साम्या के दिन की शुरुआत सुबह के अलार्म से होती है और यहीं से शुरू हो जाती है उनकी भागदौड़। सुबह उठते ही किचन में नाश्ते की तैयारी करना, बच्चे का टिफन तैयार करना और फिर उसे स्कूल रवाना करके अपनी जिंदगी की दौड़ में मसरूफ हो जाना। एक हाथ में ऑफिस की फाइल और दूसरे में घर की जिम्मेदारी, यही आज की सुपरवुमेन की हकीकत है। आज के दौर में एक वर्किंग वुमेन की जिंदगी इन दो पाटों के बीच पिस रही है। सुपरवुमेन दिखने की चाहत, घर से लेकर ऑफिस तक की जिम्मेदारी ने महिलाओं के कंधों का बोझ बढ़ा दिया है। इस बोझ के तले महिलाओं की मानसिक सेहत खोखली होती जा रही है। क्या आप भी बिना किसी खास वजह के हर वक्त थकान और घबराहट महसूस करती हैं। रात में सुकून से सो नहीं पाती है और हर वक्त आपको किसी न किसी तरह का दर्द सताता रहता है तो आप अकेले नहीं है। अगर आप एक वर्किंग वुमेन हैं और खुद में इस तरह के लक्षण महसूस करती हैं तो आप एंजाइटी की शिकार है। हालिया रिपोर्ट्स और मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि ऑफिस और घर के बीच वर्क लाइफ बैलेंस बनाने की जद्दोजहद कामकाजी महिलाओं में एंजाइटी का सबसे बड़ा कारण बनती है।
Fortis Hospital और Adyuu Mindfulness मेंटल हेल्थ में क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट मीमांसा सिंह तंवर के अनुसार महिलाओं में एंग्जायटी के मामले अधिक देखे जा रहे हैं। इसके पीछे सोशल फैक्टर, हेल्थ फैक्टर और सपोर्ट फैक्टर की बड़ी भूमिका है। घर और ऑफिस की दोहरी जिम्मेदारियां महिलाओं पर मानसिक दबाव बढ़ाती हैं, जिससे एंग्जायटी का खतरा और बढ़ जाता है।
महिलाओं में एंजायटी का आंकड़ा?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की कई रिपोर्टों के मुताबिक वर्किंग विमेन में एंजाइटी और डिप्रेशन का स्तर पुरुषों की तुलना में काफी अधिक पाया गया है। WHO की Occupational Health रिपोर्ट बताती है कि वर्कप्लेस पर होने वाला भेदभाव और सुरक्षा की चिंता महिलाओं में एंग्जायटी लेवल को बढ़ा देती है। जिन महिलाओं को उनके वर्कप्लेस पर सपोर्ट सिस्टम नहीं मिलता उनमें बर्नआउट होने का खतरा 50% ज्यादा होता है। WHO के मुताबिक जेंडर गैप और जॉब इनसिक्योरिटी भी महिलाओं की मानसिक सेहत को प्रभावित करती है। समान काम के लिए कम वेतन मिलना महिलाओं में तनाव को बढ़ाता है। महिलाओं के करियर ग्रोथ में आने वाली बाधाएं महिलाओं में लो सेल्फ-एस्टीम और भविष्य को लेकर अनिश्चितता वाली एंजाइटी पैदा करती हैं।
सुपरवुमेन सिंड्रोम का मनोवैज्ञानिक पहलू (Psychological Angle)
महिलाओं में सुपरवुमेन दिखने की चाहत उन्हें जाने अनजाने में ही एंजायटी का शिकार बना रही है। दोहरी जिम्मेदारी ने महिलाओं के कंधों पर उम्मीदों का ऐसा बोझ डाल दिया है, जो धीरे-धीरे उनकी मानसिक सेहत को खोखला कर रहा है। जिसे महिलाएं अक्सर थकान समझकर हताश हो जाती है वो कुछ और नहीं है बल्कि एंजाइटी (Anxiety)है। ये एंजायटी महज एक मानसिक तनाव नहीं है, बल्कि ये आपकी सेहत, रिश्तों और करियर को भी प्रभावित कर रही है। महिलाओं की जिंदगी में डबल भार उनमें एंजायटी और डिप्रेशन लेकर आता है। महिलाओं में परफेक्शन का दबाव उनमें एंजायटी का कारण बनता है। महिलाओं से घर से लेकर ऑफिस तक में ज्यादा उम्मीद रखी जाती है जो महिलाओं में एंजायटी का कारण बनती है। महिलाओं में मल्टीटास्किंग होना उनके दिमाग पर दबाव बढ़ा रहा है।
महिलाओं में एंजायटी की पहचान कैसे करें?
अक्सर महिलाएं एंजाइटी को सिर्फ मानसिक मानती हैं, जबकि इसके शारीरिक लक्षण भी होते हैं। वर्किंग वुमेन में एंजायटी के लक्षणों की बात करें तो सुबह उठते ही काम करने में घबराहट महसूस होना, हर काम को करने में नकारात्मक सोच होना, किसी भी काम को करने से पहले ये सोचना कि मैं ये कैसे करूंगी। छोटी छोटी बातों को लेकर परेशान होना, घर में काम वाली नहीं आती तो उसे लेकर परेशान होना। कुछ खराब न हो जाएं, ये काम कैसे मैनेज होगा, कुछ गलत ना हो जाए इस तरह की सोच पैदा होती है। इस तरह की एंजायटी में आप बार-बार चेक करते हैं। आप जल्दी जल्दी इंफॉर्म होना चाहते हैं।
महिलाओं में एंजायटी का बॉडी पर इफेक्ट
महिलाओं में लम्बे समय तक एंजायटी रहने से उनकी सेहत पर भी इसका असर पड़ने लगता है। महिलाओं में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन बिगड़ने लगते हैं। लगातार तनाव में रहने से महिलाओं में पीरियड साइकिल अनियमित हो सकता है, PMS का बढ़ना और PCOS जैसी समस्याएं ट्रिगर हो सकती हैं। एंजायटी की वजह से दिल की धड़कन तेज होने लगती है जिससे घबराहट,पसीना आना और ब्लड प्रेशर बढ़ता है। लम्बे समय तक ये स्थिति दिल के रोगों का कारण बन सकती है।
एंजायटी से पाचन पर भी पड़ता है असर। लगातार लम्बे समय तक एंजायटी की वजह से गैस, एसिडिटी,कब्ज और अपच जैसी परेशानी हो सकती है। लगातार तनाव नींद में खलल डाल सकता है। रात में सुकून की नींद नहीं आती जिससे बॉडी में थकान और मिजाज़ में चिड़चिड़ापन रहता है। एंजायटी की वजह से महिलाओं के कंधों, गर्दन और पीठ में जकड़न और दर्द महसूस होता है। लम्बे समय तक एंजायटी इम्यूनिटी को कमजोर कर देती है और महिलाओं की प्रजनन क्षमता को भी प्रभावित करती है।
वर्क-लाइफ को बैलेंस कैसे करें
- अगर आप वर्किंग वुमेन है और घर से लेकर ऑफिस तक की जिम्मेदारी संभालती है तो आप खामोश होकर सिर्फ काम नहीं करती रहें बल्कि आप No कहना भी सीखें।
- घर में और ऑफिस में अपनी सीमाएं सुनिश्चित करें।
- घर के सारे काम अकेले नहीं करें बल्कि अपनी फैमिली की भी स्पोर्ट लें।
- काम के बीच में 5 मिनट का मेडिटेशन या गहरी सांस लेना।
- एंजायटी से बचाव करने के लिए आप दवाओं का और थैरेपी का सहारा ले सकते हैं।
- परिवार के लोग महिलाओं को स्पोर्ट करें।
- महिलाएं को खुद को ऐसे कामों में बीजी रखें जिसमें उन्हें खुशी हासिल होती है।
- आप ऑफिस में कुछ देर के लिए अपनी सीट से उठे और कुछ देर आस-पास के लोगों से बात करें या वॉक करें।
- अगर घबराहट की वजह से आपका कामकाज प्रभावित हो रहा है तो आप किसी मनोचिकित्सक (Psychiatrist) या काउंसलर से सलाह लें।
डाइट का ध्यान रखें
अक्सर लोग एंजायटी में बहुत ज्यादा चाय और कॉफी पीते हैं या फिर मीठा ज्यादा खाते हैं। आप ज्यादा चाय और कॉफी का सेवन करने के बजाय हर्बल टी का सेवन करें। पानी का पर्याप्त सेवन करें। आप डाइट में साबुत अनाज, हरी सब्जियां, मौसमी फल, नट्स और प्रोटीन से भरपूर डाइट का सेवन करें। डाइट में मैग्नीशियम और ओमेगा-3 फैटी एसिड जैसे पोषक तत्वों को शामिल करें, मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी। गलत डाइट आपकी एंजायटी को बढ़ा सकती है इसलिए बैलेंस डाइट लें।
डिस्क्लेमर:
ये जानकारी केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए है। लेख में दी गई सलाह किसी पेशेवर चिकित्सा परामर्श का विकल्प नहीं है। किसी भी समस्या के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।
