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जानिए कौन हैं विजया गाड्डे, जिन्होंने कर दिया था ट्रंप और न्यूयॉर्क पोस्ट को ब्लॉक, अब आ गईं एलन मस्क के निशाने पर

पॉलिटिको में छपी रिपोर्ट के अनुसार, एलन मस्‍क के टेकओवर के बाद विजया ने ट्विटर की पॉलिसी और लीगल टीमों की वर्चुअल मीटिंग बुलाई। चर्चा के दौरान यह बताते-बताते विजया रोने लगीं कि आने वाले समय में कंपनी कैसे बदल सकती है।

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ट्विटर की लीगल, पॉलिसी और सेफ्टी इशूज की हेड विजया गाड्डे (Photo Source- Twitter)

माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर को 44 बिलियन डॉलर में खरीदने के बाद एलन मस्‍क ‘फ्री स्‍पीच’ को बढ़ावा देना चाहते हैं। कंपनी खरीदने के कुछ दिनों बाद ही ट्विटर के कई शीर्ष अधिकारी एलन मस्‍क के निशाने पर हैं। उनका ताजा शिकार बनी हैं विजया गाड्डे। बिना नाम लिए मस्‍क ने कंपनी की लीगल, पॉलिसी और सेफ्टी इशूज की हेड विजया गाड्डे पर निशाना साधा। कभी ‘सबसे ताकतवर सोशल मीडिया एक्‍जीक्‍यूटिव’ करार दी गईं विजया की मस्‍क ने न्यूयॉर्क पोस्ट का अकाउंट सस्‍पेंड करने के लिए आलोचना की।

एलन मस्क ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के बेटे पर एक विवादास्पद लेख के लिए न्यूयॉर्क पोस्ट का ट्विटर अकाउंट सस्पेंड करने को बेहद अनुचित बताया। मस्‍क भारतीय-अमेरिकी कंजरवेटिव सागर एनजेती के ट्वीट का जवाब दे रहे थे जिन्‍होंने पॉलिटिको की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि विजया गाड्डे इस हफ्ते अपने स्‍टाफ के साथ मीटिंग में रो पड़ीं। यह बैठक मस्‍क के ट्विटर को 44 बिलियन डॉलर में खरीदने के बाद हुई।

कौन हैं विजया गाड्डे? ट्विटर की लीगल, पॉलिसी और सेफ्टी इशूज की हेड विजया गाड्डे पेशे से वकील हैं। उन्होंने 2011 में कंपनी जॉइन की थी। कई रिपोर्ट्स में उन्‍हें ट्विटर का ‘मॉरल अथॉरिटी’ बताया गया है। 2014 में फॉर्च्‍यून ने उन्‍हें ट्विटर एक्‍जीक्‍यूटिव टीम की ‘सबसे ताकतवर महिला’ करार दिया था। पॉलिटिको के अनुसार, मस्‍क और ट्विटर के बीच डील में विजया गाड्डे की अहम भूमिका थी। विजया इससे पहले ट्विटर की लीगल डायरेक्‍टर रह चुकी हैं।

हैदराबाद में हुआ था जन्म: विजया 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों से पहले ट्विटर पर राजनीतिक विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाने जैसे महत्वपूर्ण फैसलों के कारण सुर्खियों में आयीं थी। तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का अकाउंट सस्पेंड करने के फैसले के पीछे भी उनका ही हाथ था। हैदराबाद में जन्मी विजया गाड्डे टेक्सास में पली-बढ़ी हैं। वह कॉर्नेल यूनिवर्सिटी और न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ लॉ से ग्रेजुएट हैं।

मांगनी पड़ी थी माफी: विजया 2018 में भारत आई थीं। उस वक्‍त विजया और ट्विटर फाउंडर जैक डॉर्सी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिले थे। यहां उन्‍होंने कुछ महिला पत्रकारों, एक्टिविस्‍ट्स से मुलाकात की। इस मीटिंग के दौरान जैक के हाथों में एक प्‍लेकार्ड था जिसपर लिखा था ‘Smash Brahminical patriarchy’। इस तस्‍वीर पर खूब बवाल मचा। जिसके बाद ट्विटर इंडिया ने बयान में कहा कि डॉर्सी को यह प्‍लेकार्ड किसी दलित एक्टिविस्‍ट ने पकड़ाया था। हालांकि, इसके बाद विजया गाड्डे ने भी माफी मांगी थी।

ट्विटर के पूर्व सीईओ ने लगाई मस्क को फटकार: विजया के फैसले को गलत बताने के साथ ही बुधवार (27 अप्रैल) को एलन मस्क ने ट्विटर के वामपंथी पूर्वाग्रह के बारे में एक मीम पोस्ट किया था, जिसमें गाड्डे का चेहरा बना हुआ था। जिसके बाद ट्विटर के पूर्व सीईओ डिक कोस्टोलो ने मस्क को फटकार लगाते हुए कहा था कि वो हाल ही में खरीदी गयी कंपनी के एक अधिकारी को उत्पीड़न और धमकियों का निशाना क्यों बना रहे हैं?

सोशल मीडिया यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं: एलन मस्क के ट्वीट और विजया गाड्डे के फैसलों को निशाना बनाते हुए सोशल मीडिया यूजर्स ने भी अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। गाड्डे को ट्रोल करते हुए कई लोगों ने उन्हें ट्विटर से निकालने की सलाह दी और सुझाव दिया कि उन्हें खुद ही चले जाना चाहिए। कई यूजर्स ने उन पर अपमानजनक और जातिवादी टिप्पणियां की। कुछ ने गाड्डे की भारतीय विरासत का जिक्र करते हुए अपशब्दों और नस्लवादी टिप्पणियां की।

कुछ ने अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए उन्हें सच बोलने के लिए अनगिनत ट्विटर अकाउंट को सस्पेंड करने का दोषी ठहराया। हालांकि, कुछ अपमानजनक ट्वीट्स को बाद में ट्विटर के नियमों का उल्लंघन करने के लिए हटा दिया गया था। वहीं, कई यूजर्स मस्क के खिलाफ भी खड़े हुए और विजया गाड्डे का साथ दिया।

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