इंडोनेशिया में पिछले शनिवार को आए भूकंप के कारण मरने वालों की संख्या बढ़कर 70 हो गई है, जबकि 1,100 से अधिक लोग घायल हो गए हैं। रिक्टर पैमाने पर 7.7 की तीव्रता के इस भूकंप का केंद्र पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत का फ्लोरेस द्वीप था। केवल इस वर्ष ही 7 से अधिक तीव्रता के दो भूकंप इंडोनेशिया में आ चुके हैं और 8 से अधिक की तीव्रता के भूकंप हर 5 से 7 वर्ष में आ जाते हैं, जो इस देश के भूकंप के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है।
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, इंडोनेशिया दुनिया के सबसे अधिक भूकंपीय रूप से सक्रिय देशों में शामिल है। यहां औसतन हर साल 7 तीव्रता का एक भूकंप आता है, जबकि 8 से अधिक तीव्रता वाले भूकंप की घटना लगभग हर 5 से 7 वर्ष में हो सकती है। इसके अलावा, USGS के अनुसार, देश के किसी न किसी हिस्से में 9 या उससे अधिक तीव्रता का भूकंप लगभग हर 100 वर्ष में आने की संभावना रहती है।
इंडोनेशिया के भूकंप के प्रति इस उच्च संवेदनशीलता के कारण
इंडोनेशिया में बार-बार आने वाले शक्तिशाली भूकंपों का प्रमुख कारण उसकी भौगोलिक और विवर्तनिक स्थिति है। देश ‘पैसिफिक रिंग ऑफ फायर’ के सक्रिय भूकंपीय क्षेत्र में स्थित है। दुनिया के अधिकांश भूकंप इसी क्षेत्र में आते हैं।
यह देश कई विवर्तनिक प्लेटों के संगम पर स्थित है। इसका अधिकांश पश्चिमी और मध्य भाग सुंडा प्लेट के ऊपर स्थित है, जबकि इसके विभिन्न हिस्से इंडो-ऑस्ट्रेलियाई, प्रशांत और फिलीपीन सागर प्लेटों से जुड़ी जटिल प्लेट सीमाओं के प्रभाव में आते हैं। इस तरह इंडोनेशिया कई सक्रिय विवर्तनिक प्लेटों के परस्पर संपर्क क्षेत्र में स्थित है, जहां प्लेटें एक-दूसरे के नीचे धंसती हैं, टकराती हैं या एक-दूसरे के सापेक्ष खिसकती हैं; जिनके कारण इस क्षेत्र में निरंतर भूकंप आते रहते हैं। यहीं कारण है कि यहाँ 1901 से 2019 की अवधि के दौरान 7 से अधिक तीव्रता के 150 से भी ज्यादा भूकंप आए हैं।
यहाँ आने वाले भूकंपों का सबसे प्रमुख कारण सूंडा सबडक्शन जोन है, जो सुमात्रा से लेकर जावा और आगे तक फैला हुआ है। इस समुद्री खाई में इंडो-ऑस्ट्रेलियाई प्लेट के सुंडा प्लेट के नीचे धंसने से सुमात्रा, जावा और नुसा तेंगारा द्वीपों के आसपास बड़े भूकंप आते हैं और ज्वालामुखीय गतिविधियां होती हैं। यहीं कारण है कि इंडोनेशिया में आए 10 सबसे शक्तिशाली भूकम्पों (8 से अधिक तीव्रता) में से छह सुमात्रा के पास और सुंडा गर्त के समानांतर आए हैं।
प्लेटों की टक्कर के अलावा, इंडोनेशियाई द्वीप समूह के भीतर कई स्थानीय दरारें मौजूद हैं—जैसे ‘ग्रेट सुमात्रा फॉल्ट’ और फ्लोरेस / बांदा सागर क्षेत्र की स्थानीय दरारें। इन दरारों में होने वाली हलचल के कारण भी बार-बार उथले और विनाशकारी भूकंप आते हैं।
इंडोनेशिया में बार-बार आने वाले विनाशकारी भूकंपों का कारण उसकी जटिल विवर्तनिक संरचना है। पैसिफिक रिंग ऑफ फायर, सुंडा सबडक्शन जोन, सक्रिय भ्रंश, बैक-आर्क कंप्रेशन और कई टेक्टोनिक प्लेटों की परस्पर क्रियाएं इसे भूकंपीय रूप से संवेदनशील बनाती है।
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वेनेजुएला में पिछले हफ्ते आए भूकंप से 1,450 लोगों की जान गयी है। साथ ही, हजारों लोग घायल हैं और कई लोग लापता बताये जा रहे हैं। बुधवार शाम को आया 7.2 और 7.5 तीव्रता का भूकंप वेनेजुएला में एक सदी से भी अधिक समय में आये सबसे शक्तिशाली भूकंपों में से एक था, इसके झटके पूरे इलाके में महसूस किये गए। भूकंप के बाद से ही राहत और बचाव अभियान जारी है। इस सबके बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि भूकंप के बाद फंसे हुए लोग कितने समय तक जीवित रह सकते हैं? पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
