाती है। इसके अलावा उम्मीदवार अपनी परामर्श सेवा भी शुरू कर कर सकता है।

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