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दक्षिण अमेरिका में आज भी बिना कपड़ों के रहते हैं लोग, जानवरों का शिकार कर खाते हैं खाना

कहा जाता है कि फिलहाल इस जनजाति के मात्र चार हजार लोग ही बचे हुए हैं। इक्वाडोर सरकार ने विलुप्त होती इस जनजाति को बचाने के लिए साल 1990 में ‘वाओरानी एथनिक रिसर्व’ बनाया था, जिसकी वजह से आज ये संरक्षित आदिमानव हैं।
गुआरानी जनजाति।(फोटो सोर्स- यूट्यूब)

अमेरिका एक शक्तिशाली देश है। अमेरिका की आर्थिक व्यवस्था दुनियाभर के देशों की आर्थिक स्थिति पर प्रभाव डालती है। जब भी अमेरिका का नाम सामने आता है तो जहन में विकसित देश की छवी बन जाती है। लेकिन वही दूसरी ओर दक्षिण अमेरिका में लोग आदिवासी की जिंदगी जी रहे हैं, वो आज भी जानवरों का शिकार करके खाना खाते हैं। यहां तक कि इस जनजाति के लोग कपड़े भी नहीं पहनते हैं। यकीन नहीं होता? लेकिन ये सच है। दरअसल हम दक्षिण अमेरिका में बसी जनजाती के बारे में बात कर रहे हैं। आइए बताते हैं इस जनजाति के बारे में कुछ खास बातें।

आज के दौर में जहां विज्ञान ने उम्मीद से कई ज्यादा तरक्की कर ली है। तकनीक के विकास और मानव दिमाग की सोच की वजह से आज इंसान चांद तक छुपे राज तलाशने में लगा हुआ है। दुनियाभर के देश विकास की राह पर हैं। लेकिन वही दक्षिण अमेरिका में इकिवीडोर के पूर्वी जंगल में ऐसी जनजाति रहती है जो आज भी बिना कपड़ों के जंगल के जानवरों का शिकार करने के लिए उनके पीछे भाग रही है। क्योंकि आज भी ये लोग शिकार करके ही खाना खाते हैं।

अमेजन नदी के पास बसी गुआरानी जनजाति की महिलाएं, पुरुष और बच्चे सभी बिना कपड़ों के रहते हैं। आज भी गुआरानी जनजाति के लोगों का भोजन जंगल के जंगली जानवर हैं। पुरुष भोजन की तलाश में शिकार करने निकलते हैं। महिलाएं घर संभालने के साथ-साथ बच्चों का ख्याल रखती हैं। यहां के लोग कतई नहीं बदले वो आज भी आदिमानव का जीवन जी रहे हैं।

कहा जाता है कि फिलहाल इस जनजाति के मात्र चार हजार लोग ही बचे हुए हैं। इक्वाडोर सरकार ने विलुप्त होती इस जनजाति को बचाने के लिए साल 1990 में ‘वाओरानी एथनिक रिसर्व’ बनाया था, जिसकी वजह से आज ये संरक्षित आदिमानव हैं।

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