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डेरी तकनीक में शानदार भविष्य

आज भारत को दुनिया में अलग पहचान दिलाने में को-ऑपरेटिव सोसायटियों ने अपना अहम योगदान दिया है। दूध के उत्पाद बनाने वालीं इन को-ऑपरेटिव सोसायटियों में डेरी तकनीक के विशेषज्ञों की मांग बढ़ी है।

बीई या बीटेक की डिग्री आवश्यक है।

सुशील राघव

देश में दूध और दूध के उत्पादों की बढ़ती मांग ने दूध प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) को डेरी क्षेत्र का महत्त्वपूर्ण भाग बना दिया है। किसी भी दूध के उत्पाद को अधिक से अधिक दिनों तक सुरक्षित रखने के लिए डेरी विशेषज्ञों की मांग भी बहुत तेजी से बढ़ रही है। आजादी के बाद डेरी विकास की योजना भारत में सबसे सफल विकास कार्यक्रमों में से एक रही है। आज भारत को दुनिया में अलग पहचान दिलाने में को-ऑपरेटिव सोसायटियों ने अपना अहम योगदान दिया है। दूध के उत्पाद बनाने वालीं इन को-ऑपरेटिव सोसायटियों में डेरी तकनीक के विशेषज्ञों की मांग बढ़ी है।

योग्यता

डेरी तकनीक में स्नातक या डिप्लोमा पाठ्यक्रम करने के लिए विज्ञान विषयों खासकर जीवविज्ञान के साथ 12वीं पास होना जरूरी है। बारहवीं का अंक फीसद भी इसमें मायने रखता है। डेरी तकनीक के पाठ्यक्रम संचालित करने वाले अधिकांश संस्थान प्रवेश परीक्षा के जरिए दाखिले करते हैं। सरकारी संस्थानों के लिए इंडियन काउंसिल आॅफ एग्रीकल्चरल रिसर्च एक केंद्रीय प्रवेश परीक्षा-आॅल इंडिया एंट्रेंस एग्जामिनेशन फॉर एडमिशन टू बैचलर प्रोग्राम इन एग्रीकल्चर एंड एलायड साइंस सब्जेक्ट आयोजित करता है। डेरी तकनीक के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए संबंधित विषय में बीई या बीटेक की डिग्री आवश्यक है।

पाठ्यक्रम

बीई या बीटेक इन डेरी तकनीक
मास्टर ऑफ तकनीक इन डेरी तकनीक
डिप्लोमा इन डेरी तकनीक
एमटेक डेरी तकनीक
एडवांस्ड डिप्लोमा इन डेरी साइंस एंड तकनीक
मास्टर ऑफ तकनीक इन डेरी केमिस्ट्री
मास्टर ऑफ तकनीक इन डेरी माइक्रोबायोलॉजी
डिप्लोमा इन फूड एंड डेरी तकनीक
पीएचडी इन डेरी तकनीक

इन पदों पर मिलेगा काम

डेरी टेक्नोलॉजिस्ट
डेरी मेडिकल आॅफिसर
डेरी वैज्ञानिक
इंडस्ट्री सुपरवाइजर
माइक्रो-बायोलॉजिस्ट
न्यूट्रिशनिस्ट

विज्ञान की जानकारी आवश्यक

इस क्षेत्र में करिअर बनाने वालों के लिए विज्ञान विषयों की जानकारी आवश्यक है। यहां नई चीजों को जानने की ललक का होना जरूरी है। दूध का ज्यादातर काम गुजरात, राजस्थान और पंजाब के इलाकों में होता है, इसलिए डेरी तकनीक के पेशेवरों को देश के दूर-दराज हिस्सों में काम करना पड़ता है।

संस्थान

राष्ट्रीय डेरी शोध संस्थान, करनाल, हरियाणा
सैम हिग्गीनबॉटम कृषि, तकनीक एवं विज्ञान संस्थान, इलाहाबाद, यूपी
पदम भूषण वसंतदादा पाटिल कॉलेज, बीड, महाराष्ट्र
उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, इलाहाबाद, यूपी
देशभक्त विश्वविद्यालय, फतेहगढ़ साहेब, पंजाब
जवाहरलाल नेहरू पॉलीटेक्निक, मुरादाबाद, यूपी
एपेक्स विश्वविद्यालय, जयपुर, राजस्थान
डेरी विज्ञान कॉलेज, बंगलुरु, कर्नाटक

वेतन

डेरी प्लांट्स में डेरी तकनीक पेशेवरों को शुरूआत में प्रशिक्षु और शिफ्ट अधिकारी के रूप में नियुक्त किया जाता है। इस दौरान 20,000 से 25,000 रुपए के बीच वेतन मिल सकता है। कुछ साल के अनुभव के बाद पद के साथ वेतन में भी बढ़ोतरी का लाभ मिलता है।

रोजगार के अवसर

उत्पाद से जुड़े किसी भी पाठ्यक्रम को करने के बाद रोजगार के काफी विकल्प मौजूद होते हैं। डेरी तकनीक के विद्यार्थियों के लिए सरकारी और निजी दोनों ही क्षेत्रों में बहुत संभावनाएं हैं। डेरी फार्म, को-आॅपरेटिव सोसायटी, ग्रामीण बैंक और प्रसंस्कृत दुग्ध उत्पाद निर्मित करने वाली कंपनियों में डेरी तकनीक के पेशेवरों की नियुक्ति होती है। कुछ सालों का अनुभव हो जाने पर सलाहकार के रूप में काम की शुरूआत की जा सकती है। इसके अलावा डेरी तकनीक पाठ्यक्रम संचालित करने वाले संस्थानों से लेक्चरर के रूप में भी जुड़ा जा सकता है। विदेशों में भी डेयरी विशेषज्ञों की काफी मांग है। सिंगापुर, आॅस्ट्रेलिया, स्विट्जरलैंड और डेनमार्क में हर साल सैकड़ों नौकरियां निकलती हैं।

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